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Fatehpur News: व्यावसायिक उपयोग से आदर्श बनी कान्हा गोशाला

Sun, 09 Apr 2023 12:13 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 09 Apr 2023 12:13 AM IST
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Kanha Gaushala became ideal for commercial use
खास खबर
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फोटो-17-गोशाला के स्टोर में डंप भूसा। संवाद
फोटो-18-गोशाला में भूसा खाते गोवंश। संवाद
फोटो-19-गोशाला में अलग बंधी गिरी और साहीवाल गाय और बच्चे। संवाद
फोटो-20-गोशाला बने कंडे। संवाद
फोटो-21-वर्मी कंपोस्ट खाद के प्लास्टिक के टैंक। संवाद
-दस रुपये प्रति कंडे की दर से हो रही आपूर्ति
-साहीवाल, गिरी गाय की तैयार हो रही नर्सरी
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। कान्हा गोशाला आपदा में अवसर निकालकर आदर्श गोशाला बनी है। गोशाला से गोबर के कंडे और वर्मी कंपोस्ट खाद बनाकर बिक्री कर कमाई की जा रही है। इतना ही नहीं देशी गायों से साहीवाल और गिरी नस्ल के बच्चे तैयार हो रहे हैं। यह गोशाला अन्य गोशालाओं के लिए मॉडल है।
नगर पालिका की कान्हा गोशाला शहर सीमा के गांव मलाका के पास है। इसकी क्षमता 600 गोवंश है। इसके सापेक्ष 700 गोवंश बंद हैं। इनमें 100 सांड हैं। 100 गोवंश अन्य किसी गोशाला में शिफ्ट करने की योजना है। गोशाला में पांच स्थाई कर्मचारी हैं और इतने ही कर्मचारी प्रतिदिन नगर पालिका से साफ सफाई करने आते हैं। टीनशेडों में पंखे लगे हैं और भूसा खाने के लिए चरही बनी है। सबमर्सिबल पंप का कनेक्शन जगह-जगह बने पानी भरने की टंकियों से है। जरूरत पर मवेशियों के पानी पीने के लिए टंकियों में भरा जाता है। सांड रखने के लिए अभी हाल में गोशाला का निर्माण हुआ है। इसमें 100 सांड बंद हैं।
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गोशाला से निकलने वाले गोबर का व्यवसायिक उपयोग हो रहा है। इससे कंडे और वर्मी कंपोस्ट खाद बनाई जा रही। इसके लिए 18 पॉलीथिन के टैंक बने हैं। प्रत्येक टैंक से चार क्विंटल वर्मी कंपोस्ट खाद 20 से 25 दिन में तैयार होती है। प्रति पीस कंडा 10 रुपये के हिसाब से बाहर भेजा जा रहा है। हरे चारे के लिए एक एकड़ क्षेत्र में नैपियर घास तैयार की जा रही है। इसमें सिर्फ वर्मी खाद का उपयोग हो रहा है।
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साहीवाल, गिरी गाय की नर्सरी तैयार
फतेहपुर। गोशाला में साहीवाल और गिरी गाय की नर्सरी तैयार हो रही है। वर्तमान में 10 साहीवाल और आठ गिरी नस्ल के बच्चे गोशाला में हैं। इस तरह गोवंश बच्चों की संख्या 51 पहुंच गई है। इन्हें रखने के लिए अलग व्यवस्था है।

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बयान
फोटो-16-प्रबंधक सागर
प्रतिदिन 50 क्विंटल भूसा खर्च हो रहा है। हर दूसरे दिन 150 क्विंटल भूसा खरीदा जाता है। हराचारा नैपियर घास भी तैयार हो रही है। 10 से 15 दिन में गोवंशों को रहा चारा मिलना शुरू हो जाएगा।
सागर, प्रबंधक कान्हा गोशाला मलाका
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