गैस महंगी होने से कांच उद्योग की फिर बढ़ेगी मुश्किल
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सुहागनगरी में वर्ष 1996 से 200 कांच इकाइयां नेचुरल गैस से संचालित हो रही हैं। गेल गैस लि. ने एपीएम, आरएलएनजी की खपत के आधार पर गैस की रेट निर्धारित की जाती है।
वर्तमान में कांच व चूड़ी उद्योग में प्रतिदिन करीब 14 लाख घनमीटर से अधिक गैस की खपत हो रही है। इसकी गैल 20 रुपये की दर से बिलिंग कर रही है। केंद्र सरकार ने एक अक्टूबर 2018 को गैस की कीमत में करीब 15 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी की गई थी। कांच उद्योग पूर्व की रेट बढ़ोत्तरी से अभी तक नहीं उबर पाया। अब केंद्र सरकार ने फिर रेट बढ़ोत्तरी की तैयारी कर ली है।
30 रुपये तक पहुंच सकते हैं गैस के दाम
उद्यमियों का कहना है कि गेल गैस लि. से वर्तमान में 20 रुपये की रेट से बिलिंग की जा रही है। यदि केंद्र सरकार ने एक अप्रैल से गैस की कीमतों में 10 प्रतिशत तक इजाफा तो गैस की रेट 30 रुपये तक पहुंच जाएंगी।
बोले उद्यमी
फिरोजाबाद का कांच उद्योग टीटीजेड के अंतर्गत आता है। यहां नेचुरल गैस के अलावा कोई ईंधन प्रयोग नहीं हो सकता। केंद्र सरकार को टीटीजेड के लिए अलग से सोचना चाहिए। इसी प्रकार गैस की रेट बढ़ती रही तो फिरोजाबाद का कांच उद्योग समाप्त हो जाएगा।
राजकुमार मित्तल, अध्यक्ष-यूपीजीएमएस
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चूड़ी इंडस्ट्रीज को नेचुरल गैस मिली है। गैस की रेट हंगी होने से चूड़ी बिकना बंद हो जाएगी, जिससे चूड़ी उद्योग बर्बाद हो जाएग। सरकार को चाहिए चूड़ी इकाइयों को एपीएम गैस दी जाए, जिससे हजारों मजदूरों की रोजी रोटी चलती रही।
हनुमान प्रसाद गर्ग , निदेशक, दि ग्लास इंडस्ट्रियल सिंडीकेट
गैस की रेट दस प्रतिशत बढ़ने से लोगों का चूड़ी उद्योग पर बड़ा असर पडे़गा। तीन से चार रुपये प्रति तोड़ा रेट बढ़ जाएंगे। जबकि चूड़ी उद्योग बढ़े हुए रेट झेलने की स्थिति में नहीं हैं। पता चला है कि सरकार उद्योगों को मिलने वाली गैस पर सब्सिडी खत्म कर सकती है।
पी.के झिंदल, चूड़ी कारखाना संचालक