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Fatehpur News: डीएम की पहल से अब तक मेडिकल कॉलेज को मिले आठ मानव शरीर
Sat, 05 Jul 2025 01:17 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
Updated Sat, 05 Jul 2025 01:17 AM IST
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फतेहपुर। जिलाधिकारी रविंद्र सिंह का आदेश प्रदेशभर में प्रेरणा बन गया है। 13 दिसंबर 2024 को जारी इस आदेश के पूरे प्रदेश में क्रियान्वयन के लिए प्रमुख सचिव ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखा है। पत्र में पुलिस अधीक्षक को लावारिश मिलने वाले शवों को मेडिकल कॉलेज को सौंपने का अनुरोध किया गया है।
प्रदेश के अधिकांश जिलों में मेडिकल कॉलेज खोल तो दिए गए हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेजों मृत मानव शरीर दान में न मिलने के कारण मेडिकल के छात्रों को प्रैक्टिकल करने में बाधा उत्पन्न हो रही है। हर साल प्रत्येक मेडिकल कालेज को 10 मानव मृत शरीर की आवश्यकता होती है। इसके सापेक्ष जोधा सिंह अटैया, ठाकुर दरियाव सिंह मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में आठ मानव शरीर ही उपलब्ध हैं।
उच्च शिक्षा वाले क्षेत्रो में देहदान की खासी परंपरा है, लेकिन अभी तक जिले में देहदान प्रथा बहुत ही कमजोर है। मृत मानव शरीर पर्याप्त मात्रा उपलब्ध न होने से मेडिकल कॉलेज की मान्यता पर खतरा मंडरा रहा है। मेडिकल कॉलेज में छात्रों को पर्याप्त शव उपलब्ध न होने से शारीरिक शिक्षण में बाधा आ रही है। हालांकि यह स्थिति प्रदेश के अधिकांश जिलों के मेडिकल कालेजों में है।
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मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे छात्रों को लावारिस या दान में मिले शवों के जरिए पोस्टमार्टम और शरीर की संरचना तथा कार्यप्रणाली की जानकारी दी जाती है। 10 छात्रों के बीच एक शव उपलब्ध कराया जाता है। मेडिकल छात्र शवों या उनके अंगों को केमिकल लगाकर लगभग एक साल तक शारीरिक शिक्षण के लिए प्रयोग में लाया जाता है।
..इनसेट..
प्रदेश के 40 जिलों में है समस्या
सेंटर यूपी के बांदा, जालौन, फतेहपुर, औरैया, कन्नौज और कानपुर नगर और देहात शामिल हैं। हाल ही में प्रदेश के प्रमुख सचिव (चिकित्सा शिक्षा) ने इन जिलों के डीएम व एसपी को पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया है। हालांकि जिले में ऐसे आदेश पर दिसंबर 2024 से क्रियान्वयन हो रहा है।
..बयान..
डीएम से मृत मानव शरीर की कमी को लेकर दिसंबर में लिखित अनुरोध किया गया था। इस पर 13 दिसंबर को डीएम रविंद्र सिंह ने एसपी के पत्र जारी कर लावारिस मानव शरीर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। उन्होंने यह आदेश प्रमुख सचिव के समक्ष प्रस्तुत किया था। इस पर प्रमुख सचिव ने प्रदेश के सभी जिले में इसी आदेश के क्रियान्यवन के लिए पत्र जारी किया है। -डॉ. आरपी सिंह, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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प्रदेश के अधिकांश जिलों में मेडिकल कॉलेज खोल तो दिए गए हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेजों मृत मानव शरीर दान में न मिलने के कारण मेडिकल के छात्रों को प्रैक्टिकल करने में बाधा उत्पन्न हो रही है। हर साल प्रत्येक मेडिकल कालेज को 10 मानव मृत शरीर की आवश्यकता होती है। इसके सापेक्ष जोधा सिंह अटैया, ठाकुर दरियाव सिंह मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में आठ मानव शरीर ही उपलब्ध हैं।
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उच्च शिक्षा वाले क्षेत्रो में देहदान की खासी परंपरा है, लेकिन अभी तक जिले में देहदान प्रथा बहुत ही कमजोर है। मृत मानव शरीर पर्याप्त मात्रा उपलब्ध न होने से मेडिकल कॉलेज की मान्यता पर खतरा मंडरा रहा है। मेडिकल कॉलेज में छात्रों को पर्याप्त शव उपलब्ध न होने से शारीरिक शिक्षण में बाधा आ रही है। हालांकि यह स्थिति प्रदेश के अधिकांश जिलों के मेडिकल कालेजों में है।
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मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे छात्रों को लावारिस या दान में मिले शवों के जरिए पोस्टमार्टम और शरीर की संरचना तथा कार्यप्रणाली की जानकारी दी जाती है। 10 छात्रों के बीच एक शव उपलब्ध कराया जाता है। मेडिकल छात्र शवों या उनके अंगों को केमिकल लगाकर लगभग एक साल तक शारीरिक शिक्षण के लिए प्रयोग में लाया जाता है।
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प्रदेश के 40 जिलों में है समस्या
सेंटर यूपी के बांदा, जालौन, फतेहपुर, औरैया, कन्नौज और कानपुर नगर और देहात शामिल हैं। हाल ही में प्रदेश के प्रमुख सचिव (चिकित्सा शिक्षा) ने इन जिलों के डीएम व एसपी को पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया है। हालांकि जिले में ऐसे आदेश पर दिसंबर 2024 से क्रियान्वयन हो रहा है।
..बयान..
डीएम से मृत मानव शरीर की कमी को लेकर दिसंबर में लिखित अनुरोध किया गया था। इस पर 13 दिसंबर को डीएम रविंद्र सिंह ने एसपी के पत्र जारी कर लावारिस मानव शरीर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। उन्होंने यह आदेश प्रमुख सचिव के समक्ष प्रस्तुत किया था। इस पर प्रमुख सचिव ने प्रदेश के सभी जिले में इसी आदेश के क्रियान्यवन के लिए पत्र जारी किया है। -डॉ. आरपी सिंह, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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