{"_id":"5fe7833e8ebc3e41db1c0cdb","slug":"land-measurement-for-pipa-bridge-fatehpur-news-knp602331339","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों के विरोध के चलते पिछड़ा पीपा पुल का काम, अब जनवरी में शुरू होगा निर्माण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों के विरोध के चलते पिछड़ा पीपा पुल का काम, अब जनवरी में शुरू होगा निर्माण
विज्ञापन
पीपा पुल के रास्ते की जमीन की पैमाइस करती राजस्व टीम
- फोटो : FATEHPUR
किशनपुर। किसानों के विरोध के चलते यमुना पर बनने वाला पीपा पुल का काम पिछड़ गया है। हर साल दिसंबर मध्य तक बनकर तैयार होने वाला यह पुल इस बार जनवरी के पहले सप्ताह से शुरू होने की उम्मीद है। शनिवार को लोक निर्माण विभाग के जेई ने विरोध कर रहे किसानों की जमीन की पैमाइश कराई।
वर्ष 2019 में 12 दिसंबर को शुरू होने वाला पीपा पुल इस वर्ष बनकर तैयार नहीं हो सका है। यमुना के फैलाव के कारण पीपा पुल को वास्तविक स्थान से 20 मीटर पूरब की ओर ले जाया गया है।
इसका किसानों ने विरोध किया था। किसानों का कहना है कि जहां से पुल बनेगा, वहां उनकी जमीन है। ऐसे में किसानों ने मुआवजे की मांग रखी थी।
शनिवार को लोक निर्माण विभाग के जेई उमेश कुमार विश्वकर्मा अपनी टीम के साथ पहुंचे और पुल निर्माण के रास्ते में आने वाली किसानों की जमीन की पैमाइश कराई।
विज्ञापन
जेई ने बताया कि किसान जनहित में जमीन देने के लिए तैयार हो गए है। पुल का निर्माण अगले सप्ताह से शुरू हो जाएगा। पुल के न बन पाने के कारण बांदा-चित्रकूट जाने के लिए वाहन सवारों को करीब 65 किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
वर्ष 2019 में 12 दिसंबर को शुरू होने वाला पीपा पुल इस वर्ष बनकर तैयार नहीं हो सका है। यमुना के फैलाव के कारण पीपा पुल को वास्तविक स्थान से 20 मीटर पूरब की ओर ले जाया गया है।
विज्ञापन
इसका किसानों ने विरोध किया था। किसानों का कहना है कि जहां से पुल बनेगा, वहां उनकी जमीन है। ऐसे में किसानों ने मुआवजे की मांग रखी थी।
शनिवार को लोक निर्माण विभाग के जेई उमेश कुमार विश्वकर्मा अपनी टीम के साथ पहुंचे और पुल निर्माण के रास्ते में आने वाली किसानों की जमीन की पैमाइश कराई।
विज्ञापन
जेई ने बताया कि किसान जनहित में जमीन देने के लिए तैयार हो गए है। पुल का निर्माण अगले सप्ताह से शुरू हो जाएगा। पुल के न बन पाने के कारण बांदा-चित्रकूट जाने के लिए वाहन सवारों को करीब 65 किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है।