{"_id":"658dc0f5a00eee39f103fbee","slug":"gathering-of-outsiders-in-arto-office-fatehpur-news-c-217-1-rdp1002-8990-2023-12-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Fatehpur News: एआरटीओ कार्यालय में बाहरी व्यक्तियों का जमावड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Fatehpur News: एआरटीओ कार्यालय में बाहरी व्यक्तियों का जमावड़ा
Fri, 29 Dec 2023 12:09 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
Updated Fri, 29 Dec 2023 12:09 AM IST
विज्ञापन
फतेहपुर। जिले के एआरटीओ कार्यालय में दिनभर बाहरी व्यक्तियों को जमावड़ा लगा रहता है। लोगों के अधिकतर काम उन्हीं बाहरी व्यक्तियों से होते हैं। वे विभाग के कार्यों का जिम्मा पूरी गारंटी से लेते हैं। वहीं कार्यालय पहुंचे जरूरतमंद भी काम आसान और जल्दी कराने के लिए उनका ही सहारा लेकर अतिरिक्त रुपये का भुगतान करते हैं। दिन भर देखने के बावजूद अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे।
शहर के एआरटीओ कार्यालय में अक्सर दलालों के माध्यम से काम होने की बात सामने आती है। हालांकि खुलकर कोई इस बात का जिक्र नहीं करता, लेकिन वहां के कर्मचारियों की मिलीभगत से लंबे समय से यह सिलसिला चल रहा है। कार्यालय के बगल में मौजूद करीब 12 से अधिक दुकानों के संचालक दिनभर कार्यालय के अंदर घूमते नजर आते हैं। वह कार्यालय में होने वाले सभी कार्यों को आसानी से और जल्दी कराने का जिम्मा लेते हैं।
कार्यालय में पहुंचने वाले अधिकतर लोग भी उन्हीं दुकान संचालकों का सहारा लेते हैं। लोग इसके एवज में उन्हें मोटी रकम देते हैं। यह पूरा खेल कार्यालय कर्मचारियों की मिलीभगत से चल रहा है। रकम का बंदरबांट भी कार्यालय कर्मचारियों के साथ होता है। कुछ व्यक्तियों की शक्लें वहां रोजाना देखने को मिलती हैं। बाहरी व्यक्ति कार्यालय में होने वाले लाइसेंस, फिटेनस, चालान जमा, सीज वाहन को छुड़ाने सहित हर प्रकार के कार्य का जिम्मा लेते हैं। यह सारा खेल कार्यालय के अधिकारियों की नाक के नीचे हो रहा है। इसके बावजूद कोई उस तरफ ध्यान नहीं देता।
विज्ञापन
- 16 - एआरटीओ कार्यालय में पान की पीक से रंगी दीवार।
पान-मसाला की पीक से रंगी हैं कार्यालय की दीवार
कार्यालय के अंदर की दीवार और दरवाजे पान और गुटखा की पीक से रंगे हैं। बाहरी व्यक्ति सहित कार्यालय के कर्मचारी भी पान-मसाला खाकर परिसर में थूंकते हैं। बाहरी व्यक्ति वहां पहुंच कर कार्यालय के कर्मचारियों के साथ घंटों बैठ कर बातें करते हैं। इस बीच दोनों दीवारें पीक से भद्दी और गंदगी करते रहते हैं।
काम कराने का अलग-अलग शुल्क
एआरटीओ कार्यालय के बगल में फोटो काॅपी की दुकान चलाने वाले युवक ने बताया कि लर्निंग लाइसेंस के दौरान वह आवेदकों का टेस्ट पास कराता है। इसके लिए 500 रुपये का शुल्क है। लाइट लाइसेंस के दौरान कार चलाने का टेस्ट पास कराने के लिए करीब ढाई हजार रुपये का शुल्क है। बिना टेस्ट दिए संपूर्ण लाइसेंस बनवाने का शुल्क पांच हजार है। इसके अलावा फिटनेस और चालान जमा करने का काम के हिसाब से अलग-अलग शुल्क है।
फरियादियों ने खोला कार्यालय का काला चिट्ठा
फोटो - 12 - श्रवण कुमार गुप्ता।
- 13 - मो. नूर।
बाहरी व्यक्तियों के जरिये बनवाया लाइसेंस
पटेल नगर निवासी श्रवण कुमार गुप्ता ने बताया कि पिछले दिनों वह कार्यालय में लाइसेंस के काम से गए थे, लेकिन कार्यालय के कर्मचारियों ने लाइसेंस बनवाने में कोई सहयोग नहीं किया। बाद में बाहरी व्यक्ति के माध्यम से फौरन काम करवा दिया गया। इसके लिए अतिरिक्त रुपये भी देने पड़े।
खुद जाने पर नहीं हुआ काम
लालाबाजार निवासी मो. नूर ने बताया कि पिछले दिनों वह एक वाहन का चालान जमा करने एआरटीओ कार्यालय गए। साइट न चलने का बहाना बनाकर उन्हें टाल दिया गया। बाद में बाहरी व्यक्ति के माध्यम से तुरंत चालान जमा हो गए। इसके लिए अतिरिक्त रुपये भी देने पड़े।
कोट...
