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एसएनएमीसी में 12 पलंग में 22 मासूम
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फिरोजाबाद ! जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में एक मशीन पर लेटे दो-दो बच्चे
- फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। बढ़ती ठंड बच्चों के लिए मुसीबत बन रही है। बच्चे निमोनिया और हाइपोर्थमिया (अल्पताप) की चपेट में आ रहे हैं। सर्दी से फेफड़े जाम होने के चलते मासूमों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू में 12 पलंग के वार्ड में 22 मासूम भर्ती हैं। एक पलंग पर दो-दो मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। इसके साथ ही निजी अस्पतालों में भी मरीजों की लाइन लगी हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि बढ़ती सर्दी शिशुओं के लिए परेशानी का कारण बन रही है। जन्म से 28 दिन तक के नवजात सर्दी में निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है। ऐसे में सभी शिशुओं को वार्मर में रखा गया है। कुछ बच्चे पीलिया से भी पीड़ित हैं। बच्चों को फोट थैरेपी दी गई। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. एलके गुप्ता ने बताया कि सर्दी के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही नवजात शिशुओं को भारी पड़ जाती है।
पैदा होने के बाद शिशु ठंड के चलते हाइपोर्थमिया की चपेट में आ जाते हैं। इससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है। शिशुओं के शरीर में भी संक्रमण फैलने लगता है। ऐसी दशा में बच्चों को तत्काल चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए। थोड़ी सी लापरवाही बच्चों के लिए घातक साबित हो सकती है। विभागाध्यक्ष डॉ. गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में 12 पलंग के वार्ड में 22 बच्चे भर्ती हैं। कई नवजात बच्चों को डिस्चार्ज किया जा चुका है। शहर के निजी अस्पताल में भी इन दिनों बीमार बच्चे पहुंच रहे हैं। ऐसे में चिकित्सक उन्हें भाप दिलाने की सलाह दे रहे हैं।
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नवजात बच्चों को सर्दी से ऐसे रखें दूर
एसएनसीयू वार्ड के चिकित्सक डॉ. दीपक कुमार ने बताया कि सर्दी के मौसम में नवजात शिशुओं को गर्म कपड़ों में रखें। सर्दी होने पर बच्चों को मां का दूध जरूर पिलाना चाहिए। बच्चे का डायपर बदलते रहना चाहिए। हल्के गुनगुने पानी में कपड़ा भिगोकर बच्चे के शरीर को पोछते रहें।
तेजी से सांस खींचने पर कराएं चेकअप
चिकित्सक ने का कहा कि ठंड होने के बाद बच्चे तेजी से सांस ले सकते हैं। यदि बच्चों की सामान्य से अधिक तेज सांस चलने लगे तो उसे तत्काल चिकित्सक के पास ले जाएं। निमोनिया से बच्चे के सीने में इंफेक्शन बढ़ सकता है।
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चिकित्सकों का कहना है कि बढ़ती सर्दी शिशुओं के लिए परेशानी का कारण बन रही है। जन्म से 28 दिन तक के नवजात सर्दी में निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है। ऐसे में सभी शिशुओं को वार्मर में रखा गया है। कुछ बच्चे पीलिया से भी पीड़ित हैं। बच्चों को फोट थैरेपी दी गई। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. एलके गुप्ता ने बताया कि सर्दी के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही नवजात शिशुओं को भारी पड़ जाती है।
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पैदा होने के बाद शिशु ठंड के चलते हाइपोर्थमिया की चपेट में आ जाते हैं। इससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है। शिशुओं के शरीर में भी संक्रमण फैलने लगता है। ऐसी दशा में बच्चों को तत्काल चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए। थोड़ी सी लापरवाही बच्चों के लिए घातक साबित हो सकती है। विभागाध्यक्ष डॉ. गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में 12 पलंग के वार्ड में 22 बच्चे भर्ती हैं। कई नवजात बच्चों को डिस्चार्ज किया जा चुका है। शहर के निजी अस्पताल में भी इन दिनों बीमार बच्चे पहुंच रहे हैं। ऐसे में चिकित्सक उन्हें भाप दिलाने की सलाह दे रहे हैं।
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नवजात बच्चों को सर्दी से ऐसे रखें दूर
एसएनसीयू वार्ड के चिकित्सक डॉ. दीपक कुमार ने बताया कि सर्दी के मौसम में नवजात शिशुओं को गर्म कपड़ों में रखें। सर्दी होने पर बच्चों को मां का दूध जरूर पिलाना चाहिए। बच्चे का डायपर बदलते रहना चाहिए। हल्के गुनगुने पानी में कपड़ा भिगोकर बच्चे के शरीर को पोछते रहें।
तेजी से सांस खींचने पर कराएं चेकअप
चिकित्सक ने का कहा कि ठंड होने के बाद बच्चे तेजी से सांस ले सकते हैं। यदि बच्चों की सामान्य से अधिक तेज सांस चलने लगे तो उसे तत्काल चिकित्सक के पास ले जाएं। निमोनिया से बच्चे के सीने में इंफेक्शन बढ़ सकता है।