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Firozabad News: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष का कारावास
Mon, 23 Dec 2024 11:54 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Mon, 23 Dec 2024 11:54 PM IST
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फिरोजाबाद। अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट संख्या-3 राजीव सिंह ने एक वर्ष पूर्व नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले दोषी को 20 वर्ष का कारावास एवं 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा नहीं करने पर दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। अर्थदंड की आधी धनराशि पीड़िता को दिए जाने का आदेश दिया।मामला थाना शिकोहाबाद क्षेत्र का एक वर्ष पहले का है। पीड़िता ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा कि जब वह कक्षा छह में पढ़ती थी, तब उसके गांव के मयंक उर्फ रामशरन ने उससे दोस्ती करने को कहा। मैंने उससे दोस्ती में कोई एतराज नहीं किया। घटना से एक वर्ष पहले पीड़िता ने दोषी के माता, पिता, भाई के सामने भी दोषी ने पीड़िता के साथ शादी करने की कहा था। तब उन लोगों ने भी शादी के लिए सहमति दे दी थी। दोषी द्वारा शादी का आश्वासन दिए जाने जाने पर पीड़िता को उससे शारीरिक संबंध बनाने में कोई एतराज नहीं हुआ।
वह समय-समय पर शारीरिक संबंध स्थापित करता रहा। जिससे वह सात माह की गर्भवती हो गई। इसके बाद दोषी ने उससे शादी करने से इन्कार कर दिया। उसके परिजन भी अपने घर में पीड़िता को रखने के लिए तैयार नहीं हुए। तब पीड़िता ने थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने विवेचना उपरांत दोषी के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मुकदमा की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश एवं पॉक्सो कोर्ट नंबर 3 राजीव सिंह की न्यायालय में की गई। न्यायालय ने दोषी पर आरोप लगाया जिसने आरोप से इन्कार करते हुए सत्र परीक्षण की मांग की। न्यायालय में न्यायाधीश राजीव सिंह ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने एवं पत्रावली का गहनता से अध्ययन करने के बाद मंयक उर्फ रामशरन को दोषी पाते हुए सजा सुनाई।
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वह समय-समय पर शारीरिक संबंध स्थापित करता रहा। जिससे वह सात माह की गर्भवती हो गई। इसके बाद दोषी ने उससे शादी करने से इन्कार कर दिया। उसके परिजन भी अपने घर में पीड़िता को रखने के लिए तैयार नहीं हुए। तब पीड़िता ने थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने विवेचना उपरांत दोषी के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मुकदमा की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश एवं पॉक्सो कोर्ट नंबर 3 राजीव सिंह की न्यायालय में की गई। न्यायालय ने दोषी पर आरोप लगाया जिसने आरोप से इन्कार करते हुए सत्र परीक्षण की मांग की। न्यायालय में न्यायाधीश राजीव सिंह ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने एवं पत्रावली का गहनता से अध्ययन करने के बाद मंयक उर्फ रामशरन को दोषी पाते हुए सजा सुनाई।
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