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किशनपुर एमआरएफ सेंटर निर्माण में विरोध के स्वर
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किशनपुर(खागा)। नगर पंचायत खागा में बन चुके एमआरएफ सेंटर की तरह किशनपुर में भी सेंटर प्रस्तावित हुआ है। अभी नींव भी नहीं रखी गई कि विरोध के स्वर फूटने लगे हैं। जिस जमीन पर नगर पंचायत यह सेंटर स्थापित करना चाहती है, वहां तक जाने का रास्ता किसानों के खेतों से निकलता है। वहीं किसानों ने अपनी जमीन देने से मना कर दिया है। शुक्रवार को नगर पंचायत ने जेसीबी खेतों से निकाली तो किसान ने शिकायत शुरू कर दी।
नगर पंचायत किशनपुर के रहने वाले आसाराम सोनकर ने अपनी दो बीघे जमीन दान में दी थी। यह जमीन नगर पंचायत किशनपुर में सरौली बार्डर पर है। इसी जमीन पर किशनपुर नगर पंचायत मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर बनाना चाह रही है। इसके लिए करीब 33 लाख 67 हजार रुपए भी मिल चुके है। आसाराम ने जब जमीन दान दी
थी तो नगर पंचायत ने इस जमीन को कब्जे में लेने का प्रयास किया लेकिन आस-पास के किसानों ने इसका विरोध किया। विरोध इस बात का था कि जमीन पर पहुंचने के लिए जो रास्ता है वह उनके खेतों से होकर गुजर रहा था। वहीं दूसरा कोई रास्ता नहीं है जो सरकारी जमीन से होकर गुजरे। ऐसे में रास्ते के लिए हदबंदी दायर की गई थी
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जो अभी निस्तारित नहीं हुई है। खागा में एफआरएफ सेंटर बनने के कारण किशनपुर नगर पंचायत की ओर से शुक्रवार को एक जेसीबी भेजकर इस जमीन की सफाई व रास्ता बनाने का काम हुआ तो कस्बे के रहने वाले बली सिंह, बाउव, द्वारिका, गणेश, हनुमान सिंह आदि ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि उनकी जमीन से जेसीबी
होकर निकल रही। इसके बाद अब उनकी जमीनों से कूड़ा गाड़ी निकलेगी। ऐसे में उनकी जमीन किसी काम की नहीं बचेगी। किशनपुर के ईओ अजय पांडेय ने बताया कि शुक्रवार को जेसीबी नगर पंचायत की जमीन पर ही कार्य कर रही थी। किसी किसान की प्रापर्टी को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। किशनपुर में कचरा निस्तारण के लिए एमआरएफ सेंटर बनना है और इस जमीन को इसके लिए चिन्हित किया गया है।
ईओ अजय पांडेय के मुताबिक किशनपुर नगर पंचायत से मौजूदा समय करीब 35 टन मिश्रित कचरा निकल रहा है। जिसे ट्रैक्टर के जरिए कस्बे से बाहर ले जाकर डंपिंग ग्राउंड पर फेंका जाता है। अगर एमआरएफ सेंटर बनता है तो कचरे से जैविक खाद बनेगी और यह किसानों के काम आएगी।
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नगर पंचायत किशनपुर के रहने वाले आसाराम सोनकर ने अपनी दो बीघे जमीन दान में दी थी। यह जमीन नगर पंचायत किशनपुर में सरौली बार्डर पर है। इसी जमीन पर किशनपुर नगर पंचायत मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर बनाना चाह रही है। इसके लिए करीब 33 लाख 67 हजार रुपए भी मिल चुके है। आसाराम ने जब जमीन दान दी
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थी तो नगर पंचायत ने इस जमीन को कब्जे में लेने का प्रयास किया लेकिन आस-पास के किसानों ने इसका विरोध किया। विरोध इस बात का था कि जमीन पर पहुंचने के लिए जो रास्ता है वह उनके खेतों से होकर गुजर रहा था। वहीं दूसरा कोई रास्ता नहीं है जो सरकारी जमीन से होकर गुजरे। ऐसे में रास्ते के लिए हदबंदी दायर की गई थी
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जो अभी निस्तारित नहीं हुई है। खागा में एफआरएफ सेंटर बनने के कारण किशनपुर नगर पंचायत की ओर से शुक्रवार को एक जेसीबी भेजकर इस जमीन की सफाई व रास्ता बनाने का काम हुआ तो कस्बे के रहने वाले बली सिंह, बाउव, द्वारिका, गणेश, हनुमान सिंह आदि ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि उनकी जमीन से जेसीबी
होकर निकल रही। इसके बाद अब उनकी जमीनों से कूड़ा गाड़ी निकलेगी। ऐसे में उनकी जमीन किसी काम की नहीं बचेगी। किशनपुर के ईओ अजय पांडेय ने बताया कि शुक्रवार को जेसीबी नगर पंचायत की जमीन पर ही कार्य कर रही थी। किसी किसान की प्रापर्टी को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। किशनपुर में कचरा निस्तारण के लिए एमआरएफ सेंटर बनना है और इस जमीन को इसके लिए चिन्हित किया गया है।
ईओ अजय पांडेय के मुताबिक किशनपुर नगर पंचायत से मौजूदा समय करीब 35 टन मिश्रित कचरा निकल रहा है। जिसे ट्रैक्टर के जरिए कस्बे से बाहर ले जाकर डंपिंग ग्राउंड पर फेंका जाता है। अगर एमआरएफ सेंटर बनता है तो कचरे से जैविक खाद बनेगी और यह किसानों के काम आएगी।