{"_id":"61d5e972b3f1e30af75a762a","slug":"fathepur-news-token-full-in-three-minutes-how-paddy-is-sold-fatehpur-news-knp673601597","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों को नहीं मिल रहे टोकन, तीन मिनट में ही हो रही फुल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों को नहीं मिल रहे टोकन, तीन मिनट में ही हो रही फुल
विज्ञापन
धान बेचने के लिए टोकन निकालने की साइबर कैफे में लगी भीड। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। क्रय केंद्रों में धान बेचने के लिए किसानों को समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। हालात ये है कि इस ठंड में धान बेचने के लिए टोकन पाने की चाहत लेकर साइबर कैफे पहुंचने वाले किसानों को पैसे देने के बाद भी टोकन नहीं मिल पा रहा है। क्योंकि सुबह साइट खुलते ही तीन मिनट में टोकन फुल हो जाते हैं।
भले ही सरकार ने किसानों का धान खरीदने के लिए नियम कानून बना रखे हैं। इनके बाद भी उन्हें समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। पहले केंद्र प्रभारियों के हड़ताल की वजह से दो दिन धान की खरीद ठप रही।
अब जब खरीद शुरू भी हुई है तो किसानों को टोकन नहीं मिल पा रहा है। वेबसाइट खुलने के मात्र तीन मिनट बाद ही टोकन खत्म हो जा रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत छोटे किसानों को है।
विज्ञापन
उनको ऑनलाइन की जानकारी भी नहीं है। ऐसे में टोकन के लिए वे साइबर कैफे पर निर्भर हैं। कड़ाके की ठंड और कोहरे में भोर से ही साइबर कैफे पर पहुंच जा रहे हैं।
सुबह 10 बजे जैसे ही साइट खुल रही है, वैसे ही टोकन खत्म हो जा रहा है और वे निराश होकर वापस चले आ रहे हैं। यह रोजाना की स्थिति है। किसानों को समझ नहीं आ रहा कि वह क्या करें।
क्रय केंद्र में धान बेचने के लिए किसानों को ऑनलाइन पंजीकरण करना होता है। इसमें सिर्फ दो दिन के लिए टोकन जारी किए जाते हैं। एक क्रय केंद्र में 350 क्विंटल तौल कराने की ही क्षमता है।
इतने के टोकन निकलते ही वेबसाडट काम करना बंद कर देती है। जिन किसानों को धान बेचना है, वह सुबह 10 बजे से पहले ही मोबाइल और साइबर कैफे से टोकन निकालने के लिए वेबसाइड ऑन करके बैठ जाते हैं। दो-तीन मिनट में ही साढ़े तीन सौ क्विंटल के टोकन फुल हो जाते हैं।
असोथर के किसान नीरज सिंह को क्रय केंद्र में धान बेचना है। टोकन के लिए वह परेशान हैं। नीरज सिंह ने बताया कि मोबाइल में ओटीपी भी नहीं आता है और क्रय केंद्र में खरीद के लक्ष्य के टोकन भी जनरेट हो जाते हैं। यह समझ नहीं आता है कि टोकन कैसे जारी कर दिए जाते हैं। ऑनलाइन टोकन निकालने में हो रही दिक्कत को मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे।
किसान रामसिंह पिछले 10 दिनों से ऑनलाइन टोकन के लिए परेशान हैं। वह टोकन के लिए गांव भारतपुर से सुबह थरियांव आ जाते हैं। बुधवार सुबह 10 बजे से जैसे ही साइट खुली और तीन मिनट के अंदर टोकन खत्म होने का संकेत आने लगा। जबकि वेबसाइट में पंजीकरण नंबर फीड करने के बाद ओटीपी ही नहीं आई। 124 क्विंटल धान है इसको कैसे बेचे, समझ नहीं आ रहा है।
टोकन व्यवस्था से परेशान किसानों ने डिप्टी आरएमओ को घेरा
असोथर। हाट शाखा क्रय केंद्र का निरीक्षण करने पहुंचे जिला खाद्य विपणन अधिकारी अविनाश झा को किसानों ने घेर लिया। किसानों ने कहा कि टोकन व्यवस्था हटाकर धान की तौल कराई जाए।
किसान पप्पू सिंह, श्रीसिंह, जयसिंह, रामबाबू, दिनेश, दीपू, मोनू ने कहा कि ऑनलाइन टोकन में होने वाली दिक्कत को हल कराया जाए। इस पर जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने कहा कि टोकन में होने वाली दिक्कत हल कराने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा।
जिन किसानों का धान क्रय केंद्र में पड़ा है, वह तौल करा लें। जब टोकन जारी हो जाएगा, तो उसे खरीद में चढ़ा दिया जाएगा। ताकि बारिश से भीगकर धान खराब न हो।
विज्ञापन
भले ही सरकार ने किसानों का धान खरीदने के लिए नियम कानून बना रखे हैं। इनके बाद भी उन्हें समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। पहले केंद्र प्रभारियों के हड़ताल की वजह से दो दिन धान की खरीद ठप रही।
विज्ञापन
अब जब खरीद शुरू भी हुई है तो किसानों को टोकन नहीं मिल पा रहा है। वेबसाइट खुलने के मात्र तीन मिनट बाद ही टोकन खत्म हो जा रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत छोटे किसानों को है।
विज्ञापन
उनको ऑनलाइन की जानकारी भी नहीं है। ऐसे में टोकन के लिए वे साइबर कैफे पर निर्भर हैं। कड़ाके की ठंड और कोहरे में भोर से ही साइबर कैफे पर पहुंच जा रहे हैं।
सुबह 10 बजे जैसे ही साइट खुल रही है, वैसे ही टोकन खत्म हो जा रहा है और वे निराश होकर वापस चले आ रहे हैं। यह रोजाना की स्थिति है। किसानों को समझ नहीं आ रहा कि वह क्या करें।
क्रय केंद्र में धान बेचने के लिए किसानों को ऑनलाइन पंजीकरण करना होता है। इसमें सिर्फ दो दिन के लिए टोकन जारी किए जाते हैं। एक क्रय केंद्र में 350 क्विंटल तौल कराने की ही क्षमता है।
इतने के टोकन निकलते ही वेबसाडट काम करना बंद कर देती है। जिन किसानों को धान बेचना है, वह सुबह 10 बजे से पहले ही मोबाइल और साइबर कैफे से टोकन निकालने के लिए वेबसाइड ऑन करके बैठ जाते हैं। दो-तीन मिनट में ही साढ़े तीन सौ क्विंटल के टोकन फुल हो जाते हैं।
असोथर के किसान नीरज सिंह को क्रय केंद्र में धान बेचना है। टोकन के लिए वह परेशान हैं। नीरज सिंह ने बताया कि मोबाइल में ओटीपी भी नहीं आता है और क्रय केंद्र में खरीद के लक्ष्य के टोकन भी जनरेट हो जाते हैं। यह समझ नहीं आता है कि टोकन कैसे जारी कर दिए जाते हैं। ऑनलाइन टोकन निकालने में हो रही दिक्कत को मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे।
किसान रामसिंह पिछले 10 दिनों से ऑनलाइन टोकन के लिए परेशान हैं। वह टोकन के लिए गांव भारतपुर से सुबह थरियांव आ जाते हैं। बुधवार सुबह 10 बजे से जैसे ही साइट खुली और तीन मिनट के अंदर टोकन खत्म होने का संकेत आने लगा। जबकि वेबसाइट में पंजीकरण नंबर फीड करने के बाद ओटीपी ही नहीं आई। 124 क्विंटल धान है इसको कैसे बेचे, समझ नहीं आ रहा है।
टोकन व्यवस्था से परेशान किसानों ने डिप्टी आरएमओ को घेरा
असोथर। हाट शाखा क्रय केंद्र का निरीक्षण करने पहुंचे जिला खाद्य विपणन अधिकारी अविनाश झा को किसानों ने घेर लिया। किसानों ने कहा कि टोकन व्यवस्था हटाकर धान की तौल कराई जाए।
किसान पप्पू सिंह, श्रीसिंह, जयसिंह, रामबाबू, दिनेश, दीपू, मोनू ने कहा कि ऑनलाइन टोकन में होने वाली दिक्कत को हल कराया जाए। इस पर जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने कहा कि टोकन में होने वाली दिक्कत हल कराने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा।
जिन किसानों का धान क्रय केंद्र में पड़ा है, वह तौल करा लें। जब टोकन जारी हो जाएगा, तो उसे खरीद में चढ़ा दिया जाएगा। ताकि बारिश से भीगकर धान खराब न हो।

असोथर क्रय केंद्र में डिप्टी आरएमओ से बात करते किसान। संवाद- फोटो : FATEHPUR