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जमीन उपलब्ध होने पर 1000 क्षमता की बनेगी गोशाला.
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फतेहपुर। युग पुरुष परमानंद गिरी महराज की घोषणा के बाद जिले के पहले कृषि महाविद्यालय के लिए जमीन की अड़चन भी दूर होती दिख रही है। पारा धनई ग्राम पंचायत के मठ मजरे में स्थित विवादित 40 बीघा जमीन को महाविद्यालय के लिए देने पर दोनों पक्षों ने सहमति भी जता दी है। अब दोनों तरफ से समझौता कोर्ट में दायर करना बाकी है। इसके बाद जमीन की अड़चन भी दूर हो जाएगी।
उधर, कृषि महाविद्यालय निर्माण से जुड़ी जानकारी होने के बाद डीएम अपूर्वा दुबे और एसपी राजेश कुमार सिंह परमानंद गिरी महाराज से मिलने मवई धाम पहुंचे। डीएम ने भी जिले के पहले कृषि महाविद्यालय के निर्माण पर खुशी जताई और आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन के स्तर से जो भी सहयोग होगा वह करेंगी।
दरअसल, मवई धाम में महाविद्यालय की स्थापना के लिए मानक के अनुसार 40 बीघे जमीन एक ही स्थान पर नहीं है। ऐसे में पारा धनई ग्राम पंचायत के मठ मजरे में स्थित 40 बीघा जमीन इसके लिए उपयुक्त मानी जा रही है। लेकिन यह जमीन ग्राम पंचायत के नाम पर दर्ज है। जबकि जमीन पर गिरि संप्रदाय के संत दावा कर रहे हैं। यह मामला करीब 15 साल से बिंदकी की मुंसिफ कोर्ट में विचाराधीन है।
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कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण एसडीएम ने इसकी देखरेख की जिम्मेदारी परमानंद गिरी महाराज को दे रखी है। गुरुवार को जब कृषि महाविद्यालय बनवाने की जानकारी हुई तो ग्राम प्रधान सोमू पांडेय ने इस पर खुशी जताई।
चूंकि मुंसिफ कोर्ट में चल रहे मुकदमे में एक पक्ष वह खुद हैं तो उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर इस जमीन पर महाविद्यालय बनता है तो वह जमीन देने को तैयार हैं। इसी तरह गिरी संप्रदाय के संत ने भी इसे नेक कदम बताया और कहा कि उन्हें भी महाविद्यालय के जमीन देने पर कोई एतराज नहीं है। ऐसे में अब महाविद्यालय के लिए जमीन का जो रोड़ा अटका था वह काफी हद तक दूर हो गया है।
इस पर परमानंद महराज ने कहा कि जितनी जल्दी विवाद समाप्त कर वैधानिक प्रक्रिया पूरी हो जाती है, उतनी ही जल्दी महाविद्यालय का निर्माण प्रारंभ हो जाएगा। एसडीएम बिंदकी विजय शंकर तिवारी ने कहा कि यदि दोनों पक्ष कोर्ट में समझौता दायर करते हैं तो वैधानिक प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और जमीन का मामला निपट जाएगा।
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उधर, कृषि महाविद्यालय निर्माण से जुड़ी जानकारी होने के बाद डीएम अपूर्वा दुबे और एसपी राजेश कुमार सिंह परमानंद गिरी महाराज से मिलने मवई धाम पहुंचे। डीएम ने भी जिले के पहले कृषि महाविद्यालय के निर्माण पर खुशी जताई और आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन के स्तर से जो भी सहयोग होगा वह करेंगी।
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दरअसल, मवई धाम में महाविद्यालय की स्थापना के लिए मानक के अनुसार 40 बीघे जमीन एक ही स्थान पर नहीं है। ऐसे में पारा धनई ग्राम पंचायत के मठ मजरे में स्थित 40 बीघा जमीन इसके लिए उपयुक्त मानी जा रही है। लेकिन यह जमीन ग्राम पंचायत के नाम पर दर्ज है। जबकि जमीन पर गिरि संप्रदाय के संत दावा कर रहे हैं। यह मामला करीब 15 साल से बिंदकी की मुंसिफ कोर्ट में विचाराधीन है।
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कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण एसडीएम ने इसकी देखरेख की जिम्मेदारी परमानंद गिरी महाराज को दे रखी है। गुरुवार को जब कृषि महाविद्यालय बनवाने की जानकारी हुई तो ग्राम प्रधान सोमू पांडेय ने इस पर खुशी जताई।
चूंकि मुंसिफ कोर्ट में चल रहे मुकदमे में एक पक्ष वह खुद हैं तो उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर इस जमीन पर महाविद्यालय बनता है तो वह जमीन देने को तैयार हैं। इसी तरह गिरी संप्रदाय के संत ने भी इसे नेक कदम बताया और कहा कि उन्हें भी महाविद्यालय के जमीन देने पर कोई एतराज नहीं है। ऐसे में अब महाविद्यालय के लिए जमीन का जो रोड़ा अटका था वह काफी हद तक दूर हो गया है।
इस पर परमानंद महराज ने कहा कि जितनी जल्दी विवाद समाप्त कर वैधानिक प्रक्रिया पूरी हो जाती है, उतनी ही जल्दी महाविद्यालय का निर्माण प्रारंभ हो जाएगा। एसडीएम बिंदकी विजय शंकर तिवारी ने कहा कि यदि दोनों पक्ष कोर्ट में समझौता दायर करते हैं तो वैधानिक प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और जमीन का मामला निपट जाएगा।