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सदर अस्पताल में जल्द बनेगी कंपोनेंट से परेशन इकाई
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फतेहपुर। ऐसे मरीज जिन्हें रक्त के अलग-अलग तत्व जैसे रेड ब्लड सेल, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स व क्रायोप्रेसीपिटेट की जरूरत है, उन्हें आने वाले दिनों में कानपुर और प्रयागराज नहीं जाना पड़ेगा। जिला अस्पताल में कंपोनेंट यूनिट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मशीनों के लिए टेंडर हो चुके हैं, जिला अस्पताल में इसे स्थापित करने के लिए जगह देखी जा रही है।
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में खून के तत्व निकालने की सुविधा नहीं है। इससे मरीजों को कानपुर या फिर प्रयागराज जाना पड़ता है। कंपोनेंट इकाई की स्थापना के बाद मरीजों को यहां पर ही सुविधा मिल सकेगी। यूनिट स्थापित होने के बाद ब्लड से रेड ब्लड सेल, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स व क्रायोप्रेसीपिटेट यहीं पर मशीनों की मदद से अलग-अलग कर दिए जाएंगे। इससे जिस मरीज को ब्लड के जिस तत्व की जरूरत होगी, उसे वह तत्व यहीं मिल जाएंगे।
एड्स नियंत्रण सोसाइटी लखनऊ ने कंपोनेंट यूनिट को लगाने के लिए जगह की जानकारी मांगी थी। अस्पताल प्रशासन ने ब्लड बैंक के बगल की जमीन को इकाई के लिए प्रस्तावित कर अगस्त के पहले सप्ताह में रिपोर्ट भेजी थी। इस जमीन को यूनिसेफ ने देखा है। कंपोनेंट इकाई में चार कमरे बनेंगे।
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जिसमें आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स व क्रायोप्रेसीपिटेट को निकालने के लिए मशीनें लगेंगी। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि मशीनों के टेंडर हो चुके हैं, विभाग के एचओडी और सीएमएस के साथ मशीन लगाने के लिए जगह पर विचार किया जा रहा है। जल्द ही यूनिट स्थापित होगी। इससे मरीजों को कानपुर और प्रयागराज नहीं जाना पड़ेगा।
डेढ़ सौ वर्ग मीटर का मानक
ब्लड बैंक व कंपोनेंट इकाई के लिए डेढ़ सौ वर्ग मीटर का मानक है। दोनों के बीच में कम से कम इतनी दूरी होना अनिवार्य है। वहीं, यूनिट के लिए इस माह के अंत तक मशीनें व अन्य सामान आने की उम्मीद जताई जा रही है।
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जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में खून के तत्व निकालने की सुविधा नहीं है। इससे मरीजों को कानपुर या फिर प्रयागराज जाना पड़ता है। कंपोनेंट इकाई की स्थापना के बाद मरीजों को यहां पर ही सुविधा मिल सकेगी। यूनिट स्थापित होने के बाद ब्लड से रेड ब्लड सेल, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स व क्रायोप्रेसीपिटेट यहीं पर मशीनों की मदद से अलग-अलग कर दिए जाएंगे। इससे जिस मरीज को ब्लड के जिस तत्व की जरूरत होगी, उसे वह तत्व यहीं मिल जाएंगे।
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एड्स नियंत्रण सोसाइटी लखनऊ ने कंपोनेंट यूनिट को लगाने के लिए जगह की जानकारी मांगी थी। अस्पताल प्रशासन ने ब्लड बैंक के बगल की जमीन को इकाई के लिए प्रस्तावित कर अगस्त के पहले सप्ताह में रिपोर्ट भेजी थी। इस जमीन को यूनिसेफ ने देखा है। कंपोनेंट इकाई में चार कमरे बनेंगे।
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जिसमें आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स व क्रायोप्रेसीपिटेट को निकालने के लिए मशीनें लगेंगी। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि मशीनों के टेंडर हो चुके हैं, विभाग के एचओडी और सीएमएस के साथ मशीन लगाने के लिए जगह पर विचार किया जा रहा है। जल्द ही यूनिट स्थापित होगी। इससे मरीजों को कानपुर और प्रयागराज नहीं जाना पड़ेगा।
डेढ़ सौ वर्ग मीटर का मानक
ब्लड बैंक व कंपोनेंट इकाई के लिए डेढ़ सौ वर्ग मीटर का मानक है। दोनों के बीच में कम से कम इतनी दूरी होना अनिवार्य है। वहीं, यूनिट के लिए इस माह के अंत तक मशीनें व अन्य सामान आने की उम्मीद जताई जा रही है।