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धर्मान्तरण मामले में शिक्षिका के घर पहुंची केंद्रीय मंत्री, सच जाना
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फतेहपुर। केंद्रीय मंत्री शनिवार को नुरुलहुदा इंग्लिश मीडियम स्कूल प्रबंधक और उसके बेटे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाली शिक्षिका कल्पना सिंह के घर पहुंचकर धर्मांतरण प्रकरण की जानकारी ली। केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि यहां धर्मांतरण कराने का काम बहुत दिनों से चल रहा था। विद्यालयों में किसी भी
मजहबी परंपरा को पढ़ाने का अधिकार नहीं है। विरोध करने पर शिक्षिका को प्रताड़ित करके निकाला गया और वेतन नहीं दिया गया। साफ है कि विद्यालय के माध्यम से एक धर्म विशेष की शिक्षा का प्रचार-प्रसार कर आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है। इस बाबत उन्होंने तत्कालीन डीएम व एसपी को इस बारे में जानकारी दी थी। विद्यालय पर निगाह रखने को कहा था ,लेकिन प्रशासन ने मामले को हल्के में लिया। वह अपने स्तर से भी मामले को केंद्र सरकार के संज्ञान में लाएंगी। इस तरह के विद्यालय को बंद होने चाहिए।
फतेहपुर। नुरुलहुदा स्कूल में प्रयागराज से भी मौलाना का आना-जाना रहा है। विद्यालय के प्रबंधक मोहम्मद उमर शरीफ ने बताया कि विद्यालय में शिक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए मौलाना और धर्मगुरु आते जाते हैं। शहर के कुछ स्कूलों के बच्चे भी उनके आने में शामिल होते थे। धर्मांतरण का आरोपी मोहम्मद उमर करीब 12 सालों से
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विद्यालय आता जाता रहा है। इधर उमर तीन साल से विद्यालय नहीं आए। शिक्षिका ने स्कूल प्रबंधन पर गलत आरोप लगाए हैं। मोहम्मद उमर विद्यालय में किसी प्रकार के धार्मिक कार्यक्रम नहीं करते थे। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की ओर से स्कूल की जांच कराई जा रही है। जिसमें वह प्रशासन का पूरा सहयोग कर रहे हैं।
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मजहबी परंपरा को पढ़ाने का अधिकार नहीं है। विरोध करने पर शिक्षिका को प्रताड़ित करके निकाला गया और वेतन नहीं दिया गया। साफ है कि विद्यालय के माध्यम से एक धर्म विशेष की शिक्षा का प्रचार-प्रसार कर आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है। इस बाबत उन्होंने तत्कालीन डीएम व एसपी को इस बारे में जानकारी दी थी। विद्यालय पर निगाह रखने को कहा था ,लेकिन प्रशासन ने मामले को हल्के में लिया। वह अपने स्तर से भी मामले को केंद्र सरकार के संज्ञान में लाएंगी। इस तरह के विद्यालय को बंद होने चाहिए।
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फतेहपुर। नुरुलहुदा स्कूल में प्रयागराज से भी मौलाना का आना-जाना रहा है। विद्यालय के प्रबंधक मोहम्मद उमर शरीफ ने बताया कि विद्यालय में शिक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए मौलाना और धर्मगुरु आते जाते हैं। शहर के कुछ स्कूलों के बच्चे भी उनके आने में शामिल होते थे। धर्मांतरण का आरोपी मोहम्मद उमर करीब 12 सालों से
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विद्यालय आता जाता रहा है। इधर उमर तीन साल से विद्यालय नहीं आए। शिक्षिका ने स्कूल प्रबंधन पर गलत आरोप लगाए हैं। मोहम्मद उमर विद्यालय में किसी प्रकार के धार्मिक कार्यक्रम नहीं करते थे। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की ओर से स्कूल की जांच कराई जा रही है। जिसमें वह प्रशासन का पूरा सहयोग कर रहे हैं।