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Fatehpur News: जलकुंभी निगल रही अखनई झील के गुलाबी फूल

Sat, 06 Jan 2024 11:40 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 06 Jan 2024 11:40 PM IST
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Pink flowers of Akhanai Lake swallowing hyacinth
संवाद न्यूज एजेंसी
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हुसैनगंज। ससुर खदेरी नदी का उद्गम स्थल अखनई झील के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। भिटौरा ब्लाक की ये झील सात किमी लंबी और डेढ़ किमी चौड़ी है। यह लालपुर, फर्शी, औढेरा, मोहद्दीनपुर, पिलखिनी और फरीदपुर गांव के मध्य फैली है। झील गंदगी से पूरी तरह से जलकुंभी से भर गई है। डीएम के निरीक्षण के बाद झील के पुनरोद्धार की उम्मीद जागी है, हालांकि इससे पहले भी कई बार झील के लिए जनप्रतिनिधि और अधिकारी आगे आए हैं, लेकिन झील को पुराने स्वरूप में लाया नहीं जा सका है।
अखनई झील में कई तालाब हैं। इनमें सदैव पानी भरा रहता है। झील कमल के गुलाबी फूलों से हरी भरी रहती थी। उस दौरान झील में साइबेरियन पक्षियों का कलरव भी सुना जाता था। लेकिन संरक्षण के अभाव में झील में जलकुंभी ने अपना कब्जा जमा लिया है। इससे कमल के फूलों का अस्तित्व समाप्त हो रहा है। प्रवासी परिंदे भी अब नहीं आते हैं। इस झील के लिए छह साल पहले ओम घाट के संत विज्ञानानंद तथा समाजसेवी राजेंद्र साहू समेत कई समाज सेवियों ने अभियान चलाया, लेकिन नतीजा शून्य रहा। इको पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अगस्त 2022 में तत्कालीन डीएम अपूर्वा दुबे के प्रयास से नमामि गंगे योजना के तहद अखनई झील को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया। डीएम ने राजस्व विभाग से झील की पैमाइश भी कराई, लेकिन वह भी ठंडे बस्ते में है।
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जिलाधिकारी सी. इंदुमती ने एक बार फिर अखनई झील को विकसित करने के लिए कदम उठाया है। बुधवार को डीएम सी इंदुमती ने अखनई झील के निरीक्षण के दौरान सिंचाई विभाग तथा राजस्व विभाग के अधिकारियों को झील के सुंदरीकरण का खाका तैयार करने को कहा। समाजसेवी राजेंद्र साहू ने बताया कि अखनई झील को ससुर खदेरी-एक अथवा विलुप्त सरस्वती नदी का उद्गम स्थल माना जाता है। प्रेमनन्दन ने बताया कि झील से आधा दर्जन गांवों के लोग मछली का शिकार करके जीविकोपार्जन करते रहे हैं।
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