फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Fatehpur News ›   Swamp of mistrust on land full of employment

फतेहपुर: रोजगार से भरी जमीन पर अविश्वास का दलदल, प्रदेश की राजधानी में रोजगार को लेकर हुई इन्वेस्टर्स समिट से एक बार फिर से हर जनपद में और फतेहपुर में भी रोजगार पैदा होने की संभावनाएं जागी हैं।

Tue, 14 Feb 2023 01:12 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर Updated Tue, 14 Feb 2023 01:12 AM IST
विज्ञापन
Swamp of mistrust on land full of employment
खागा। प्रदेश की राजधानी में रोजगार को लेकर हुई इन्वेस्टर्स समिट से एक बार फिर से हर जनपद में और फतेहपुर में भी रोजगार पैदा होने की संभावनाएं जागी हैं। इस फैसले को मील के पत्थर की तरह देखा जा रहा है, लेकिन उद्योगपतियों को व्यापार के लिए जमीन देने का अलावा, हर तरह की सुविधाएं मुहैया कराना, सुरक्षा और सहयोग का विश्वास दिलाना प्रशासन के सामने चुनौती से कम नहीं है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि करीब 15 साल पहले सुजरही में 41 उद्यमियों को जमीनें दी गई थी, जहां अभी भी धूल उड़ रही है।
विज्ञापन

लघु एवं मध्यम उद्योग की स्थापना के लिए 41 उद्यमियों को सुजरही में जमीन आवंटित की गई थी। गाटा संख्या 300 में 0.5760 हेक्टेयर व गाटा संख्या 302 घ में 0.6870 हेक्टेयर यानि कुल जमीन 1.2630 हेक्टेयर है। जो मिनी उद्योग के नाम पर दर्ज है।
विज्ञापन

प्रशासन ने व्यापारियों को जमीन मुहैया कराकर स्थानीय युवाओं को योग्यता के अनुसार रोजगार मुहैया कराया था। जिससे युवा गैर जनपद व प्रांत के लिए पलायन न करें। आवंटन के बाद सुविधाओं के अभाव में व्यापारियों ने उद्योग स्थापित करने में रूचि नहीं ली। मिनी उद्योग के नाम दर्ज जमीन में अवैध निर्माण व खेती भी की जा रही है। जहां कारखाने होने चाहिए थे, वहां झाड़ियां उगी हुई हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

सुजरही के मजरे गड़ोलेपुर निवासी रामसुफल ने बताया कि 15 वर्ष पहले उद्योग के लिए यहां पर जमीन पर खड़ंजा बनाया गया था, जो लोग उखाड़ ले गए और पानी बंद कर दिया गया है। गेट बनाया गया था जो गिर चुका है। उद्योग की स्थापना की सुनकर पंद्रह साल पहले एक उम्मीद जगी थी लेकिन अब तक वह टूट चुकी है।
..........
इनसेट-
चुनौती-1- सुविधा
उद्योग स्थापित करने के लिए सबसे पहले सुविधाओं की बात होती है। इसमें प्रशासन, पुलिस, संबंधित विभाग की ओर से मिलने वाली अनुमति और दस्तावेज पास होने या जिसे लाइसेंस कहते है, यह बड़ी चुनौती है। विभाग व तहसीलों में उद्यमियों को दस्तावेज तैयार कराना पड़ता है, जिसमें कोरम पूरा करना टेढ़ी खीर साबित होती है। उद्यमी चक्कर लगाकर थक जाते हैं। उद्योग स्थापना में प्रयोग होने वाली मशीनरी नजदीक के जिलों में उपलब्ध होना, कार्य के अनुरूप मजदूर, सुपरवाइजर, ऑपरेटरों का नहीं होना भी एक बड़ी चुनौती होती है।
............
इनसेट-
चुनौती-2- अविश्वास
उद्यमियों और प्रशासन के बीच हर वार्ता के बाद पर्दे के पीछे अविश्वास का डर उद्योगों पर सबसे अधिक प्रभाव डालता है। वादे होने के बाद जब उद्योग शुरू होता है तो हर कदम पर उद्यमियों को प्रशासन की सख्ती का सामना करना पड़ता है। फिर उद्योग में नुकसान शुरू होने लगता है। हर अधिकारी अपने हिसाब से क्षेत्र में अपना प्रभाव बनाता है, जिससे व्यापार को नुकसान होने लगता है। प्रशासन और उद्यमियों के बीच अविश्वास का यह दलदल भी एक बड़ी चुनौती है।
.........
इनसेट-
गन्ना और मेंथाल का बड़ा स्कोप
खागा। तहसील क्षेत्र में सबसे बड़े पैमाने पर गन्ना और इसके बाद मेंथाल की खेती होती है। क्षेत्र के किसान कई बार मिनी चीन मिल और पिपरमेंट प्लांट के लिए आवाज उठा चुके हैं और जनप्रतिनिधि भी सरकार से लगातार मिनी चीनी मिल के लिए मांग कर रहे हैं। चीनी मिल नहीं होने से गन्ने की खेती का दायरा भी कम होता जा रहा है।

वर्जन
सुजरही में मिनी उद्योग के लिए जमीन की मौजूदा स्थिति पता करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद आगे उच्चाधिकारियों के निर्देश पर पहल की जाएगी।- मनीष कुमार, एसडीएम
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed