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दूषित पानी पीकर दिव्यांग हो रहे मवई क ग्रामीण
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मवई गांव में दूषित पानी पीने से बिकलांग हुई महिलाएं। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
हुसैनगंज। विधानसभा क्षेत्र हुसैनगंज के कई गांवों की आबादी दूषित पेयजल के कारण परेशान है। पानी में फ्लोराइड की अधिकता लोगों को दिव्यांग बना रही है। यह गांव खासकर गंगा तटवर्ती इलाके में आते हैं।
जल निगम की रिपोर्ट के मुताबिक इस क्षेत्र विशेष के गांवों का पानी पीने योग्य नहीं है। मगर ग्रामीण आबादी के पास इसके सिवा कोई अन्य विकल्प भी नहीं है।
हालांकि समस्या को दूर करने के लिए जल जीवन मिशन परियोजना के तहत गहरे सबमर्सिबल ट्यूबवेल लगाकर नलों के जरिए घर-घर नए पानी की सप्लाई का प्रयास हुआ है। मगर यह प्रयास नाकाफी साबित हो रहा है।
भिटौरा ब्लाक में करीब आठ हजार आबादी वाली ग्राम पंचायत मवई है। जहां इंडिया मार्का हैंडपंपों से पीने के लिए लाल व काला पानी निकलता है। पीने में यह पानी खारा (नमकीन) होता है।
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ग्रामीण धीरे-धीरे ही यह जहर पीने को मजबूर हैं। दूषित पानी का असर सबसे ज्यादा मवई ग्राम पंचायत के मजरा जानकी का पुरवा में है। यहां के लोग दिव्यांगता का शिकार हो रहे हैं। यहां जन्म से ही किसी बच्चे के पैर टेढ़े हैं, तो किसी की कमर।
प्रधान कमलेश ने बताया कि हैंडपंप से पानी निकालने के थोड़ी देर बाद ही लाल हो जाता है। गांव में पानी की टंकी बनवाने के लिए कई बार अधिकारियों से कहा जा चुका है।
ग्रामीण पिंटू सिंह ने बताया कि गांव के कुछ लोग पड़ोसी गांव से पानी भर कर लाते हैं, लेकिन गांव के बाहर से जो पानी लाया जाता है, उसकी मात्रा सीमित होती है।
गांव के हैंडपंपों का पानी भी पीना पड़ता है। वृद्धा अरुणा ने बताया कि दूषित पानी पीने से मेरी कमर झुक गई है। शरीर के अंगों में दर्द की समस्या लगातार बनी रहती है। मवई निवासी राम बहादुर ने बताया कि दूषित पानी पीने से पैर टेढ़ा हो गया है।
दूषित पानी से दिव्यांग हुए लोग
राजबली, महेंद्र कुमार, रामसखी, रामदुलारी, रामसखी, जगदीश, राजकुमारी, महविरिया, संपत देवी, धनपत, चंद्रकली, रामरती, सुमेरकली
अभी कुछ महीना पहले ब्लाक में तैनाती हुई है। दूषित पानी होने की सूचना नहीं है। ब्लाक की टीम को भेज कर पता लगाया जाएगा। अगर, गांव का दूषित पानी है, तो पानी टंकी का प्रस्ताव तैयार कराया जाएगा। ताकि लोगों को दूषित पानी से राहत मिले। - रामजी मिश्र, बीडीओ भिटौरा
जल निगम के सर्वे में जिन गांवों के पानी में फ्लोराइड की अधिकता होने की रिपोर्ट प्राप्त हुई थी। उसे शासन भेजा गया है। गांव में पेयजल के नए संसाधन विकसित करने होंगे। पेयजल योजनाओं के प्रस्ताव शासन में लंबित है। - सत्य प्रकाश, सीडीओ।
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जल निगम की रिपोर्ट के मुताबिक इस क्षेत्र विशेष के गांवों का पानी पीने योग्य नहीं है। मगर ग्रामीण आबादी के पास इसके सिवा कोई अन्य विकल्प भी नहीं है।
हालांकि समस्या को दूर करने के लिए जल जीवन मिशन परियोजना के तहत गहरे सबमर्सिबल ट्यूबवेल लगाकर नलों के जरिए घर-घर नए पानी की सप्लाई का प्रयास हुआ है। मगर यह प्रयास नाकाफी साबित हो रहा है।
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भिटौरा ब्लाक में करीब आठ हजार आबादी वाली ग्राम पंचायत मवई है। जहां इंडिया मार्का हैंडपंपों से पीने के लिए लाल व काला पानी निकलता है। पीने में यह पानी खारा (नमकीन) होता है।
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ग्रामीण धीरे-धीरे ही यह जहर पीने को मजबूर हैं। दूषित पानी का असर सबसे ज्यादा मवई ग्राम पंचायत के मजरा जानकी का पुरवा में है। यहां के लोग दिव्यांगता का शिकार हो रहे हैं। यहां जन्म से ही किसी बच्चे के पैर टेढ़े हैं, तो किसी की कमर।
प्रधान कमलेश ने बताया कि हैंडपंप से पानी निकालने के थोड़ी देर बाद ही लाल हो जाता है। गांव में पानी की टंकी बनवाने के लिए कई बार अधिकारियों से कहा जा चुका है।
ग्रामीण पिंटू सिंह ने बताया कि गांव के कुछ लोग पड़ोसी गांव से पानी भर कर लाते हैं, लेकिन गांव के बाहर से जो पानी लाया जाता है, उसकी मात्रा सीमित होती है।
गांव के हैंडपंपों का पानी भी पीना पड़ता है। वृद्धा अरुणा ने बताया कि दूषित पानी पीने से मेरी कमर झुक गई है। शरीर के अंगों में दर्द की समस्या लगातार बनी रहती है। मवई निवासी राम बहादुर ने बताया कि दूषित पानी पीने से पैर टेढ़ा हो गया है।
दूषित पानी से दिव्यांग हुए लोग
राजबली, महेंद्र कुमार, रामसखी, रामदुलारी, रामसखी, जगदीश, राजकुमारी, महविरिया, संपत देवी, धनपत, चंद्रकली, रामरती, सुमेरकली
अभी कुछ महीना पहले ब्लाक में तैनाती हुई है। दूषित पानी होने की सूचना नहीं है। ब्लाक की टीम को भेज कर पता लगाया जाएगा। अगर, गांव का दूषित पानी है, तो पानी टंकी का प्रस्ताव तैयार कराया जाएगा। ताकि लोगों को दूषित पानी से राहत मिले। - रामजी मिश्र, बीडीओ भिटौरा
जल निगम के सर्वे में जिन गांवों के पानी में फ्लोराइड की अधिकता होने की रिपोर्ट प्राप्त हुई थी। उसे शासन भेजा गया है। गांव में पेयजल के नए संसाधन विकसित करने होंगे। पेयजल योजनाओं के प्रस्ताव शासन में लंबित है। - सत्य प्रकाश, सीडीओ।

मवई गांव का बिकलांग। संवाद- फोटो : FATEHPUR