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Firozabad News: दुष्कर्म के प्रयास के दोषी को 10 वर्ष का कारावास
Wed, 16 Oct 2024 01:26 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Wed, 16 Oct 2024 01:26 AM IST
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फिरोजाबाद। अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश पॉक्सो न्यायालय मुमताज अली ने नौ वर्ष पुराने मामले में 14 वर्षीय नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म का प्रयास करने एवं जान से मारने की धमकी देने के दोषी को 10 वर्ष का कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ 17 हजार रुपये अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर सात माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
मामला थाना टूंडला क्षेत्र का है। वादी की 14 वर्षीय नाबालिग पुत्री कक्षा आठ में पढ़ती है जो 13 मई 2015 को स्कूल से घर आ रही थी। रास्ता में राहुल उसे नलकूप पर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया। पीड़िता के शरीर पर काटने आदि के निशान आए। पीड़िता ने घटना के बारे में घर आकर परिजन को बताया तब घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने दोषी को गिरफ्तार किया और तमाम कानूनी प्रक्रिया पूर्ण कराने के बाद विवेचना उपरांत आरोप पत्र न्यायालय प्रेषित किया।
मुकदमा की सुनवाई एवं निस्तारण अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट मुमताज अली की न्यायालय में की गई। न्यायाधीश मुमताज अली ने दोनों पक्ष के तर्कों को सुनने एवं पत्रावली पर उपलब्ध तमाम साक्ष्य एवं गवाहों के बयानों का गहनता से अध्ययन करने के बाद राहुल को दोषी पाते हुए खुले न्यायालय में सजा सुनाई।
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मामला थाना टूंडला क्षेत्र का है। वादी की 14 वर्षीय नाबालिग पुत्री कक्षा आठ में पढ़ती है जो 13 मई 2015 को स्कूल से घर आ रही थी। रास्ता में राहुल उसे नलकूप पर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया। पीड़िता के शरीर पर काटने आदि के निशान आए। पीड़िता ने घटना के बारे में घर आकर परिजन को बताया तब घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने दोषी को गिरफ्तार किया और तमाम कानूनी प्रक्रिया पूर्ण कराने के बाद विवेचना उपरांत आरोप पत्र न्यायालय प्रेषित किया।
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मुकदमा की सुनवाई एवं निस्तारण अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट मुमताज अली की न्यायालय में की गई। न्यायाधीश मुमताज अली ने दोनों पक्ष के तर्कों को सुनने एवं पत्रावली पर उपलब्ध तमाम साक्ष्य एवं गवाहों के बयानों का गहनता से अध्ययन करने के बाद राहुल को दोषी पाते हुए खुले न्यायालय में सजा सुनाई।
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