कार्यालय की भीड़ को ले कर कई बार अभियान चलाया गया। मेरा प्रवर्तन का काम है तो कार्यालय में ध्यान कम रहता है। समस्या के निस्तारण के लिए एआरटीओ प्रशासन से बात करेंगे। जल्द ही फिर से अभियान चलेगा। -लक्ष्मीकांत, एआरटीओ।
विज्ञापन
शहर के एआरटीओ कार्यालय में अक्सर दलालों के माध्यम से काम होने की बात सामने आती है। हालांकि खुलकर कोई इस बात का जिक्र नहीं करता, लेकिन वहां के कर्मचारियों की मिलीभगत से लंबे समय से यह सिलसिला चल रहा है। कार्यालय के बगल में मौजूद करीब 12 से अधिक दुकानों के संचालक दिनभर कार्यालय के अंदर घूमते नजर आते हैं। वह कार्यालय में होने वाले सभी कार्यों को आसानी से और जल्दी कराने का जिम्मा लेते हैं।
विज्ञापन
कार्यालय में पहुंचने वाले अधिकतर लोग भी उन्हीं दुकान संचालकों का सहारा लेते हैं। लोग इसके एवज में उन्हें मोटी रकम देते हैं। यह पूरा खेल कार्यालय कर्मचारियों की मिलीभगत से चल रहा है। रकम का बंदरबांट भी कार्यालय कर्मचारियों के साथ होता है। कुछ व्यक्तियों की शक्लें वहां रोजाना देखने को मिलती हैं। बाहरी व्यक्ति कार्यालय में होने वाले लाइसेंस, फिटेनस, चालान जमा, सीज वाहन को छुड़ाने सहित हर प्रकार के कार्य का जिम्मा लेते हैं। यह सारा खेल कार्यालय के अधिकारियों की नाक के नीचे हो रहा है। इसके बावजूद कोई उस तरफ ध्यान नहीं देता।
विज्ञापन
- 16 - एआरटीओ कार्यालय में पान की पीक से रंगी दीवार।
पान-मसाला की पीक से रंगी हैं कार्यालय की दीवार
कार्यालय के अंदर की दीवार और दरवाजे पान और गुटखा की पीक से रंगे हैं। बाहरी व्यक्ति सहित कार्यालय के कर्मचारी भी पान-मसाला खाकर परिसर में थूंकते हैं। बाहरी व्यक्ति वहां पहुंच कर कार्यालय के कर्मचारियों के साथ घंटों बैठ कर बातें करते हैं। इस बीच दोनों दीवारें पीक से भद्दी और गंदगी करते रहते हैं।
काम कराने का अलग-अलग शुल्क
एआरटीओ कार्यालय के बगल में फोटो काॅपी की दुकान चलाने वाले युवक ने बताया कि लर्निंग लाइसेंस के दौरान वह आवेदकों का टेस्ट पास कराता है। इसके लिए 500 रुपये का शुल्क है। लाइट लाइसेंस के दौरान कार चलाने का टेस्ट पास कराने के लिए करीब ढाई हजार रुपये का शुल्क है। बिना टेस्ट दिए संपूर्ण लाइसेंस बनवाने का शुल्क पांच हजार है। इसके अलावा फिटनेस और चालान जमा करने का काम के हिसाब से अलग-अलग शुल्क है।
फरियादियों ने खोला कार्यालय का काला चिट्ठा
फोटो - 12 - श्रवण कुमार गुप्ता।
- 13 - मो. नूर।
बाहरी व्यक्तियों के जरिये बनवाया लाइसेंस
पटेल नगर निवासी श्रवण कुमार गुप्ता ने बताया कि पिछले दिनों वह कार्यालय में लाइसेंस के काम से गए थे, लेकिन कार्यालय के कर्मचारियों ने लाइसेंस बनवाने में कोई सहयोग नहीं किया। बाद में बाहरी व्यक्ति के माध्यम से फौरन काम करवा दिया गया। इसके लिए अतिरिक्त रुपये भी देने पड़े।
खुद जाने पर नहीं हुआ काम
लालाबाजार निवासी मो. नूर ने बताया कि पिछले दिनों वह एक वाहन का चालान जमा करने एआरटीओ कार्यालय गए। साइट न चलने का बहाना बनाकर उन्हें टाल दिया गया। बाद में बाहरी व्यक्ति के माध्यम से तुरंत चालान जमा हो गए। इसके लिए अतिरिक्त रुपये भी देने पड़े।
कोट...
कार्यालय की भीड़ को ले कर कई बार अभियान चलाया गया। मेरा प्रवर्तन का काम है तो कार्यालय में ध्यान कम रहता है। समस्या के निस्तारण के लिए एआरटीओ प्रशासन से बात करेंगे। जल्द ही फिर से अभियान चलेगा। -लक्ष्मीकांत, एआरटीओ।