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भजनों पर झूमते रहे आस्थावान
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर
Updated Sun, 19 Feb 2017 12:22 AM IST
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अमौली में श्रीमद् भागवत सुनते भक्त
- फोटो : अमर उजाला
अमौली कस्बे के प्राचीन मालिकार्जुन धाम के वार्षिकोत्सव में धर्म अध्यात्म की बयार बही। श्रीमद् भागवत कथा सुनाते हुए कथा वाचक पं. कौशल तिवारी ने कहा कि पतियों से विमुख होकर आचरण करने वाली पत्नियों का सम्मान नहीं होता है।
शनिवार को गीत संगीत के साथ श्रीमद् भागवत कथा का रसपान भक्तों ने किया। कथा वाचक ने सुनाया कि एक बार पार्वती ने शिव से कहा कि श्रीराम भगवान नहीं हो सकते वह शिव जी के समझाने पर नहीं मानीं और राम की परीक्षा लेने निकल पड़ीं। जंगल के पर्वत में खड़े राम लक्ष्मण को देखकर पार्वती ने सीता का रूप धारण कर लिया, लेकिन भगवान राम उनको देखते ही प्रणाम किया। तभी पार्वती दंग रह गईं।
श्रीराम ने कहा कि मां आप अकेले कैसे निकल पड़ीं। जब परिचय पूछा तो शर्मिंदा होकर शिव जी के पास वापस लौट गई। इसलिए पति भक्त सीता का सम्मान के साथ पहले सीता फि र राम का नाम लेते हैं। ‘सीताराम सीताराम कहिए, जाहि विधि राखै राम वाही विधि रहिए’ की धुन के साथ भक्तों को झूमने के लिए मजबूर कर दिया। कार्यक्रम की व्यवस्था संभालने वालों में सत्यदेव ओमर, राम औतार वर्मा, चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी, साहब सिंह, हरीओम शर्मा, रामकुमार आदि लोग रहे।
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शनिवार को गीत संगीत के साथ श्रीमद् भागवत कथा का रसपान भक्तों ने किया। कथा वाचक ने सुनाया कि एक बार पार्वती ने शिव से कहा कि श्रीराम भगवान नहीं हो सकते वह शिव जी के समझाने पर नहीं मानीं और राम की परीक्षा लेने निकल पड़ीं। जंगल के पर्वत में खड़े राम लक्ष्मण को देखकर पार्वती ने सीता का रूप धारण कर लिया, लेकिन भगवान राम उनको देखते ही प्रणाम किया। तभी पार्वती दंग रह गईं।
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श्रीराम ने कहा कि मां आप अकेले कैसे निकल पड़ीं। जब परिचय पूछा तो शर्मिंदा होकर शिव जी के पास वापस लौट गई। इसलिए पति भक्त सीता का सम्मान के साथ पहले सीता फि र राम का नाम लेते हैं। ‘सीताराम सीताराम कहिए, जाहि विधि राखै राम वाही विधि रहिए’ की धुन के साथ भक्तों को झूमने के लिए मजबूर कर दिया। कार्यक्रम की व्यवस्था संभालने वालों में सत्यदेव ओमर, राम औतार वर्मा, चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी, साहब सिंह, हरीओम शर्मा, रामकुमार आदि लोग रहे।
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