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बच्चे की मौत पर निजी अस्पताल में बवाल
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जेल चौराहे के पास स्थित जेके उमराव हास्पिटल के बाहर प्रदर्शन करते पीड़ित परिजन
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। दीपावली के दिन एक परिवार की खुशियों को ग्रहण लग गया। जन्म लेने के 24 घंटे के भीतर आईसीयू में रखे गए नवजात बच्चे ने शनिवार को दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत से गुस्साए परिजनों ने रविवार को नर्सिंगहोम में हंगामा काटा। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने पैसे लूटने के लिए बच्चे को आईसीयू में भर्ती रखा। खर्च उठाने में जेवर और खेत गिरवी रखने पड़ गए। जानकारी पर पुलिस मौके पर पहुंची और अंतिम संस्कार की रकम देकर मामले को रफा-दफा कराया।
खागा तहसील क्षेत्र के ऐलई गांव निवासी राजकुमार की पत्नी माया देवी ने 15 अक्तूबर को ब्रॉडवेल क्रिश्चियन हॉस्पिटल में बच्चे को जन्म दिया था। नवजात की हालत अच्छी न होने पर परिजनों ने शहर के एक नामी-गिरामी बच्चा अस्पताल में 16 अक्तूबर को भर्ती करा दिया। आरोप है कि बच्चे को भर्ती करने के बाद 18 अक्तूबर को ही आमने-सामने दिखाया गया। बाकी के दिनों में केवल शाम 5 बजे वीडियो रिकॉर्डिंग दिखाई जाती रही।
अस्पताल से सिर्फ बच्चे के स्वस्थ होने का भरोसा दिया जाता रहा। परिजन रोजाना 11 हजार का आईसीयू खर्च बर्दाश्त करता रहा। राजकुमार ने बताया कि इलाज के लिए जेवर और खेत तक गिरवी रख दिया। 13 नवंबर को अस्पताल के डॉक्टर ने खून की कमी बताकर व्यवस्था करने को कहा। खून भी दे दिया गया। घंटे भर बाद बच्चे की हालत सीरियस बता कर उसे ले जाने के लिए कहा गया। बच्चे की मौत पर शनिवार को परिजन खामोश रहे और बच्चे को साथ लेकर गए।
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रविवार को उनका गुस्सा निजी अस्पताल पर फूट पड़ा। परिजनों का आक्रोश देख नर्सिंग होम के लोग सहम गए। हंगामे की जानकारी पर कोतवाल पहुंचे। उन्होंने परिजनों और अस्पताल संचालक चिकित्सक से बात की। कोतवाल रवींद्र श्रीवास्तव ने बताया कि पीड़ित परिजन खर्च मांग रहे थे। अस्पताल ने एक लाख 29 हजार का पर्चा बनाया था। अस्पताल ने परिजनों को 35 हजार रुपये दिए। इस पर वे मान गए।
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खागा तहसील क्षेत्र के ऐलई गांव निवासी राजकुमार की पत्नी माया देवी ने 15 अक्तूबर को ब्रॉडवेल क्रिश्चियन हॉस्पिटल में बच्चे को जन्म दिया था। नवजात की हालत अच्छी न होने पर परिजनों ने शहर के एक नामी-गिरामी बच्चा अस्पताल में 16 अक्तूबर को भर्ती करा दिया। आरोप है कि बच्चे को भर्ती करने के बाद 18 अक्तूबर को ही आमने-सामने दिखाया गया। बाकी के दिनों में केवल शाम 5 बजे वीडियो रिकॉर्डिंग दिखाई जाती रही।
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अस्पताल से सिर्फ बच्चे के स्वस्थ होने का भरोसा दिया जाता रहा। परिजन रोजाना 11 हजार का आईसीयू खर्च बर्दाश्त करता रहा। राजकुमार ने बताया कि इलाज के लिए जेवर और खेत तक गिरवी रख दिया। 13 नवंबर को अस्पताल के डॉक्टर ने खून की कमी बताकर व्यवस्था करने को कहा। खून भी दे दिया गया। घंटे भर बाद बच्चे की हालत सीरियस बता कर उसे ले जाने के लिए कहा गया। बच्चे की मौत पर शनिवार को परिजन खामोश रहे और बच्चे को साथ लेकर गए।
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रविवार को उनका गुस्सा निजी अस्पताल पर फूट पड़ा। परिजनों का आक्रोश देख नर्सिंग होम के लोग सहम गए। हंगामे की जानकारी पर कोतवाल पहुंचे। उन्होंने परिजनों और अस्पताल संचालक चिकित्सक से बात की। कोतवाल रवींद्र श्रीवास्तव ने बताया कि पीड़ित परिजन खर्च मांग रहे थे। अस्पताल ने एक लाख 29 हजार का पर्चा बनाया था। अस्पताल ने परिजनों को 35 हजार रुपये दिए। इस पर वे मान गए।