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इस ‘दशानन’ का हो दहन
Firozabad
Updated Fri, 03 Oct 2014 05:30 AM IST
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विजय दशमी पर्व पर दशानन का पुतला फूंकने पर कर्त्तव्य की इतिश्री नहीं होती है। आज उस रावण को जलाने के स्थान पर हमें समाज में व्याप्त दस बुराइयों और ज्वलंत समस्याओं को खत्म करना होगा। इसके बाद ही असल मायने में विजय दशमी होगी। इसके बाद ही हम अपना सुनहरा भविष्य देख सकेंगे। आज भ्रष्टाचार कोढ़ बन गया है। दहेज हत्या, कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराई, बेरोजगारी, अशिक्षा, बिजली एवं पानी संकट, खराब स्वास्थ्य सेवाएं जैसी समस्याओं ने आज समाज की प्रगति को रोक रखा। वहीं आरटीआई जैसे कानून महज नाममात्र के लिए रह गया है।
एक - भ्रष्टाचार :
भ्रष्टाचार आज अपने चरम पर है। सरकारी विभागों से इसका सफाया करना नामुमकिन हो गया है। पालिका की डीजल घोटाला इसका ताजा उदाहरण है। एआरटीओ कार्यालय में खुद ही डीएम ने स्टिंग कर भ्रष्टाचार की पोल खोली थी। वहीं लोक नागरिक कल्याण समिति ने बैंक में स्टिंग कर हकीकत उजागर की।
2-दहेज :
दहेज रूपी दानव महिलाओं को खाए जा रहा है। नगला खंगर क्षेत्र में दहेज की खातिर एक विवाहिता को जिंदा जला दिया। मायका पक्ष को शव तक देखने को नहीं मिला। जनवरी से अभी तक करीब 45 महिलाओं को दहेज रूपी काल अपने गाल में समा चुका है।
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पेयजल संकट : जिले में 32 हजार हैंडपंप और 150 से अधिक पानी की टंकियां स्थापित होने के बावजूद जनता शुद्ध पानी की दो बूंद पीने को तरस रही है। शहर के मोहल्ले हों अथवा गांव-गलियां, चहुंओर पानी का संकट दिखाई देता है।
4-बिजली-लाख प्रयासों के बावजूद बिजली अब तक गांव-गांव नहीं पहुंची है। जिले में 475 गांव के लोग अब तक एक बल्ब की रोशनी के लिए तरसते हैं। नगला खंगर का गांव सरनामपुर सूरज छिपते ही अंधकार में डूब जाता है।
5-दुष्कर्म-महिलाओं एवं बच्चियों के साथ दुष्कर्म की वारदातों में तेजी से इजाफा हुआ है। रैपुरा के समीप खैरगढ़ की ओर जाने वाली बस में एक मासूम बालिका दुष्कर्म का शिकार हो गई। वहीं लोह पीटा समाज की किशोरी को जबरन उठकर ले गए और उसके साथ दुष्कर्म किया। एक वर्ष में देखें तो करीब तीन दर्जन से अधिक वारदातें हो चुकी हैं।
6-कन्या भ्रूण हत्या: इसे रोकने के लिए सख्त कानून बने लेकिन कन्या भ्रूण हत्या पर अब तक नहीं अंकुश नहीं लग सका है। कन्याओं को गर्भ में मारने की प्रक्रिया लुकाछिपी से आज भी जारी है। इसे सख्ती से रोकने की आवश्यकता है।
7-बेरोजगारी-रोजगार का अभाव होना भी समाज में कई अपराधों को जन्म देता है। जिले में बड़ी संख्या में युवा हाथ खाली है। लोगों के पास रोजगार के साधन नहीं है। सेवायोजन विभाग में पंजीयन कराने वालों की संख्या 86 हजार से भी अधिक है। ऐसे में सरकार द्वारा घोषित बेरोजगारी भत्ता भी मिलना बंद हो गया है।
8-आरटीआई-सूचना का अधिकार अधिनियम आम जनता तक हर सूचना पहुंचाने का हथियार था लेकिन कानून का पालन ही नहीं हो रहा है। सूचना मांगने पर आम जनता को धमकी, चेतावनी और गलत मामले में फंसाने जैसी साजिशें रची जा रही हैं ।
9-अशिक्षा-अशिक्षा रूपी रावण तो समाज की प्रगति में बाधक बना हुआ है। लाख प्रयासों के बावजूद दूरस्थ गांव में शिक्षा की किरण नहीं पहुंच सकी है। 25 लाख आबादी वाले जिले में करीब 70 प्रतिशत लोग ही शिक्षित है। 30 प्रतिशत लोग खुद का नाम तक नहीं लिख पाते।
