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तालाब में हुआ सात हजार घनमीटर से ज्यादा खनन
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- फोटो : FATEHPUR
जहानाबाद। ऐतिहासिक लाल बिहारा तालाब की खुदाई कर उसे क्षतिग्रस्त करने की शिकायत पर शुक्रवार को राजस्व विभाग की टीम देवमई ब्लाक के जाफरपुर सिठर्रा गांव पहुंची। टीम ने तालाब की पैमाइश की। करीब 7280 घनमीटर के दायरे में खनन होने की बात सामने आई। हालांकि सीढ़ियां और बाउंड्री सही सलामत मिली, लेकिन पाया गया कि जिस अंदाज में खनन किया गया है उससे कभी भी यह तालाब में मिल सकती हैं।
करीब पंद्रह दिन पहले इस ऐतिहासिक तालाब में खुुदाई का काम हुआ था। जिसकी शिकायत प्रशासन से हुई थी। बिंदकी एसडीएम प्रह्लाद सिंह ने नायब तहसीलदार संतोष कुशवाहा की अगुवाई में शुक्रवार को राजस्व टीम भेजी। लाल बिहारा ऐतिहासिक तालाब जिसका दायरा गाटा संख्या 563 व रकबा 0.7120 हेक्टेयर का है। इस पर टीम ने काम शुरू किया तो खनन का सच पता चला। दरअसल, पिछले साल जुलाई-अगस्त महीने में मनरेगा से इस
तालाब पर एक लाख 75 हजार रुपये की लागत से काम हुआ था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि हाल ही में गुपचुप तरीके से तालाब में खनन करा कर सरकार को चपत लगाई गई है। इसकी तहकीकात के लिए टीम ने तालाब की पैमाइश की। उत्तरी व दक्षिणी भुजा 65 मीटर तथा पूर्व पश्चिम 56 मीटर के दायरे वाले इस तालाब की
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पड़ताल में लगभग दो मीटर गहराई से मिट्टी निकाले जाने का मामला सामने आया। राजस्व टीम की इस पड़ताल से ऐतिहासिक तालाब से करीब 7280 घन मीटर मिट्टी का खनन पकड़ा गया। हालांकि तालाब की सीढ़ियों एवं बाउंड्री में किसी भी प्रकार से क्षति नहीं मिली।
इस मामले में पूर्व प्रधान सुरेश चंद्र उत्तम का कहना है कि गांव में न कोई प्लाटिंग हुई है और न ही उनके पास कोई प्लाट है। उन पर अवैैध खनन के आरोप बेबुनियाद हैं जो राजनीति से प्रेरित होकर लगाए गए हैं। उधर, मौजूदा प्रधान राजकली गिहार का कहना है कि उन्होंने पांच-छह दिन पहले तालाब की सफाई जरूर कराई थी। मिट्टी कौन निकाल ले गया, यह उनकी जानकारी में नहीं है।
बिंदकी के नायब तहसीलदार का कहना है कि करीब छह फीट के दायरे पर खनन किया गया है। हालांकि यह वैध है अथवा अवैध, इस पर अभी तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता है। जब तक ब्लाक वालों की रिपोर्ट नहीं आ जाती। तफ्तीश के दौरान कोई भी ग्रामीण बात करने को तैयार नहीं था। सौंदर्यीकरण पर तालाब की मिट्टी निकालने की बात सामने आ रही है।
दूसरी तरफ देवमई बीडीओ पारुल कटियार का कहना है कि चार महीने पहले मनरेगा से काम कराया गया था। इधर कोई काम नहीं कराया गया है। आसपास के लोग भी मिट्टी खोद कर ले जा सकते हैं। राजस्व टीम ही खनन के बारे में बता सकती है।
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करीब पंद्रह दिन पहले इस ऐतिहासिक तालाब में खुुदाई का काम हुआ था। जिसकी शिकायत प्रशासन से हुई थी। बिंदकी एसडीएम प्रह्लाद सिंह ने नायब तहसीलदार संतोष कुशवाहा की अगुवाई में शुक्रवार को राजस्व टीम भेजी। लाल बिहारा ऐतिहासिक तालाब जिसका दायरा गाटा संख्या 563 व रकबा 0.7120 हेक्टेयर का है। इस पर टीम ने काम शुरू किया तो खनन का सच पता चला। दरअसल, पिछले साल जुलाई-अगस्त महीने में मनरेगा से इस
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तालाब पर एक लाख 75 हजार रुपये की लागत से काम हुआ था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि हाल ही में गुपचुप तरीके से तालाब में खनन करा कर सरकार को चपत लगाई गई है। इसकी तहकीकात के लिए टीम ने तालाब की पैमाइश की। उत्तरी व दक्षिणी भुजा 65 मीटर तथा पूर्व पश्चिम 56 मीटर के दायरे वाले इस तालाब की
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पड़ताल में लगभग दो मीटर गहराई से मिट्टी निकाले जाने का मामला सामने आया। राजस्व टीम की इस पड़ताल से ऐतिहासिक तालाब से करीब 7280 घन मीटर मिट्टी का खनन पकड़ा गया। हालांकि तालाब की सीढ़ियों एवं बाउंड्री में किसी भी प्रकार से क्षति नहीं मिली।
इस मामले में पूर्व प्रधान सुरेश चंद्र उत्तम का कहना है कि गांव में न कोई प्लाटिंग हुई है और न ही उनके पास कोई प्लाट है। उन पर अवैैध खनन के आरोप बेबुनियाद हैं जो राजनीति से प्रेरित होकर लगाए गए हैं। उधर, मौजूदा प्रधान राजकली गिहार का कहना है कि उन्होंने पांच-छह दिन पहले तालाब की सफाई जरूर कराई थी। मिट्टी कौन निकाल ले गया, यह उनकी जानकारी में नहीं है।
बिंदकी के नायब तहसीलदार का कहना है कि करीब छह फीट के दायरे पर खनन किया गया है। हालांकि यह वैध है अथवा अवैध, इस पर अभी तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता है। जब तक ब्लाक वालों की रिपोर्ट नहीं आ जाती। तफ्तीश के दौरान कोई भी ग्रामीण बात करने को तैयार नहीं था। सौंदर्यीकरण पर तालाब की मिट्टी निकालने की बात सामने आ रही है।
दूसरी तरफ देवमई बीडीओ पारुल कटियार का कहना है कि चार महीने पहले मनरेगा से काम कराया गया था। इधर कोई काम नहीं कराया गया है। आसपास के लोग भी मिट्टी खोद कर ले जा सकते हैं। राजस्व टीम ही खनन के बारे में बता सकती है।