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खंडहर हो गए रोडवेज के बस अड्डे
ब्यूरो/ अमर उजाला, फतेहपुर।
Updated Tue, 07 Jul 2015 12:48 AM IST
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प्रदेश सरकार रोडवेज के यात्रियों की सुखद यात्रा के लिए नित नई-नई योजनाओं की घोषणा कर रहा है। जिनमें बसों में जीपीएस सिस्टम, पैक बंद पानी, अखबार और स्मार्ट फोन से लग्जरी बस में सीट बुकिंग की सुविधा है। हालांकि ये सुविधाएं गिने चुने लोगों तक ही सीमित है।
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इसके अलावा निगम ने ग्रामीण इलाकों के यात्रियों के लिए लोहिया बस सेवा भी शुरू की है। वहीं इन बसों के स्टापेज के लिए आधुनिक बस अड्डे और वहां मिलने वाली सुविधाओं के लिए यात्रियों को तरसना पड़ रहा है। जिले के बस अड्डों का हाल यह है कि यात्रियों को बस का इंतजार करने के लिए खड़े होने तक की सुविधा नहीं है।
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बस अड्डों के भवन इतने जर्जर हो चुके हैं कब ढह जाएं, कुछ कहा नहीं जा सकता है। सुविधाओं के नाम पर सिर्फ खटारा बस ही मिलती है।
मालूम हो कि बसपा सरकार में बिंदकी बस अड्डे को उप डिपो का दर्जा दिया गया था लेकिन यह बस अड्डा भी बदहाली के दौर से गुजर रहा है। बस अड्डा का यार्ड, प्रतीक्षालय और दफ्तर खंडहर में तब्दील हो गया है। रोडवेज की बसें अंदर न जाकर बस अड्डे के बाहर ही यात्री को उतारकर चली जाती हैं।
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विभाग के आला अफसरों की उपेक्षा के चलते उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के बस अड्डे किसी खंडहर की तरह हो गए हैं। इन बस अड्डों में यात्रियों को साधारण पीने का पानी और सुलभ शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं।
आरओ का पानी तो दूर की कौड़ी साबित हो रही है। बसों का इंतजार करने एयरकूल प्रतीक्षालय तक नहीं है। जहां यात्री बसों का इंतजार कर सके। मुसाफिर नगर के चौराहे व सड़कों पर बैठकर परिवहन विभाग की बसों का लोग इंतजार करते हैं।
परिवहन विभाग के जिला मुख्यालय, बिंदकी, जहानाबाद और ललौली में बस अड्डे हैं, जिसमें विभाग ने ललौली बस अड्डे को पहले ही निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया है। जबकि ललौली से बांदा, कानपुर, चित्रकूट डिपो की करीब दो दर्जन बसें अप-डाउन करती हैं लेकिन बस अड्डा निष्प्रयोज्य होने से बसों को बीच सड़क पर खड़ी करके सवारियां उतारी चढ़ाई जाती हैं।
जिला मुख्यालय के बस अड्डे की बात करें तो दलदल रूपी यार्ड से तो छुटकारा मिल गया है लेकिन प्रतीक्षालय, पूछताछ केंद्र, एमएसटी कार्यालय और जनरेटर रूम नवनिर्मित यार्ड से तीन फिट नीचे हो गया है, जिसमें पानी का निकास न होने से बारिश में तालाब जैसा दृश्य दिखने लगता है।
इसी प्रकार बसपा सरकार में उपडिपो का दर्जा पाने वाला बिंदकी बस अड्डा बदहाली के दौर से गुजर रहा है। बस अड्डा का यार्ड, प्रतीक्षालय और दफ्तर खंडहर में तब्दील हो गया है।
रोडवेज की बसें अंदर न जाकर बस अड्डे के बाहर से ही सवारियां भर कर निकल जाती हैं। तहसील स्तर के बस अड्डे का संचालन एक कर्मचारी के हवाले है।
खंडहर में तब्दील बिंदकी बस अड्डे से कानपुर, मेरठ, मथुरा और आगरा के लिए बसें मिलती थी। इसी प्रकार जहानाबाद बस अड्डे का भवन जर्जर हो चुका है। इस बस अड्डे का संचालन तीन कर्मचारियों के माध्यम से किया जा रहा है, जिसमें लिपिक, अक्षम चालक और सीपर कर्मचारी की तैनाती है।
‘ज्वालागंज बस अड्डा के भवन निर्माण का कार्य एक हफ्ते में शुरू हो जाएगा। बस अड्डे के नलकूप में नई समर्सिबल की मोटर डाल दी गई है, जिससे पेयजल का संकट खत्म हो गया है। बिंदकी और जहानाबाद बस अड्डा की बिल्डिंग की मरम्मत के लिए विभाग से मांग की गई है।’
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