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भक्तों में उल्लास, जयकारों के बीच देवाधिदेव महादेव का जलाभिषेक होगा

Mon, 03 Aug 2015 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर Updated Mon, 03 Aug 2015 12:03 AM IST
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Glee devotees , would Jalabhishek of Mahadev Dewadidev between Jaykaron

सावन के पहले सोमवार को ओम नम: शिवाय और बोल बम के जयकारों के बीच देवाधिदेव महादेव का जलाभिषेक होगा। भोले बाबा को मनाने के लिए श्रद्धालु उत्साहित दिख रहे हैं। वहीं कांवरिया गंगा जल लेने के लिए गंगा घाटों की ओर रवाना हो गए हैं। भगवान शिव का किया गया पूजन और अर्चन विशेष फल देने वाला होगा।

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शहर के सिद्धपीठ तांबेश्वर मंदिर में साज सज्जा का काम पूरा हो चुका है। भक्तों को बेहतर ढंग से बाबा के दर्शन हों इसके लिए पुलिस मुस्तैद रहेगी। महादेव के दर्शन के लिए भोर पहर से शिवालयों के कपाट खोल दिए जाएंगे। सावन का महीना शिव की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस महीने में श्रद्धालु यदि एक लोटा जल और पांच बेल पत्र भगवान भोले शंकर पर अर्पित करते हैं तो वह उन्हें मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। शिव आराधना के इस दिन चारो पहर शिवजी की कृपा बरसती है। जिले के सभी शिवालयों को फूलों की आकर्षक लड़ियों और विल्प पत्रों से सजाया गया है।  जहां भोर पहर से ही भगवान के जलाभिषेक के लिए मंदिरों के कपाट खोले जाएंगे।
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बेल पत्र चढ़ाने से तीन जन्मों के पाप होते नष्ट
आचार्य पंडित कृष्ण दत्त अवस्थी एवं आचार्य पंडित केके पांडेय ने बताया कि महादेव को बेलपत्र अर्पित करने से तीन जन्मों के पाप नष्ट होते हैं। उन्होंने पूजन विधि के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि शास्त्री विधि विधान कहता है कि प्रात:काल जग कर भगवान भोलेनाथ का ध्यान करें। ओम नम: शिवाय का जाप करते हुए जलाभिषेक करें फिर मलया गिरी चंदन का नीलकंठ धारी को लेपन करें। इसके बाद इसके बाद अक्षत (चावल), मंदार पुष्प, धतूर, दूध, दही, घृत, शहद, चंदन, बेल पत्र प्रभु को अर्पित करने से बाबा मनोवांछित फल देते हैं। बताया कि ओम संसार का बीज मंत्र है। ओम का मतलब इस पूरे ब्राह्मांड में जो आवाज गूंजती है वह ओम हैं। शिवाय माने कल्याण करने वाला।
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रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय से अरिष्ट कारक ग्रह शांत होते
सावन के महीने में रुद्राभिषेक करने से भगवान शंकर मनोकामना पूर्ण करते हैं और पद, प्रतिष्ठा और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। इसी प्रकार महामृत्युंजय जाप कराने से अकाल मृत्यु में विजय प्राप्त होती है और मनुष्य की आयु लंबी होती है। इससे रोग आदि शत्रुओं का नाश होता है। अरिष्ट कारक ग्रह शांत होते हैं धन धान्य की वृद्धि होती है। कहा कि कम से कम 11 बार ओम नम: शिवाय मंत्र जाम भक्त को करना चाहिए।

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