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क्या खूब आता, वेस्ट को बेस्ट बनाना
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- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। अक्सर हम और आप ज्यादातर सामान प्रयोग करने के बाद उसे फेंक देते हैं, वह खराब मान लिया जाता है। ऐसे में अगर कोई इसे नया लुक देकर उसे फिर से मोलवान बना दे तो क्या बात है। यह हुनर है रेलबाजार में रहने वाली गुरप्रीत कौर में। इस हुनर को वह लोगों में बांट भी रही हैं।
बेकार समझ कर फेंकी गई वस्तु को यह कभी हैप्पी बर्थ डे का आइटम बना देती हैं तो कभी स्माइली बिखेरता सजावट का सामान। यही नहीं सामने पड़ने वाली शक्ल को हूबहू उतारना हो या फिर ब्लैक बोर्ड पर फर्राटे से चॉक चलाकर गणेश अथवा शंकर का स्वरूप बनाना, यह सारे काम चुटकी बजाते कर देने का भी हुनर है। समाजसेवा
में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाली पोस्ट ग्रेजुएट गुरप्रीत कौर को डेकोरेट, क्राफ्ट और पेंटिंग में नए प्रतिमान स्थापित करने की चाहत है। गुरप्रीत ने काउंसलर के रूप में भी अपना हुनर साझा किया है। इस साझेदारी में प्लास्टिक के
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डिब्बे और डिस्पोजल गिलास से रावण के दस सिर तैयार कर गुरप्रीत ने कान्वेंट स्कूल के बच्चों को एक अभिमान में चूर राजा से वाकिफ कराने की कोशिश की। वेस्ट मैटेरियल को बेस्ट बनाने का काम यह ज्यादातर करती हैं। बात चाहे एक से बढ़कर एक फोटो फ्रेम बनाने की हो या फिर तरह तरह के स्माइली। गिफ्ट के लिए आकार का
बस आपको क्लू देना होता है बाकी का काम गुरप्रीत को करना खूब आता है। क्रिएशन नामक फेसबुक पर खुलने वाले पन्ने पर अपने हुनर के साथ नजर आने वाली इस लड़की के काम को सराहा जा रहा है। बकौल गुरप्रीत, हर
वस्तु की अपनी उपयोगिता होती है। ऐसे में उसके बारे में थोड़ा सा वक्त निकाल कर उसका और भी उपयोग किया जा सकता है। मेरा मानना है कि इंसान के जेहन में नकारात्मक भाव नहीं होने चाहिए। ऊपर वाले ने इंसान को संपूर्ण बनाकर भेजा है। ऐसा क्या है, जिसे वह नहीं कर सकता है।
समाजसेवा के प्लेटफार्म पर अक्सर देखी जाने वाली गुरप्रीत केवल हुनरमंद ही नहीं है बल्कि वह दरियादिल भी है। तभी तो किसी की जान सांसत में वह कैसे देख सकती है। गुरप्रीत ने वर्ष 2012 में अमर उजाला फाउंडेशन के कानपुर रक्तदान शिविर से महादानी बनने की शुरुआत की थी। इसके बाद स्थानीय स्तर पर लगे फाउंडेशन के
ब्लड कैंप और अन्य मंच पर भी रक्तदान किया। बकौल गुरप्रीत, वह किसी की तकलीफ नहीं देख सकती हैं। छह मर्तबा रक्तदान करने वाली गुरप्रीत कौर का बड़ा और इकलौता भाई गुरमीत सिंह उमंग ने 22 मर्तबा रक्तदान किया है। बाकायदा इस कार्य के लिए एक ग्रुप भी बना रखा है जो अक्सर जरूरतमंदों के बीच नजर आता है।
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बेकार समझ कर फेंकी गई वस्तु को यह कभी हैप्पी बर्थ डे का आइटम बना देती हैं तो कभी स्माइली बिखेरता सजावट का सामान। यही नहीं सामने पड़ने वाली शक्ल को हूबहू उतारना हो या फिर ब्लैक बोर्ड पर फर्राटे से चॉक चलाकर गणेश अथवा शंकर का स्वरूप बनाना, यह सारे काम चुटकी बजाते कर देने का भी हुनर है। समाजसेवा
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में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाली पोस्ट ग्रेजुएट गुरप्रीत कौर को डेकोरेट, क्राफ्ट और पेंटिंग में नए प्रतिमान स्थापित करने की चाहत है। गुरप्रीत ने काउंसलर के रूप में भी अपना हुनर साझा किया है। इस साझेदारी में प्लास्टिक के
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डिब्बे और डिस्पोजल गिलास से रावण के दस सिर तैयार कर गुरप्रीत ने कान्वेंट स्कूल के बच्चों को एक अभिमान में चूर राजा से वाकिफ कराने की कोशिश की। वेस्ट मैटेरियल को बेस्ट बनाने का काम यह ज्यादातर करती हैं। बात चाहे एक से बढ़कर एक फोटो फ्रेम बनाने की हो या फिर तरह तरह के स्माइली। गिफ्ट के लिए आकार का
बस आपको क्लू देना होता है बाकी का काम गुरप्रीत को करना खूब आता है। क्रिएशन नामक फेसबुक पर खुलने वाले पन्ने पर अपने हुनर के साथ नजर आने वाली इस लड़की के काम को सराहा जा रहा है। बकौल गुरप्रीत, हर
वस्तु की अपनी उपयोगिता होती है। ऐसे में उसके बारे में थोड़ा सा वक्त निकाल कर उसका और भी उपयोग किया जा सकता है। मेरा मानना है कि इंसान के जेहन में नकारात्मक भाव नहीं होने चाहिए। ऊपर वाले ने इंसान को संपूर्ण बनाकर भेजा है। ऐसा क्या है, जिसे वह नहीं कर सकता है।
समाजसेवा के प्लेटफार्म पर अक्सर देखी जाने वाली गुरप्रीत केवल हुनरमंद ही नहीं है बल्कि वह दरियादिल भी है। तभी तो किसी की जान सांसत में वह कैसे देख सकती है। गुरप्रीत ने वर्ष 2012 में अमर उजाला फाउंडेशन के कानपुर रक्तदान शिविर से महादानी बनने की शुरुआत की थी। इसके बाद स्थानीय स्तर पर लगे फाउंडेशन के
ब्लड कैंप और अन्य मंच पर भी रक्तदान किया। बकौल गुरप्रीत, वह किसी की तकलीफ नहीं देख सकती हैं। छह मर्तबा रक्तदान करने वाली गुरप्रीत कौर का बड़ा और इकलौता भाई गुरमीत सिंह उमंग ने 22 मर्तबा रक्तदान किया है। बाकायदा इस कार्य के लिए एक ग्रुप भी बना रखा है जो अक्सर जरूरतमंदों के बीच नजर आता है।