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हर महीने लाखों के राजस्व पर डाका
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बहुआ टैंपो स्टैंड में चालक से वसूली करता मुनीम। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। आश्चर्य की बात है कि जिस मद से निकाय हर माह लाखों रुपये का राजस्व जुटा सकते हैं, उस ओर आज तक ध्यान नहीं दिया गया।
निकाय क्षेत्रों में अवैध रूप से टेंपो स्टैंड का संचालन कर चंद लोगों ने हर साल करीब दो करोड़ रुपये की चपत लगा दी। सेटिंग इतनी तगड़ी रही कि नेता क्या, अफसरों तक ने इनके खिलाफ आवाज नहीं उठा सके। यही कारण भी रहा कि इनकी अवैध वसूली धड़ल्ले से जारी है।
जिले में सदर और बिंदकी दो नगर पालिकाएं और छह नगर पंचायतें खागा, किशनपुर, हथगाम, बहुआ, जहानाबाद व असोथर हैं। असोथर नगर पंचायत का गठन कुछ माह पूर्व ही हुआ है।
बाकी निकाय सालों पुराने हैं। आंकड़ों की बात की जाए तो सदर और बिंदकी नगर पालिका क्षेत्रों से करीब 600 टेंपो संचालित होते हैं। जबकि ई-रिक्शा की संख्या अलग है।
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इनके अलावा, असोथर छोड़कर बाकी पांच नगर पंचायतों में करीब साढ़े पांच सौ टेंपो रोजाना सवारी ढोते हैं। यानी इन निकाय क्षेत्रो में करीब 1150 टेंपुओं का संचालन हो रहा है।
अलग-अलग मार्गों पर संचालित टेंपो का स्टैंड भी अलग-अलग है। हर स्टैंड पर इन टेंपो के चालकों से एक चक्कर का औसतन 20 रुपये वसूली जा रहा है। एक टेंपो अगर दो चक्कर लगाता है तो उन्हें स्टैंड संचालक को उन्हें 40 रुपये देने पड़ते हैं।
यानी 1150 टेंपुओं से रोजाना स्टैंड संचालक करीब 46 हजार रुपये वसूलते हैं। ई-रिक्शा से अगर चार हजार रुपये की भी रोजाना वसूली होती है तो यह रकम बढ़कर करीब 50 हजार हो जाती है।
महीने की बात करें तो यब वसूली 15 लाख होती है और साल में एक करोड़ 80 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। ई-रिक्शा को भी शामिल कर लें तो यह रकम करीब दो करोड़ रुपये हो जाती है।
अब सवाल यह उठता है कि जब यह रकम निकायों के हिस्से में जा सकती है तो इस ओर आज तक इन्होंने ध्यान क्यों नहीं दिया। जो निकाय आय बढ़ाने के लिए हर बोर्ड बैठक में नए रास्ते खोजते हैं उन्हें यह आसान तरीका क्यों नहीं दिखा।
अपनी है सड़क, जहां पाओ भरो सवारी
टेंपो स्टैंड संचालकों की सेटिंग इतनी तगड़ी है कि चालक बीच सड़क और चौराहों पर दिन भर धमाचौकड़ी किया करते हैं लेकिन पुलिस इनसे कुछ नहीं बोलती। इन टेंपो के कारण अक्सर जाम भी लगता है। यात्री परेशान होते हैं लेकिन टेंपो चालकों पर इसका कोई असर नहीं होता। सड़क पर आड़े तिरछे खड़े टेंपो आसानी से दिख भी जाएंगे।
मानक से ज्यादा सवारी ढो रहे टेंपो
शहर से लेकर कस्बों तक में टेंपो चालक मानक से ज्यादा सवारियां ढो रहे हैं लेकिन इन्हें न तो नियमों की परवाह है और न ही संक्रमण फैलने का डर। हालत यह है कि ज्यादातर टेंपो में पीछे पटरा लगाकर सवारियां बैठाई जा रही हैं। आठ सवारियों का मानक है लेकिन 14 सवारियां तक बैठाई जा रही हैं। कई तो लटक कर सफर करते हैं। एआरटीओ विभाग भी इस ओर आंखें मूंदे है।
बिंदकी एसडीएम ने टेंपो संचालकों को जारी की नोटिसें
अवैध ढंग से टेंपो स्टैंड का संचालन करने वालों को बिंदकी एसडीएम अवधेश कुमार निगम ने नोटिसें जारी की हैं। सात दिनों में जवाब देने को कहा गया है। अगर तय समय पर संचालकों की ओर से जवाब नहीं दिया जाता है तो एसडीएम की ओर से कार्रवाई शुरू की जाएगी।
बेहद गंभीर मामला है। बिना निकाय की स्वीकृति के टेंपो स्टैंडों का संचालन कैसे हो रहा है इस पर संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा। राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। जल्द सख्त कदम उठाया जाएगा। - अपूर्वा दुबे, जिलाधिकारी।