10-चिकित्सा-अरबों रुपया चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने पर सरकार ने खर्च कर दिए। इसके बावजूद जनता को सुविधा नहीं मिल रही है। गरीबों को इलाज नहीं मिल रहा है। कई पीएचसी पर तो लाखों रुपये की मशीनें धूल फांक रहीं है।
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एक - भ्रष्टाचार :
भ्रष्टाचार आज अपने चरम पर है। सरकारी विभागों से इसका सफाया करना नामुमकिन हो गया है। पालिका की डीजल घोटाला इसका ताजा उदाहरण है। एआरटीओ कार्यालय में खुद ही डीएम ने स्टिंग कर भ्रष्टाचार की पोल खोली थी। वहीं लोक नागरिक कल्याण समिति ने बैंक में स्टिंग कर हकीकत उजागर की।
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2-दहेज :
दहेज रूपी दानव महिलाओं को खाए जा रहा है। नगला खंगर क्षेत्र में दहेज की खातिर एक विवाहिता को जिंदा जला दिया। मायका पक्ष को शव तक देखने को नहीं मिला। जनवरी से अभी तक करीब 45 महिलाओं को दहेज रूपी काल अपने गाल में समा चुका है।
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पेयजल संकट : जिले में 32 हजार हैंडपंप और 150 से अधिक पानी की टंकियां स्थापित होने के बावजूद जनता शुद्ध पानी की दो बूंद पीने को तरस रही है। शहर के मोहल्ले हों अथवा गांव-गलियां, चहुंओर पानी का संकट दिखाई देता है।
4-बिजली-लाख प्रयासों के बावजूद बिजली अब तक गांव-गांव नहीं पहुंची है। जिले में 475 गांव के लोग अब तक एक बल्ब की रोशनी के लिए तरसते हैं। नगला खंगर का गांव सरनामपुर सूरज छिपते ही अंधकार में डूब जाता है।
5-दुष्कर्म-महिलाओं एवं बच्चियों के साथ दुष्कर्म की वारदातों में तेजी से इजाफा हुआ है। रैपुरा के समीप खैरगढ़ की ओर जाने वाली बस में एक मासूम बालिका दुष्कर्म का शिकार हो गई। वहीं लोह पीटा समाज की किशोरी को जबरन उठकर ले गए और उसके साथ दुष्कर्म किया। एक वर्ष में देखें तो करीब तीन दर्जन से अधिक वारदातें हो चुकी हैं।
6-कन्या भ्रूण हत्या: इसे रोकने के लिए सख्त कानून बने लेकिन कन्या भ्रूण हत्या पर अब तक नहीं अंकुश नहीं लग सका है। कन्याओं को गर्भ में मारने की प्रक्रिया लुकाछिपी से आज भी जारी है। इसे सख्ती से रोकने की आवश्यकता है।
7-बेरोजगारी-रोजगार का अभाव होना भी समाज में कई अपराधों को जन्म देता है। जिले में बड़ी संख्या में युवा हाथ खाली है। लोगों के पास रोजगार के साधन नहीं है। सेवायोजन विभाग में पंजीयन कराने वालों की संख्या 86 हजार से भी अधिक है। ऐसे में सरकार द्वारा घोषित बेरोजगारी भत्ता भी मिलना बंद हो गया है।
8-आरटीआई-सूचना का अधिकार अधिनियम आम जनता तक हर सूचना पहुंचाने का हथियार था लेकिन कानून का पालन ही नहीं हो रहा है। सूचना मांगने पर आम जनता को धमकी, चेतावनी और गलत मामले में फंसाने जैसी साजिशें रची जा रही हैं ।
9-अशिक्षा-अशिक्षा रूपी रावण तो समाज की प्रगति में बाधक बना हुआ है। लाख प्रयासों के बावजूद दूरस्थ गांव में शिक्षा की किरण नहीं पहुंच सकी है। 25 लाख आबादी वाले जिले में करीब 70 प्रतिशत लोग ही शिक्षित है। 30 प्रतिशत लोग खुद का नाम तक नहीं लिख पाते।
10-चिकित्सा-अरबों रुपया चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने पर सरकार ने खर्च कर दिए। इसके बावजूद जनता को सुविधा नहीं मिल रही है। गरीबों को इलाज नहीं मिल रहा है। कई पीएचसी पर तो लाखों रुपये की मशीनें धूल फांक रहीं है।