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मकान ढहने से तीन जिंदा दफन, बारिश का कहर, मृतकों में मां, पुत्री और बेटा, एक बच्चा भर्ती

Wed, 15 Apr 2015 01:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर Updated Wed, 15 Apr 2015 01:04 AM IST
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Houses demolished, three crushed, dead

खागा के हथगाम थाना क्षेत्र के लखमीपुर गांव के मजरे पैगंबरपुर में सोमवार की रात बरसात से एक गरीब का कच्चा आशियाना ढह गया। मलबे में दबकर गृहस्वामी की पत्नी, पुत्री और पुत्र जिंदा दफन हो गए। एक पुत्र गंभीर रूप से घायल हो गया।

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रात को ही मलबे से तीनों के शव निकाले गए। पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम कराया है। लखमीपुर गांव के दलित सोनू की पत्नी सुखराजा (38), पुत्री सुनीता (18), पुत्र रवि (11) और सूरज (5) खाना खाने के बाद घर के अंदर सो गए। सोनू गुजरात में मेहनत मजदूरी करता है। घटना के समय वह घर पर नहीं था।
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सोमवार को शाम हल्की बारिश से जर्जर कच्चा मकान रात को ढह गया। मकान के मलबे में सुखराजा, सुनीता, रवि और सूरज दब गए। मकान गिरने से हुई आवाज सुनकर पहुंचे ग्रामीणों ने मशक्कत कर मलबे से चारों को बाहर निकाला। मलबे में दबने से सुखराजा, सुनीता और सूरज की मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि रवि की सांस चल रही थी।
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आनन-फानन में रवि को अस्पताल पहुंचाया गया। सूचना पर मंगलवार को एसडीएम बलराम सिंह, नायब तहसीलदार आरके चौधरी राजस्व कर्मियों के साथ मौके पर जाकर घटना का निरीक्षण किया। पुलिस ने तीनों शवों   का पोस्टमार्टम कराया है।

मृतकों के आश्रित को मिलेंगे 12 लाख
जर्जर कच्चा मकान ढहने से मां बेटी और बेटे की की मौत पर प्रशासन दो दिन के अंदर मुआवजे की धनराशि आश्रितों को उपलब्ध करा देगी। एसडीएम बलराम सिंह ने बताया कि घटना दैवीय आपदा के अंर्तगत आती है। तीनों मृतकों के आश्रित को चार-चार लाख मुआवजे की धनराशि दी जाएगी। गृहस्वामी सोनू के आते ही धनराशि की चेक दे दी जाएगी।

सुनीता की 21 को थी शादी 
लखमीपुर गांव के मजरे पैगंबरपुर में एक गरीब दलित का कच्चा मकान ढहने से हुई तीन मौतों से गांव में मातम छाया हुआ है। सभी लोग अफसोस जता रहे हैं। हादसे में मृत सुनीता की शादी की तैयारियां भी हो रही थीं, लेकिन सब कुछ एक पल में खत्म हो गया।

सुनीता की शादी खागा कोतवाली क्षेत्र के गांव धनकामई में तय थी। बारात 21 अप्रैल को आनी थी। बताते हैं कि दो-तीन दिन में पिता सोनू गुजरात से आने वाला है। जहां कुछ दिनों में शादी की खुशियां और चहल-पहल होनी थी वहां अब मातम पसरा है। बताते हैं कि गरीबी के कारण सोनू का परिवार जर्जर मकान में ही गुजारा कर रहा था।


बीपीएल लाभार्थी होते हुए भी प्रशासन से उसे इंदिरा या लोहिया आवास नहीं मिल सका। कई बार सोनू की पत्नी ने इसके लिए गुहार भी लगाई लेकिन उसे हर बार निराशा ही हाथ लगी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मकान पक्का होता तो शायद वे लोग बच जाते।

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