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Fatehpur News: ग्रामीण क्षेत्र की चिकित्सा व्यवस्था बदहाल, रात में नहीं मिलते डॉक्टर

Sun, 14 Jan 2024 02:34 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर Updated Sun, 14 Jan 2024 02:34 PM IST
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Medical system in rural areas is bad, doctors are not available at night
फतेहपुर। ग्रामीण क्षेत्र की चिकित्सा व्यवस्था बदहाल है। क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र विलंब से खुलने और जल्द बंद होने की आदत में शुमार हैं। गैर जिलों से आने वाले डॉक्टरों के अस्पताल देर से खुलते हैं और जल्दी बंद होते हैं। डाॅक्टरों के अस्पताल छोड़ने के बाद सिर्फ रेफर करने की व्यवस्था है, जबकि इन अस्पतालों में 24 घंटे इमरजेंसी चिकित्सा व्यवस्था का प्रावधान है। ऐसे में यह अस्पताल रोगियों के लिए सिर्फ रेफर सेंटर साबित हो रहे हैं।
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फोटो-16-नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र औंग। संवाद
नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र औंग में शनिवार को डॉ. शालिनी गौतम, फार्मासिस्ट अवधेश कुमार ,स्टाफ नर्स मीनू, लालिमा, प्रिंसी, सफाई कर्मचारी सीताराम मौजूद हैं। एलटी अखिलेश प्रजापति ड्यूटी पर गोपालगंज पीएचसी गए हैं। रात में वार्ड ब्वाय और सफाई कर्मचारी सीताराम एक-एक दिवस ड्यूटी करते हैं। रात में चिकित्सा की कोई व्यवस्था नहीं है।
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फोटो-14-प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बहुआ में खिड़की में दवा लेते मरीज। संवाद
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बहुआ में शनिवार को चिकित्साप्रभारी डॉ. गौतम, डॉ. विनय सिंह, डॉ. आभा श्रीवास्तव, फार्मासिस्ट अनिल कुमार वर्मा, एलटी रामनरेश सिंह मौजूद हैं। दिन के एक बजे तक ओपीडी में 30 मरीज पहुंचे। यहां भी रात में मरीज भर्ती नहीं किए जाते हैं।
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फोटो-15-प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवमई में ओपीडी करते डाक्टर। संवाद
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवमई में शनिवार को ओपीडी में 19 मरीज पहुंचे। प्रभारी विमलेश कुमार अस्पताल में नहीं हैं। संविदा डॉ. रघुराज ओपीडी कर रहे हैं। मेडिकल अस्सिटेंट का स्थान अभी तक खाली है। महिला डॉ. अंशिका सचान, स्टाफ नर्स दीपिका सचान, नीलू सिंह, दिव्या अस्पताल में आठ-आठ घंटे ड्यूटी करती हैं। रात में मरीज भर्ती नहीं किए जाते हैं।
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फोटो-13-प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खजुहा। संवाद
पीएचसी में दो डॉक्टरों के पद हैं, इनमें डॉ. बृजेश और डॉ. प्रतिभा तैनात हैं। एआरओ का एक पद रिक्त है। स्वीपर का पद भी रिक्त है। वर्तमान में ओपीडी में 80 से 100 मरीज पहुंच रहे हैं। यहां पर महीने में 60 से 70 प्रसव होते हैं। मरीजों को रात में भर्ती कर इलाज की व्यवस्था नहीं है।

....बयान...
सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 24 घंटे इमरजेंसी चिकित्सा की व्यवस्था लागू है। अगर किसी अस्पताल में 24 घंटे डॉक्टर की मौजूदगी नहीं रहती है और इसकी शिकायत मिलेगी, तो विभागीय कार्यवाही की जाएगी।
-डॉ. अशोक कुमार, सीएमओ
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