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मृदा स्वास्थ्य के लिए खेतों में बोएं ढैंचा
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फतेहपुर। रसायनिक खाद के अधिक उपयोग से बिगड़ी मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए किसान ढैंचा की बुआई करें। 60 से 65 दिन में ढैंचा की फसल को जोत कर हरी खाद बना सकते हैं। इससे खेतों के मृदा स्वास्थ्य में सुधार होगा और मिट्टी भी उपजाऊ होगी।
जिला कृषि अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि किसान साल में तीन से चार फसलें बोते हैं, जिसमें धान, गेहूं के फसल चक्र के कारण मृदा स्वास्थ्य गिरता जा रहा है। मृदा में कार्बन प्रतिशत (0.4 से भी कम) से कम हो गया है। इस कारण से उपज प्रभावित हो रही है। खेतों का मृदा स्वास्थ्य सुधारने के लिए किसान ढैंचा की बुआई करें। मृदा का परीक्षण व उसका उपचार जरूरी है।
बताया कि रबी की फसलों की कटाई के बाद किसान अपने खाली पड़े खेतों में ढैंचा की बुआई करें। इससे मृदा का स्वास्थ्य ठीक होगा और फसलों में उत्पादन बढ़ेगा। खेतों में हरी खाद बोने और पलटाई करने के लिए करीब दो महीने का समय चाहिए। अगली फसल की बुआई होने में अभी वक्त है, इसलिए खाद की बुआई के लिए यह उपयुक्त समय है।
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जिला कृषि अधिकारी ने कहा कि खेतों का पलेवा कर उसमें 40 से 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर ढैंचा की बुआई करें। इसकी जड़ों में विशेष प्रकार की गांठ पाई जाती है, जो वातावरण में स्वतंत्र रूप से विद्यमान नाइट्रोजन को एकत्र कर पौधों को उपलब्ध कराती है। इसके जरिया भूमि में 60 से 100 किलोग्राम नाइट्रोजन उपलब्ध होती है। यह अगेती फसल के लिए अच्छा रहेगा।
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जिला कृषि अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि किसान साल में तीन से चार फसलें बोते हैं, जिसमें धान, गेहूं के फसल चक्र के कारण मृदा स्वास्थ्य गिरता जा रहा है। मृदा में कार्बन प्रतिशत (0.4 से भी कम) से कम हो गया है। इस कारण से उपज प्रभावित हो रही है। खेतों का मृदा स्वास्थ्य सुधारने के लिए किसान ढैंचा की बुआई करें। मृदा का परीक्षण व उसका उपचार जरूरी है।
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बताया कि रबी की फसलों की कटाई के बाद किसान अपने खाली पड़े खेतों में ढैंचा की बुआई करें। इससे मृदा का स्वास्थ्य ठीक होगा और फसलों में उत्पादन बढ़ेगा। खेतों में हरी खाद बोने और पलटाई करने के लिए करीब दो महीने का समय चाहिए। अगली फसल की बुआई होने में अभी वक्त है, इसलिए खाद की बुआई के लिए यह उपयुक्त समय है।
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जिला कृषि अधिकारी ने कहा कि खेतों का पलेवा कर उसमें 40 से 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर ढैंचा की बुआई करें। इसकी जड़ों में विशेष प्रकार की गांठ पाई जाती है, जो वातावरण में स्वतंत्र रूप से विद्यमान नाइट्रोजन को एकत्र कर पौधों को उपलब्ध कराती है। इसके जरिया भूमि में 60 से 100 किलोग्राम नाइट्रोजन उपलब्ध होती है। यह अगेती फसल के लिए अच्छा रहेगा।