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फसलों की कटाई में मजदूरों को सता रहा पुलिस का भय
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फतेहपुर। पहले मौसम की मार अब लॉकडाउन किसानों के लिए मुसीबत बना हुआ है। कृषि क्षेत्र में छूट के बाद भी कटाई के लिए मजदूर मिल रहे न कृषि यत्र। दरअसल बड़ी संख्या में हार्वेस्टर (गेहूं काटने की मशीन) से कटाई होती है। लॉकडाउन मशीनों की मरम्मत न होने से कटाई का काम सुस्त पड़ा है।
कोरोना संक्रमण के भय से मजदूर खेतों में फसलों की कटाई करने नहीं जा रहे हैं। कुछ किसानों ने खुद ही कटाई शुरू कर दी है। तेज धूप और तपिश की वजह से गेहूं की फसल पहले ही पूरी तरह से सूख गई है। किसानों का कहना है कि इन फसलों को काटकर 8-10 दिन में सुरक्षित न किया गया तो हवा के साथ बालियों से दाना झड़ना शुरू हो जाएगा। जो मजदूर लॉकडाउन में दिल्ली, पंजाब से घर आए हैं, उन्हें फसल काटने के लिए हंसिया, दराती
नहीं मिल रही है। इससे कटाई नहीं कर पा रहे हैं। उधर, जिन किसानों ने फसलों को काट लिया है, उन्हें थ्रेशर नहीं मिल पा रहे हैं। थरियांव के भारतपुर गांव निवासी किसान विनोद कुमार ने बताया कि गेहूं की फसल काटने के लिए मजदूर तो हैं, लेकिन उनके पास हंसिया, दराती नहीं है। इससे वह काम नहीं कर पा रहे हैं। लॉकडाउन के चलते
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मरम्मत की दुकानें नहीं खुलती है। तेलियानी ब्लाक के मवइया गांव निवासी रामआसरे का कहना है कि मशीन से गेहूं की कटाई होती है। इस बार लॉकडाउन की वजह से बाहर से आने वाले हार्वेस्टर नहीं आए हैं। जिले में जो हार्वेेस्टर हैं, वह 10 से 15 दिन बाद गेहूं काटने की बात कर रहे हैं। हथगाम ब्लाक में अजईपुर गांव के किसान लालबहादुर का कहना है कि पुलिस के डर से मजदूर फसल काटने नहीं आ रहे हैं। समय से गेहूं की कटाई न हुई तो नुकसान हो जाएगा।
जिला कृषि अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि खेती का काम करने के लिए किसान व मजदूरों को छूट दी गई है। लॉकडाउन को ध्यान में रखकर काम करना होगा। फसलों की कटाई में एक मजदूर से दूसरे मजदूर की दूरी डेढ़ से दो मीटर होनी चाहिए। थ्रेशर व हार्वेस्टर में एक चालक व चार मजदूर काम कर सकते हैं। इसमें पुलिस किसी को परेशान नहीं करेगी।
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कोरोना संक्रमण के भय से मजदूर खेतों में फसलों की कटाई करने नहीं जा रहे हैं। कुछ किसानों ने खुद ही कटाई शुरू कर दी है। तेज धूप और तपिश की वजह से गेहूं की फसल पहले ही पूरी तरह से सूख गई है। किसानों का कहना है कि इन फसलों को काटकर 8-10 दिन में सुरक्षित न किया गया तो हवा के साथ बालियों से दाना झड़ना शुरू हो जाएगा। जो मजदूर लॉकडाउन में दिल्ली, पंजाब से घर आए हैं, उन्हें फसल काटने के लिए हंसिया, दराती
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नहीं मिल रही है। इससे कटाई नहीं कर पा रहे हैं। उधर, जिन किसानों ने फसलों को काट लिया है, उन्हें थ्रेशर नहीं मिल पा रहे हैं। थरियांव के भारतपुर गांव निवासी किसान विनोद कुमार ने बताया कि गेहूं की फसल काटने के लिए मजदूर तो हैं, लेकिन उनके पास हंसिया, दराती नहीं है। इससे वह काम नहीं कर पा रहे हैं। लॉकडाउन के चलते
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मरम्मत की दुकानें नहीं खुलती है। तेलियानी ब्लाक के मवइया गांव निवासी रामआसरे का कहना है कि मशीन से गेहूं की कटाई होती है। इस बार लॉकडाउन की वजह से बाहर से आने वाले हार्वेस्टर नहीं आए हैं। जिले में जो हार्वेेस्टर हैं, वह 10 से 15 दिन बाद गेहूं काटने की बात कर रहे हैं। हथगाम ब्लाक में अजईपुर गांव के किसान लालबहादुर का कहना है कि पुलिस के डर से मजदूर फसल काटने नहीं आ रहे हैं। समय से गेहूं की कटाई न हुई तो नुकसान हो जाएगा।
जिला कृषि अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि खेती का काम करने के लिए किसान व मजदूरों को छूट दी गई है। लॉकडाउन को ध्यान में रखकर काम करना होगा। फसलों की कटाई में एक मजदूर से दूसरे मजदूर की दूरी डेढ़ से दो मीटर होनी चाहिए। थ्रेशर व हार्वेस्टर में एक चालक व चार मजदूर काम कर सकते हैं। इसमें पुलिस किसी को परेशान नहीं करेगी।