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प्याज और गोभी की अगेती फसल करेगी मालामाल
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कृषि विज्ञान केंद्र थरियांव में श्रमिकों को प्रशिक्षण देते प्रयागराज से आए प्रशिक्षक वीके सिंह
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर में प्याज और गोभी की अगेती फसल के लिए यह मौसम अनुकूल है। किसान समय का लाभ उठाकर अपने खेतों में प्याज और गोभी लगाएं। प्याज की एक हेक्टेयर में की गई फसल तीन लाख रुपये तक दे सकती है। इसी तरह गोभी की अगेती फसल भी मोटा मुनाफा देगी। कृषि विज्ञान केंद्र थरियांव में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत किसानों को उन्नत किस्म की फसल करने के लिए प्रशिक्षण दिया गया। कम क्षेत्रफल में गोभी और प्याज की फसल से अधिक लाभ लेने के तरीके बताए गए। साथ ही लोटनल पॉली हाउस में सब्जियों की नर्सरी तैयार करने के लाभ बताए गए।
औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र खुशरूबाग प्रयागराज के विशेषज्ञ विजय किशोर सिंह ने बताया कि गोभी की अगेती फसल और प्याज की खेती करें। इन फसलों को कम लागत में तैयार किया जा सकता है। इसके लिए पहले नर्सरी तैयार करनी होगी। लोटनल पॉली हाउस में नर्सरी की बुआई करें। इसमें नर्सरी को नुकसान पहुंचाने वाले कीटाणु नहीं पहुंचे पाते और नर्सरी में किसी प्रकार का रोग नहीं लगता है। एक हेक्टेयर में छह लाख प्याज के पौधे आसानी से लगाए जा सकते हैं। अगर 50 पैसे का एक प्याज भी बिकेगा तो एक हेक्टेयर में तीन लाख रुपये की प्याज होगी। जो एक अच्छा मुनाफा है।
इस समय गोभी की नर्सरी बोने का समय है। 20 दिन में नर्सरी और 40 दिन में गोभी तैैयार हो जाती है। यानि अक्तूबर में अगर गोभी की फसल बाजार में पहुंच जाती है तो उसके दाम अच्छे मिलते हैं। इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि सीजन के शुरुआत में जो गोभी 20-30 रुपये तक में बिकती है वह नवंबर के मध्य और दिसंबर आते-आते 8-10 रुपये पर पहुंच जाती है। सब्जी से जुड़ी हर फसल में ऐसा होता है। जिन किसानों ने अगेती फसल करके अपनी उपज बाजार तक पहुंचा दी उन्हें कई गुना तक लाभ मिल जाता है जबकि बाद में बाजार में पहुंचने वाली उपज को उम्मीद के मुताबिक लाभ नहीं मिल पाता। इसलिए जरूरी है कि किसान अगेती फसल पर जोर दे।
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कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवेंद्र स्वरूप ने कहा कि खेती के साथ पशुपालन बहुत जरूरी है। पशुओं से खेेत की मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए गोबर की खाद तो तैैयार होती ही है साथ में दूध बेचकर अपनी आय को बढ़ाया जा सकता है। डॉ. नौशाद आलम ने जैविक खाद तैयार करने और फसलों में छिड़काव का तरीका बताया। मौसम विशेषज्ञ सचिन कुमार शुक्ला ने कहा कि हर फसल के लिए मौसम को अनुकूल होना बहुत जरूरी है। किसानों को मोबाइल के माध्यम से मौसम में होने वाले बदलाव की लगातार जानकारी दी जाती है। इसी प्रकार साधना वैश्य, अल्का कटियार ने टमाटर से सॉस, आलू से चिप्स और भुजिया बनाने की जानकारी दी।
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औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र खुशरूबाग प्रयागराज के विशेषज्ञ विजय किशोर सिंह ने बताया कि गोभी की अगेती फसल और प्याज की खेती करें। इन फसलों को कम लागत में तैयार किया जा सकता है। इसके लिए पहले नर्सरी तैयार करनी होगी। लोटनल पॉली हाउस में नर्सरी की बुआई करें। इसमें नर्सरी को नुकसान पहुंचाने वाले कीटाणु नहीं पहुंचे पाते और नर्सरी में किसी प्रकार का रोग नहीं लगता है। एक हेक्टेयर में छह लाख प्याज के पौधे आसानी से लगाए जा सकते हैं। अगर 50 पैसे का एक प्याज भी बिकेगा तो एक हेक्टेयर में तीन लाख रुपये की प्याज होगी। जो एक अच्छा मुनाफा है।
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इस समय गोभी की नर्सरी बोने का समय है। 20 दिन में नर्सरी और 40 दिन में गोभी तैैयार हो जाती है। यानि अक्तूबर में अगर गोभी की फसल बाजार में पहुंच जाती है तो उसके दाम अच्छे मिलते हैं। इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि सीजन के शुरुआत में जो गोभी 20-30 रुपये तक में बिकती है वह नवंबर के मध्य और दिसंबर आते-आते 8-10 रुपये पर पहुंच जाती है। सब्जी से जुड़ी हर फसल में ऐसा होता है। जिन किसानों ने अगेती फसल करके अपनी उपज बाजार तक पहुंचा दी उन्हें कई गुना तक लाभ मिल जाता है जबकि बाद में बाजार में पहुंचने वाली उपज को उम्मीद के मुताबिक लाभ नहीं मिल पाता। इसलिए जरूरी है कि किसान अगेती फसल पर जोर दे।
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कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवेंद्र स्वरूप ने कहा कि खेती के साथ पशुपालन बहुत जरूरी है। पशुओं से खेेत की मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए गोबर की खाद तो तैैयार होती ही है साथ में दूध बेचकर अपनी आय को बढ़ाया जा सकता है। डॉ. नौशाद आलम ने जैविक खाद तैयार करने और फसलों में छिड़काव का तरीका बताया। मौसम विशेषज्ञ सचिन कुमार शुक्ला ने कहा कि हर फसल के लिए मौसम को अनुकूल होना बहुत जरूरी है। किसानों को मोबाइल के माध्यम से मौसम में होने वाले बदलाव की लगातार जानकारी दी जाती है। इसी प्रकार साधना वैश्य, अल्का कटियार ने टमाटर से सॉस, आलू से चिप्स और भुजिया बनाने की जानकारी दी।