{"_id":"5-60585","slug":"Firozabad-60585-5","type":"story","status":"publish","title_hn":"मजदूरी के साथ-साथ की पढ़ाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मजदूरी के साथ-साथ की पढ़ाई
Firozabad
Updated Mon, 10 Jun 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। पढ़ाई की लगन लगी तो आर्थिक तंगी को रोड़ा नहीं बनने दिया। छोटी सी उम्र में ही हाथों ने कलम के साथ-साथ कारीगरी का हुनर भी सीख लिया।
पिता रामहंस मजदूर हैं सो घर की हालत पतली है। जिस में घर में दो वक्त की रोटी के लिए जद्दोजहद करनी पड़े वहां पढ़ाई के लिए पैसे कहां से आएं। लेकिन इन विपरीत परिस्थितियों में भी सौरभ झा ने हार नहीं मानी। कंगन कारीगरी का हुनर सीख पढ़ाई के लिए धन जुटाया तो वहीं मेनहत कर हाईस्कूल की परीक्षा में 87.5 प्रतिशत अंक हासिल किए। सौरभ ने बताया कि दिन में कंगन बनाने का काम व रात में पढ़ाई करता था। स्कूल के बाद वह गणित की कोचिंग जाता था। इसके बाद फिर कंगन बनाने में लग जाता। वह आईआईटी इंजीनियर बनने की तमन्ना रखता है।
कारीगर के बेटे का कमाल
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। मात्र 13 वर्ष की आयु में हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण कर वसीम अली ने अपने पिता का नाम रोशन किया। अशरफगंज निवासी वसीम ने 80 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। पिता बैटरी मरम्मत का काम करते हैं। अभावों के बीच पढ़ने वाले वसीम की सफलता पर पिता खुशी से फूले नहीं समा रहे थे।
विज्ञापन
पिता रामहंस मजदूर हैं सो घर की हालत पतली है। जिस में घर में दो वक्त की रोटी के लिए जद्दोजहद करनी पड़े वहां पढ़ाई के लिए पैसे कहां से आएं। लेकिन इन विपरीत परिस्थितियों में भी सौरभ झा ने हार नहीं मानी। कंगन कारीगरी का हुनर सीख पढ़ाई के लिए धन जुटाया तो वहीं मेनहत कर हाईस्कूल की परीक्षा में 87.5 प्रतिशत अंक हासिल किए। सौरभ ने बताया कि दिन में कंगन बनाने का काम व रात में पढ़ाई करता था। स्कूल के बाद वह गणित की कोचिंग जाता था। इसके बाद फिर कंगन बनाने में लग जाता। वह आईआईटी इंजीनियर बनने की तमन्ना रखता है।
कारीगर के बेटे का कमाल
फीरोजाबाद (ब्यूरो)। मात्र 13 वर्ष की आयु में हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण कर वसीम अली ने अपने पिता का नाम रोशन किया। अशरफगंज निवासी वसीम ने 80 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। पिता बैटरी मरम्मत का काम करते हैं। अभावों के बीच पढ़ने वाले वसीम की सफलता पर पिता खुशी से फूले नहीं समा रहे थे।
विज्ञापन