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Fatehpur News: गवाहों के पलटने से अशोक हत्याकांड में चाचा-भतीजा दोषमुक्त
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फतेहपुर। असोथर थाना क्षेत्र के जमलामऊ गांव निवासी अशोक द्विवेदी हत्याकांड में अदालत ने गवाहों के बयान से मुकरने के बाद चाचा-भतीजे को दोषमुक्त कर दिया। यह फैसला अपर जिला सत्र न्यायाधीश चेतना चौहान की अदालत ने सुनाया है।
अभियोजन के अनुसार 11 मई 2005 की रात असोथर थाना क्षेत्र के जमलामऊ गांव निवासी धनंजय मिश्रा मलवां थाना क्षेत्र के छनेहरा गांव निवासी चचेरे मामा अशोक द्विवेदी के साथ नलकूप पर सो रहे थे। धनंजय ने बताया था कि गांव निवासी जयचंद्र पुत्र धुन्नी, रज्जू और राजा के साथ तमंचा-बंदूक लेकर पिता श्रीनाथ की हत्या करने पहुंचे थे।
हमलावरों ने धोखे में चारपाई पर सो रहे अशोक द्विवेदी को गोली मार दी। उन्होंने भागकर जान बचाई थी। पुलिस ने चारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। विवेचना में पुलिस ने धनंजय मिश्रा, उसके पिता श्रीनाथ और चाचा गोरखनाथ के नाम प्रकाश में लाए।
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इससे मामला उलझ गया और विवेचना कौशाम्बी पुलिस को सौंप दी गई। तत्कालीन कौशाम्बी जिले के सैनी थाना प्रभारी सूबेदार ने 20 जून 2006 को धनंजय, श्रीनाथ और गोरखनाथ को थरियांव थाना क्षेत्र के मीरपुर गांव के पास से गिरफ्तार किया था।
पुलिस के अनुसार गोरखनाथ के पास से तमंचा और कारतूस बरामद हुआ था। पुलिस ने राकेश को भी गवाह बनाया था। राकेश ने बताया था कि घटना की रात वह श्यामलाल और गुलाम हुसैन के साथ बरात से लौट रहा था। उसने धनंजय, श्रीनाथ और गोरखनाथ को तमंचा-बंदूक लेकर खेत की ओर से लौटते देखा था। सुबह अशोक द्विवेदी की हत्या की जानकारी हुई थी।
हालांकि अदालत में गवाही के दौरान राकेश ने बताया कि दिवंगत के भाई सज्जन तथा नामजद जयचंद्र और उसके पुत्रों से रुपये लेकर पुलिस को बयान दिया था। दूसरे गवाह श्यामलाल की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। दिवंगत के भाई सज्जन ने भी अदालत में बताया कि मुकदमे में झूठी गवाही देने और आरोपियों को फंसाने के लिए एक लाख रुपये मिले थे।
कौशाम्बी पुलिस के बाद विवेचना करने वाले तत्कालीन असोथर थाने के दरोगा तहसीलदार ने भी अदालत में पुलिस विवेचना पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि थाना प्रभारी के कहने पर वादी पक्ष के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था और पुलिसकर्मियों को ही गवाह बनाया गया था।
थाना प्रभारी के निर्देश पर गलत विवेचना करने की बात भी कही। चारों गवाहों के बयान से मुकरने के बाद अदालत ने धनंजय मिश्रा और गोरखनाथ मिश्र को दोषमुक्त कर दिया। मुकदमे के विचाराधीन रहने के दौरान श्रीनाथ की मौत हो चुकी है।
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अभियोजन के अनुसार 11 मई 2005 की रात असोथर थाना क्षेत्र के जमलामऊ गांव निवासी धनंजय मिश्रा मलवां थाना क्षेत्र के छनेहरा गांव निवासी चचेरे मामा अशोक द्विवेदी के साथ नलकूप पर सो रहे थे। धनंजय ने बताया था कि गांव निवासी जयचंद्र पुत्र धुन्नी, रज्जू और राजा के साथ तमंचा-बंदूक लेकर पिता श्रीनाथ की हत्या करने पहुंचे थे।
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हमलावरों ने धोखे में चारपाई पर सो रहे अशोक द्विवेदी को गोली मार दी। उन्होंने भागकर जान बचाई थी। पुलिस ने चारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। विवेचना में पुलिस ने धनंजय मिश्रा, उसके पिता श्रीनाथ और चाचा गोरखनाथ के नाम प्रकाश में लाए।
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इससे मामला उलझ गया और विवेचना कौशाम्बी पुलिस को सौंप दी गई। तत्कालीन कौशाम्बी जिले के सैनी थाना प्रभारी सूबेदार ने 20 जून 2006 को धनंजय, श्रीनाथ और गोरखनाथ को थरियांव थाना क्षेत्र के मीरपुर गांव के पास से गिरफ्तार किया था।
पुलिस के अनुसार गोरखनाथ के पास से तमंचा और कारतूस बरामद हुआ था। पुलिस ने राकेश को भी गवाह बनाया था। राकेश ने बताया था कि घटना की रात वह श्यामलाल और गुलाम हुसैन के साथ बरात से लौट रहा था। उसने धनंजय, श्रीनाथ और गोरखनाथ को तमंचा-बंदूक लेकर खेत की ओर से लौटते देखा था। सुबह अशोक द्विवेदी की हत्या की जानकारी हुई थी।
हालांकि अदालत में गवाही के दौरान राकेश ने बताया कि दिवंगत के भाई सज्जन तथा नामजद जयचंद्र और उसके पुत्रों से रुपये लेकर पुलिस को बयान दिया था। दूसरे गवाह श्यामलाल की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। दिवंगत के भाई सज्जन ने भी अदालत में बताया कि मुकदमे में झूठी गवाही देने और आरोपियों को फंसाने के लिए एक लाख रुपये मिले थे।
कौशाम्बी पुलिस के बाद विवेचना करने वाले तत्कालीन असोथर थाने के दरोगा तहसीलदार ने भी अदालत में पुलिस विवेचना पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि थाना प्रभारी के कहने पर वादी पक्ष के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था और पुलिसकर्मियों को ही गवाह बनाया गया था।
थाना प्रभारी के निर्देश पर गलत विवेचना करने की बात भी कही। चारों गवाहों के बयान से मुकरने के बाद अदालत ने धनंजय मिश्रा और गोरखनाथ मिश्र को दोषमुक्त कर दिया। मुकदमे के विचाराधीन रहने के दौरान श्रीनाथ की मौत हो चुकी है।