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विद्यालय खुला नहीं और छात्राओं के नाम पर 31 लाख डकार गए जिम्मेदार
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फतेहपुर। आपदा में अवसर का बीएसए कार्यालय ने अपने ही तरीके से अर्थ निकाल लिया है। कस्तूरबा विद्यालय खुले नहीं और उनमें पढ़ने वाली छात्राओं के नाम पर जिम्मेदारों ने 31 लाख से अधिक की रकम डकार ली। जिलेभर के कुल 10 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में 31 लाख 16 हजार 200 रुपयों का खेल किया गया।
शासन के आदेश पर सिर्फ 49 दिन के लिए खुले कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में प्रति दिन से हिसाब से खर्च के बजाय शत प्रतिशत बजट निकाल लिया गया और उसे खर्च भी कर दिया गया। मामला उजागर होते ही बेसिक शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। इस पूरे प्रकरण में राज्य परियोजना निदेशक विजय किरन आनंद ने एडी बेसिक को जांच के आदेश दिए हैं।
जिले में वर्तमान समय में 10 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संचालित हैं। इनमें धाता, विजयीपुर, ऐरायां, हसवा, मलवां, बहुआ, तेलियानी, असोथर, हथगाम, भिटौरा शामिल हैं। पिछले सत्र में कोरोना संक्रमण के कारण 25 मार्च से सभी कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय बंद कर दिए गए थे। फरवरी 2021 में शासन ने अभिभावकों से सहमति पत्र लेकर विद्यालय खोलने के निर्देश दिए थे।
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इसके बाद विद्यालय 11 फरवरी से खोले गए और 31 मार्च तक संचालित हुए, लेकिन इस दौरान छात्राओं की उपस्थिति क्या थी, इसकी जानकारी कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों ने प्रेरणा पोर्टल पर दर्ज नहीं की। खास बात तो यह है कि बेसिक शिक्षा विभाग ने भोजन, मेडिकल, कंटीजेंसी और शिक्षण सामग्री का शत प्रतिशत बजट 31 लाख 16 हजार 200 रुपये खर्च कर दिया।
जबकि स्कूल मात्र 49 दिन स्कूल खोले गए थे। इस दौरान विभाग ने ऐसी कौन सी व्यवस्था में 31 लाख की जंबो धनराशि खर्च कर दी, यह आला अधिकारियों के गले नहीं उतर रहा है। प्रेरणा पोर्टल पर उपस्थिति अपलोड न होने पर मामला शासन स्तर पर पकड़ गया। अब राज्य परियोजना निदेशक विजय किरन आनंद ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जांच की जिम्मेदारी एडी बेसिक प्रयागराज मंडल को सौंपी गई है।
कस्तूरबा में कक्षा आठ तक निशुल्क पढ़ाई की व्यवस्था
शासन ने जिले में महिला शिक्षा में पिछड़े ब्लाकों में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय दो दशक पहले संचालित किए थे। जिले के 13 ब्लाकों में खजुहा, अमौली, देवमई छोड़कर अन्य सभी 10 ब्लाकों में स्कूल खोले गए थे। इन सभी में 100 बालिकाओं को कक्षा आठ तक की मुफ्त पढ़ाई के साथ रहने, खाने, कापी, किताबें, यूनिफार्म, जूता, मोजा समेत अन्य सभी खर्च वहन करने की व्यवस्था है।
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शासन के आदेश पर सिर्फ 49 दिन के लिए खुले कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में प्रति दिन से हिसाब से खर्च के बजाय शत प्रतिशत बजट निकाल लिया गया और उसे खर्च भी कर दिया गया। मामला उजागर होते ही बेसिक शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। इस पूरे प्रकरण में राज्य परियोजना निदेशक विजय किरन आनंद ने एडी बेसिक को जांच के आदेश दिए हैं।
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जिले में वर्तमान समय में 10 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संचालित हैं। इनमें धाता, विजयीपुर, ऐरायां, हसवा, मलवां, बहुआ, तेलियानी, असोथर, हथगाम, भिटौरा शामिल हैं। पिछले सत्र में कोरोना संक्रमण के कारण 25 मार्च से सभी कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय बंद कर दिए गए थे। फरवरी 2021 में शासन ने अभिभावकों से सहमति पत्र लेकर विद्यालय खोलने के निर्देश दिए थे।
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इसके बाद विद्यालय 11 फरवरी से खोले गए और 31 मार्च तक संचालित हुए, लेकिन इस दौरान छात्राओं की उपस्थिति क्या थी, इसकी जानकारी कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों ने प्रेरणा पोर्टल पर दर्ज नहीं की। खास बात तो यह है कि बेसिक शिक्षा विभाग ने भोजन, मेडिकल, कंटीजेंसी और शिक्षण सामग्री का शत प्रतिशत बजट 31 लाख 16 हजार 200 रुपये खर्च कर दिया।
जबकि स्कूल मात्र 49 दिन स्कूल खोले गए थे। इस दौरान विभाग ने ऐसी कौन सी व्यवस्था में 31 लाख की जंबो धनराशि खर्च कर दी, यह आला अधिकारियों के गले नहीं उतर रहा है। प्रेरणा पोर्टल पर उपस्थिति अपलोड न होने पर मामला शासन स्तर पर पकड़ गया। अब राज्य परियोजना निदेशक विजय किरन आनंद ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जांच की जिम्मेदारी एडी बेसिक प्रयागराज मंडल को सौंपी गई है।
कस्तूरबा में कक्षा आठ तक निशुल्क पढ़ाई की व्यवस्था
शासन ने जिले में महिला शिक्षा में पिछड़े ब्लाकों में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय दो दशक पहले संचालित किए थे। जिले के 13 ब्लाकों में खजुहा, अमौली, देवमई छोड़कर अन्य सभी 10 ब्लाकों में स्कूल खोले गए थे। इन सभी में 100 बालिकाओं को कक्षा आठ तक की मुफ्त पढ़ाई के साथ रहने, खाने, कापी, किताबें, यूनिफार्म, जूता, मोजा समेत अन्य सभी खर्च वहन करने की व्यवस्था है।