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यमुना तीरे बेजुबानों की सेवा से भर रहीं पुण्य की पोटली
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घर के बाहर कुत्ते के बच्चों को दुलारती रामदुलारी। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
किशनपुर। 52 साल पहले घर के सामने साइकिल की चपेट में आने सेे दो नन्हें कुत्ते जख्मी हुए थे। जिन्हें कोई छू भी नहीं रहा था। घर के सामने यह हालत देख दिल पसीज गया।
घर के अंदर से तेल लेकर आईं और घाव को साफ कर उस पर लगाया। उन्हें रोटी भी खिलाई। चंद दिनों की सेवा में कुत्ते ठीक हो गए। दिल को सुकून मिला तो इस सेवा को संकल्प में बदलकर पुण्य की पोटली भरनी शुरू कर दी। यह सेवा अब तक जारी है। हम बात कर रहे हैं किशनपुर के वार्ड नंबर नौ की रहने वाली 82 वर्षीय रामदुलारी की।
रामदुलारी पत्नी हरिश्चंद्र का यह जज्बा देख लोग आज भी हैरान हो जाते हैं। पांच दशक से अधिक का समय बीत चुका है, उनकी दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं आया है।
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रोजाना घर से निकलने से पहले वह मवेशियों के लिए दस रोटी बनाती हैं और बोतल में तेल लेकर बाहर आती हैं। जहां कहीं जख्मी या परेशान मवेशी मिला तो उसे रोटी खिलाती हैं।
इसके बाद उसके जख्म पर तेल (मशीनों से निकला जला तेल) लगाकर उसे चंगा करना शुरू कर देती हैं। मवेशियों में गाय, कुत्ता, बिल्ली उनकी सेवा के प्रमुख बिंदु हैं। सेवा के दौरान किसी मवेशी की मौत हो गई तो वह दिन रामदुलारी के लिए बेहद ही कष्टदायी होता है।
संयुक्त परिवार में रहती हैं रामदुलारी
रामदुलारी संयुक्त परिवार में रहती हैं। उनके चार पुत्र हैं। इसमें अशोक सिंह, संतोष सिंह, छत्रपाल सिंह व रामलोचन सिंह है। सभी विवाहित हैं। रामलोचन सउदी में रहते हैं, जबकि अन्य भाई मुंबई में रहते हैं।
प्रकृति प्रेमी का सम्मान भी मिला
रामदुलारी की सेवा का यह संकल्प साल भर पहले नगर पंचायत की नजर में आया। तो उन्हें नगर पंचायत बुलाकर प्रकृति प्रेमी सम्मान से नवाजा गया।
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घर के अंदर से तेल लेकर आईं और घाव को साफ कर उस पर लगाया। उन्हें रोटी भी खिलाई। चंद दिनों की सेवा में कुत्ते ठीक हो गए। दिल को सुकून मिला तो इस सेवा को संकल्प में बदलकर पुण्य की पोटली भरनी शुरू कर दी। यह सेवा अब तक जारी है। हम बात कर रहे हैं किशनपुर के वार्ड नंबर नौ की रहने वाली 82 वर्षीय रामदुलारी की।
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रामदुलारी पत्नी हरिश्चंद्र का यह जज्बा देख लोग आज भी हैरान हो जाते हैं। पांच दशक से अधिक का समय बीत चुका है, उनकी दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं आया है।
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रोजाना घर से निकलने से पहले वह मवेशियों के लिए दस रोटी बनाती हैं और बोतल में तेल लेकर बाहर आती हैं। जहां कहीं जख्मी या परेशान मवेशी मिला तो उसे रोटी खिलाती हैं।
इसके बाद उसके जख्म पर तेल (मशीनों से निकला जला तेल) लगाकर उसे चंगा करना शुरू कर देती हैं। मवेशियों में गाय, कुत्ता, बिल्ली उनकी सेवा के प्रमुख बिंदु हैं। सेवा के दौरान किसी मवेशी की मौत हो गई तो वह दिन रामदुलारी के लिए बेहद ही कष्टदायी होता है।
संयुक्त परिवार में रहती हैं रामदुलारी
रामदुलारी संयुक्त परिवार में रहती हैं। उनके चार पुत्र हैं। इसमें अशोक सिंह, संतोष सिंह, छत्रपाल सिंह व रामलोचन सिंह है। सभी विवाहित हैं। रामलोचन सउदी में रहते हैं, जबकि अन्य भाई मुंबई में रहते हैं।
प्रकृति प्रेमी का सम्मान भी मिला
रामदुलारी की सेवा का यह संकल्प साल भर पहले नगर पंचायत की नजर में आया। तो उन्हें नगर पंचायत बुलाकर प्रकृति प्रेमी सम्मान से नवाजा गया।