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जीएसटी में बदलावों को लेकर लामबंद हुए कर अधिवक्ता
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फतेहपुर। जीएसटी को लेकर आ रही अड़चनें अब व्यापारियों के साथ-साथ कर अधिवक्ताओं को भी छकाने लगी हैं। ऐन वक्त पर जब काम होता है, उसी वक्त सर्वर धड़ाम हो जाने से व्यापारियों के साथ अब अधिवक्ता भी आजिज आ चुके हैं। जीएसटी पोर्टल और जीएसटी नियमों से परेशान अधिवक्ताओं ने डीएम के माध्यम से पीएम, वित्त मंत्री और जीएसटी काउंसिल के चेयरमैन को ज्ञापन भेजा। जिसमें अधिवक्ताओं को जीएसटी में जरुरी बदलावों के मद्देनजर अपनी समस्याएं रखी हैं।
टैक्स बार एसोसिएशन अध्यक्ष गणेश प्रसाद गुप्त और सचिव सुनीता गुप्ता की अगुवाई में कर अधिवक्थता लामबंद हुए। अधिवक्ताओं ने जीएसटी के तकनीकी पेंचो और ध्वस्त सवऱर व्यवस्था पर विरोध व्यक्त किया। कर अधिवक्ताओं ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि जीएसटी के सुस्त पोर्टल के कारण व्यापारियों का विभागीय काम
नहीं हो पा रहा है। आर्थिक क्षति के साथ अधिवक्ता भी त्रस्त हो जाता है। सर्वर पोर्टल की क्षमता बढ़ाई जानी चाहिए। जीएसटी की पोर्टल क्षमता व्यापारियों की संख्या को देखते हुए कम है। जिससे अंतिम तिथि के तीन से चार दिना पहले ही सर्वर धीमा हो जाता है। रिर्टन दाखिल नहीं हो पाता है। विलंब होने पर लेट फीस भी व्यापारियों से ही वसूल की जाती है। जो अव्यवहारिक है।
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अधिवक्ताओं ने जीएसटी आर 3 बी, आर-1, आर-10 आदि में आरोपित देय लेट फीस को समाप्त करने और जो लेट फीस जमा कराई है, उसे वापस करने की मांग की। अधिवक्ताओं ने बताया कि व्यापारी की ओर से प्रस्तुत विभिन्न प्रारूप जीएसटी आर-1, आर-9, आर-9सी में गलती होने पर गलती को सुधारने की व्यवस्था होनी
चाहिए। अधिवक्ताओं ने ऐलान किया कि यदि एक माह में जीएसटी से संबंधित समस्याएं हल नहीं होती हैं तो व्यापार मंडल के सहयोग से अधिवक्ता संघ कार्यालयों में तालाबंदी कर कार्य बहिष्कार करेगा। इस मौके पर श्रवण कुमार गौड़, अराधना पांडेय, रनवीर सिंह, मो. इकबाल मोइन, अजलाल अहमद, दिवाकर गुप्ता, फसाहत अली और अरसद नईम सिद्दकी सहित अन्य कर अधिवक्ता मौजूद रहे।
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टैक्स बार एसोसिएशन अध्यक्ष गणेश प्रसाद गुप्त और सचिव सुनीता गुप्ता की अगुवाई में कर अधिवक्थता लामबंद हुए। अधिवक्ताओं ने जीएसटी के तकनीकी पेंचो और ध्वस्त सवऱर व्यवस्था पर विरोध व्यक्त किया। कर अधिवक्ताओं ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि जीएसटी के सुस्त पोर्टल के कारण व्यापारियों का विभागीय काम
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नहीं हो पा रहा है। आर्थिक क्षति के साथ अधिवक्ता भी त्रस्त हो जाता है। सर्वर पोर्टल की क्षमता बढ़ाई जानी चाहिए। जीएसटी की पोर्टल क्षमता व्यापारियों की संख्या को देखते हुए कम है। जिससे अंतिम तिथि के तीन से चार दिना पहले ही सर्वर धीमा हो जाता है। रिर्टन दाखिल नहीं हो पाता है। विलंब होने पर लेट फीस भी व्यापारियों से ही वसूल की जाती है। जो अव्यवहारिक है।
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अधिवक्ताओं ने जीएसटी आर 3 बी, आर-1, आर-10 आदि में आरोपित देय लेट फीस को समाप्त करने और जो लेट फीस जमा कराई है, उसे वापस करने की मांग की। अधिवक्ताओं ने बताया कि व्यापारी की ओर से प्रस्तुत विभिन्न प्रारूप जीएसटी आर-1, आर-9, आर-9सी में गलती होने पर गलती को सुधारने की व्यवस्था होनी
चाहिए। अधिवक्ताओं ने ऐलान किया कि यदि एक माह में जीएसटी से संबंधित समस्याएं हल नहीं होती हैं तो व्यापार मंडल के सहयोग से अधिवक्ता संघ कार्यालयों में तालाबंदी कर कार्य बहिष्कार करेगा। इस मौके पर श्रवण कुमार गौड़, अराधना पांडेय, रनवीर सिंह, मो. इकबाल मोइन, अजलाल अहमद, दिवाकर गुप्ता, फसाहत अली और अरसद नईम सिद्दकी सहित अन्य कर अधिवक्ता मौजूद रहे।