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Fatehpur News: दूसरे दिन हत्यारोपी पुत्र का नहीं लगा सुराग, साजिशकर्ता को जेल

Sun, 28 May 2023 11:36 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 28 May 2023 11:36 PM IST
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On the second day there was no clue of the murderer's son, the conspirator was jailed
संवाद न्यूज एजेंसी
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बिंदकी। संपत्ति विवाद में पिता को कुल्हाड़ी से काटकर मौत के घाट उतारने वाले इकलौते पुत्र का पुलिस दूसरे दिन भी सुराग नहीं लगा सकी है। पुलिस ने हत्या में शामिल साजिशकर्ता को जेल भेजा है। वहीं दामाद ने शव को मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया है।
कोतवाली के कोरइयां गांव निवासी मनीराम निषाद (58) मुंबई में नौकरी करता था। वह चार दिन पहले मुंबई से कुछ खेत बेचने आया था। वह अपनी बेटी श्रीमती के घर कल्यानपुर थाना क्षेत्र के बोधीखेड़ा में रुका था। उसने 26 मई को दो बीघा खेत गांव के वीरेंद्र को 16 लाख में बैनामा किया था। करीब पांच लाख कैश मिला था। कैश रकम से कर्ज चुकाया था। मुंबई लौटने से पहले शनिवार को घर पहुंचा था। घर में इकलौता बेटा सुनील उर्फ गुड्डा अपने पिता की कुल्हाड़ी से हत्या कर भाग निकला। पोस्टमार्टम के बाद रविवार को शव भिटौरा घाट परिजन ले गए। वहां दामाद शिव प्रसाद ने परिवार के लोगों के साथ मनीराम के शव को मुखाग्नि दी। उधर, पुलिस फरार चल रहे हत्यारोपी सुनील की तलाश में कानपुर तक पहुंची है। मलवां थाना क्षेत्र के गांव रावतपुर, शमशेर का पुरवा समेत कई गांवों में पुलिस ने छापामारी की। उसके मोबाइल की अंतिम लोकेशन गांव में थी। साफ है कि उसने मोबाइल धरपकड़ के डर से गांव में ही बंद कर दिया था। पुलिस ने हत्याकांड में साजिशकर्ता सुनील के साथी शिवबीर को जेल भेजा है। कोतवाल एसबी सिंह ने बताया कि फरार आरोपी की तलाश में छापामारी की जा रही है।
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पिता से मिलने बहन के घर पहुंचा था सुनील
मृतक मनीराम मुंबई से लौटने के बाद बेटी के घर पहुंचे थे। दामाद शिव प्रसाद ने बताया कि ससुर से मिलने साला सुनील भी 25 मई को घर आया था। उनके बीच बातचीत सामान्य थी। दोनों ने एक साथ खाना भी खाया था। अगल-बगल ही चारपाई में सो गए थे। सुनील पिता को बाइक से गांव कोरइयां साथ लेकर पहुंचा था। अचानक जमीन बेचने को लेकर उनके बीच विवाद शुरू हुआ। सुनील चाहता था कि उसके हक में पूरी जमीन का बैनामा कर दें। सुनील की शराब पीने से ससुर नाराज रहते थे। तभी उसकी बात को तबज्जो नहीं दी थी। जमीन बेचने के बाद सुनील को रुपये भी नहीं दिए थे। मनीराम अपनी बहू और पौत्रियों को संपत्ति देना चाहते थे। विवाद के बाद बेटे की दहशत में शुक्रवार रात प्रधान के घर में रुके थे।
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