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Fatehpur News: गंगा का जलस्तर फिर बढ़ा, कटान तेज
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औंग। मलवां विकासखंड के कटरी क्षेत्र में गंगा नदी का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है। मंगलवार शाम जलस्तर 100.71 मीटर दर्ज किया गया, जबकि सोमवार शाम यह 100.52 मीटर था। 24 घंटे में जलस्तर 19 सेंटीमीटर बढ़ा है। पानी बढ़ने के साथ नदी किनारे कटान भी तेज हो गई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
कटान के चलते पिछली बाढ़ के बाद खेतों में बची धान समेत अन्य फसलें भी नदी की धारा की चपेट में आ रही हैं। सदनहा और बिंदकी फार्म को जोड़ने वाली सड़क अब कटान से करीब 35 मीटर दूर रह गई है। सड़क पर पानी निकासी के लिए बनी पुलिया के ऊपर से भी पानी बहने लगा है, जिससे ग्रामीणों को मार्ग कटने की आशंका सताने लगी है।
बिंदकी फार्म के किसान रामशंकर, महिला किसान मुन्नी समेत अन्य किसानों ने गंगा के बढ़ते जलस्तर और कटान पर चिंता जताई। किसानों ने बताया कि बाढ़ के कारण इस बार समय से तिलहन की बुवाई नहीं हो पा रही है। उनका कहना है कि यदि लाही की बुवाई कर दी जाती और खेतों में इसी तरह पानी भरता तो फसल भी नष्ट हो जाती। कटरी क्षेत्र में पहले आई बाढ़ से सब्जी, धान और फूलों की फसलों को नुकसान पहुंचा था। अब दोबारा बढ़ते जलस्तर और कटान ने बची फसलों पर भी संकट खड़ा कर दिया है। तिलहन की बुवाई प्रभावित होने से किसान सब्जी, धान, फूल और तिलहन समेत कई फसलों से हाथ धोने की स्थिति में पहुंच रहे हैं।
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कटान के चलते पिछली बाढ़ के बाद खेतों में बची धान समेत अन्य फसलें भी नदी की धारा की चपेट में आ रही हैं। सदनहा और बिंदकी फार्म को जोड़ने वाली सड़क अब कटान से करीब 35 मीटर दूर रह गई है। सड़क पर पानी निकासी के लिए बनी पुलिया के ऊपर से भी पानी बहने लगा है, जिससे ग्रामीणों को मार्ग कटने की आशंका सताने लगी है।
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बिंदकी फार्म के किसान रामशंकर, महिला किसान मुन्नी समेत अन्य किसानों ने गंगा के बढ़ते जलस्तर और कटान पर चिंता जताई। किसानों ने बताया कि बाढ़ के कारण इस बार समय से तिलहन की बुवाई नहीं हो पा रही है। उनका कहना है कि यदि लाही की बुवाई कर दी जाती और खेतों में इसी तरह पानी भरता तो फसल भी नष्ट हो जाती। कटरी क्षेत्र में पहले आई बाढ़ से सब्जी, धान और फूलों की फसलों को नुकसान पहुंचा था। अब दोबारा बढ़ते जलस्तर और कटान ने बची फसलों पर भी संकट खड़ा कर दिया है। तिलहन की बुवाई प्रभावित होने से किसान सब्जी, धान, फूल और तिलहन समेत कई फसलों से हाथ धोने की स्थिति में पहुंच रहे हैं।
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