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धनुष के टूटते ही गूंजा जय श्रीराम
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर
Updated Wed, 30 Mar 2016 12:24 AM IST
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धनुष भंग करते भगवान श्रीराम
- फोटो : अमर उजाला
मलवां विकास खंड के गांव जलाला व कोरइयां में रामलीला के अंतिम दिन जैसे ही श्रीराम के हाथों अजगव धनुष टूटा तो पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। धनुष टूटने पर पहुंचे परशुराम क्रोधित हो गए। इसके पहले सीता स्वयंवर में जनक के विलाप को सुनकर दर्शकों की आंखे डबडबा गईं।
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कोरंइयां में पहुंचे पूर्वमंत्री अमरजीत सिंंह जनसेवक ने रामलीला के आयोजनों से समाज को सही दिशा मिलने की बात कही। सोमवार रात गांव जलाला व कोरइयां में सीता स्वयंवर, जनक विलाप, परशुराम लक्ष्मण संवाद हुआ। इसे देखने भारी भीड़ जुटी।
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सीता स्वयंवर पर जब बड़े- बड़े बाहुबली राजा अजगव धनुष नहीं तोड़ पाए। तब जनक ने विलाप कर कहा कि - वीर विहीन मंहि मय जानी। यह सुन लक्ष्मण को क्रोध आ गया। उन्होंने कहा कि धरती वीरों से खाली नहीं है यदि उन्हें बड़े भाई राम की आज्ञा मिल जाए तो धनुष तोड़ देंगे।
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तभी गुरु विश्वामित्र ने श्रीराम को जनक के प्रण को पूरा करने की आज्ञा दी। श्रीराम के अजगव की चाप खींचते ही वह टूट गया। तब दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगा कर फूलों की वर्षा की। अजगव टूटने की जानकारी एक राजा ने परशुराम को दे दी।
जनकपुरी पहुंचे परशुराम धनुष को टूटा देख आवेशित हो गए और लक्ष्मण व परशुराम के बीच संवाद शुरू हो गया । जिसे सुनने के लिए सुबह 10 बजे तक दर्शक जमे रहे। लीला की व्यवस्था संभालने वालों में मुख्य रूप से कोरइयां में आनंद सिंह संतोष सोनकर, राधेश्याम गुप्ता गांव जलाला में प्रधान रमेश प्रसाद, फूल सिह यादव, मान सिंह, आलोक द्वारिका, अतर सिंह, योगेंद्र भी शामिल रहे।