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शिकायत न सुनने से नहर कटी

Wed, 20 Jan 2016 12:35 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फतेहपुर
ब्यूरो, अमर उजाला फतेहपुर Updated Wed, 20 Jan 2016 12:35 AM IST
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Hearing complaints from the canal cut

किसानों की शिकायत पर अगर सिंचाई खंड के अधिकारी

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समस्या का समाधान कर देते तो शायद खांदी नहीं कटती। सैकड़ों बीघा फसल को डूबने से बचाया जा सकता था। मौहार गांव के उमाशंकर अवस्थी ने सिंचाई खंड के बेलदार संजीव कुमार अवस्थी से अवैध कुलाबा हटाने की मांग की थी, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने मामले को गंभीरता सेे नहीं लिया। नतीजतन क्षेत्र के किसानों की लाखों रुपये लागत की फसलें बर्बाद हो गईं। खांदी से बर्बाद किसानों से बातचीत पर खबर।

सीन-1
अलीपुर गांव के किसान छेदा प्रजापति के पास कुल पांच बीघा खेती है। जिससे परिवार के छह लोगों की गुजर-बसर होती है। अब तो रोजी-रोटी भी चली गई। जिस खेत को नहर के पानी से सोमवार को सींचा था, रात में खांदी कटने से वह लबालब हो गई। फसल दिखाई नहीं दे रही है। पानी इतना अधिक भर गया है कि नाला से निकलने मेें भी तीन-चार दिन लग जाएगा। तब तक गेहूं की पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी।

सीन-2
अलीपुर गांव के किसान अभिलाष सिंह ने बताया कि उनके पास 11बीघा खेत हैं। किसान क्रेडिट कार्ड से धान की फसल में दो लाख रुपये निकाले थे। धान की फसल सिंचाई के समय न नहर में पानी आया और न ही बारिश हुई, जिससे केसीसी के लोन का ब्याज तक नहीं जमा हुआ है। गेहूं की फसल को लेकर कुछ आस थी कि ब्याज तो जमा ही हो जाएगा। पानी भरने से अब तो कुछ समझ नहीं आ रहा है।

सीन-3
मौहार गांव के किसान रणवीर सिंह ने बताया कि दो बीघा आलू, एक बीघा मटर और पांच बीघा गेहूं की फसल खांदी के पानी में डूब गई है। शनिवार को आलू की फसल में खाद व दवा का छिड़काव किया था और गेहूं के फसल की सिंचाई की थी। अब तो सब बर्बाद हो गया। कैसे घर का खर्च चलेगा, कुछ समझ में नहीं आ रहा।

सीन-4
कोरसम गांव का बटाईदार किसान रमेश ने बताया कि दो साल पहले इसी जगह से खांदी हो गई थी। इस बार भी खांदी ने बर्बाद कर दिया। अब तो कुलाबा के पास की खेती बंटाई पर कभी नहीं लेंगे। अवैध कुलाबा को खेत के पास से हटवाने की सिंचाई खंड के जेई कहा गया था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। विभाग से नुकसान के आकलन पर मुआवजा भी खेत मालिक को मिलता है, जिसमें बटाईदार को तो कुछ मिलता ही नहीं है।


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