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पाकिस्तान में बंद साजन की पाती से मिला उम्मीदों को हौसला
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर
Updated Mon, 18 Jul 2016 12:06 AM IST
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चिट्ठी को हाथ में लेकर खड़ी शोभा।
- फोटो : अमर उजाला
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सुजानपुर गांव की शोभा पति की पाती बंचवा-बंचवा कर बेहाल है। हो भी क्यों न, उसकी कोशिश, दौड़भाग और आंसू का हाल पाकिस्तान की जेल में बंद उसके पति तक नहीं पहुंच पाया। अलबत्ता पति का खत उसके पास आ पहुंचा है, जिसमें अपनी टीस का जिक्र करते हुए पति ने पूछ ही लिया है कि क्या तुम लोगों को हमारी याद नहीं आती? खत में जो हवाला दिया गया है, उसे सुनकर तो शोभा और भी व्यथित हो जा रही।
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पति ने चिंता जताते हुए संदेश भेजा है कि साथ में बंदी बनाए गए बांदा के लोगों के खत तो अक्सर आते हैं। उनके खत देखकर हम मचल जाते हैं। इधर, शोभा यह जिक्र करते हुए रो पड़ती है और कहती है कि याद तो आती है लेकिन अकेले हम करें का। किससे लिखवाएं और पाती कहां भेजें।
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बता दें कि 30 मार्च को गुजराज में समुद्र में मछली का शिकार करते समय पाकिस्तानी सेना के हत्थे चढ़े बहुआ ब्लाक के सुजानपुर गांव निवासी धनीराम ने पाकिस्तान की जेल से पत्नी को चिट्ठी लिखी है। करीब बीस दिन पहले आई यह चिट्ठी शोभा के जीने का जरिया बन गई है।
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शोभा सास और ससुर के साथ रहने के बजाय गांव में मासूम बेटे प्रियांशू और बेटी कामिनी के साथ अलग रहती है। शोभा कहती है कि घर के लोग इतने पढ़े लिखे नहीं हैं कि वह पाती भेज सके। उन्होंने चिट्ठी लिखकर हमें जीने की राह दिखा दी है। भरोसा है कि एक दिन उसके पति जरूर वतन लौट कर आएंगे। धनीराम के साथ पाकिस्तान में बंद जितेंद्र के घरवालों का भी यही हाल है। मां देवकली बेटे के परदेश में बंद होने से उदास है।
वह चौबीसों घंटे बेटे के गम में डूबी रहती है। बेटे के पाकिस्तान में बंद होने के दुख के साथ इस परिवार को जितेंद्र की शादी टूटने का भी गम है। इसी प्रकार प्रमोद के घर वाले भी बेटे के न लौटने से आहत हैं। उनकी निगाहें दरवाजे पर टिकीं रहती हैं। डाकिए की आवाज सुनते ही यह परिवार बाहर निकल आता है। पिता राम आसरे हर किसी से बेटे का गम बया करते-करते उदास हो जाते हैं। इसके अलावा यह परिवार बहू ननकी के पांच साल की पोती सरोज के साथ मायके रायबरेली चले जाने से और भी आहत है।