शांति नगर निवासी संदीप सिंह ने कहा कि टेंपो और ई-रिक्शा के कारण सड़क पर चलना दूभर है। रोजाना जाम में फंसना पड़ता है। सड़क पर चालक मनमर्जी चलाते हैं और पुलिस तक इन्हें नहीं रोकती। जहां चाहते हैं वहां गाड़ी खड़ी करके यह सवारियां भरने लगते हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई की सख्त जरूरत है।
आवास विकास कालोनी निवासी चंद्रभान यादव ने कहा कि अधिकारियों की सेटिंग से ही टेंपो स्टैंड संचालक हर महीने लाखों रुपये की चपत पालिका को लगा रहे हैं। जो रकम पालिका को मिलनी चाहिए उसे यह लोग हड़प रहे हैं। इनके खिलाफ कोई आवाज भी नहीं उठाता। जाम का बड़ा कारण यह टेंपो ही हैं।
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निकाय क्षेत्रों में अवैध रूप से टेंपो स्टैंड का संचालन कर चंद लोगों ने हर साल करीब दो करोड़ रुपये की चपत लगा दी। सेटिंग इतनी तगड़ी रही कि नेता क्या, अफसरों तक ने इनके खिलाफ आवाज नहीं उठा सके। यही कारण भी रहा कि इनकी अवैध वसूली धड़ल्ले से जारी है।
जिले में सदर और बिंदकी दो नगर पालिकाएं और छह नगर पंचायतें खागा, किशनपुर, हथगाम, बहुआ, जहानाबाद व असोथर हैं। असोथर नगर पंचायत का गठन कुछ माह पूर्व ही हुआ है।
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बाकी निकाय सालों पुराने हैं। आंकड़ों की बात की जाए तो सदर और बिंदकी नगर पालिका क्षेत्रों से करीब 600 टेंपो संचालित होते हैं। जबकि ई-रिक्शा की संख्या अलग है।
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इनके अलावा, असोथर छोड़कर बाकी पांच नगर पंचायतों में करीब साढ़े पांच सौ टेंपो रोजाना सवारी ढोते हैं। यानी इन निकाय क्षेत्रो में करीब 1150 टेंपुओं का संचालन हो रहा है।
अलग-अलग मार्गों पर संचालित टेंपो का स्टैंड भी अलग-अलग है। हर स्टैंड पर इन टेंपो के चालकों से एक चक्कर का औसतन 20 रुपये वसूली जा रहा है। एक टेंपो अगर दो चक्कर लगाता है तो उन्हें स्टैंड संचालक को उन्हें 40 रुपये देने पड़ते हैं।
यानी 1150 टेंपुओं से रोजाना स्टैंड संचालक करीब 46 हजार रुपये वसूलते हैं। ई-रिक्शा से अगर चार हजार रुपये की भी रोजाना वसूली होती है तो यह रकम बढ़कर करीब 50 हजार हो जाती है।
महीने की बात करें तो यब वसूली 15 लाख होती है और साल में एक करोड़ 80 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। ई-रिक्शा को भी शामिल कर लें तो यह रकम करीब दो करोड़ रुपये हो जाती है।
अब सवाल यह उठता है कि जब यह रकम निकायों के हिस्से में जा सकती है तो इस ओर आज तक इन्होंने ध्यान क्यों नहीं दिया। जो निकाय आय बढ़ाने के लिए हर बोर्ड बैठक में नए रास्ते खोजते हैं उन्हें यह आसान तरीका क्यों नहीं दिखा।
अपनी है सड़क, जहां पाओ भरो सवारी
टेंपो स्टैंड संचालकों की सेटिंग इतनी तगड़ी है कि चालक बीच सड़क और चौराहों पर दिन भर धमाचौकड़ी किया करते हैं लेकिन पुलिस इनसे कुछ नहीं बोलती। इन टेंपो के कारण अक्सर जाम भी लगता है। यात्री परेशान होते हैं लेकिन टेंपो चालकों पर इसका कोई असर नहीं होता। सड़क पर आड़े तिरछे खड़े टेंपो आसानी से दिख भी जाएंगे।
मानक से ज्यादा सवारी ढो रहे टेंपो
शहर से लेकर कस्बों तक में टेंपो चालक मानक से ज्यादा सवारियां ढो रहे हैं लेकिन इन्हें न तो नियमों की परवाह है और न ही संक्रमण फैलने का डर। हालत यह है कि ज्यादातर टेंपो में पीछे पटरा लगाकर सवारियां बैठाई जा रही हैं। आठ सवारियों का मानक है लेकिन 14 सवारियां तक बैठाई जा रही हैं। कई तो लटक कर सफर करते हैं। एआरटीओ विभाग भी इस ओर आंखें मूंदे है।
बिंदकी एसडीएम ने टेंपो संचालकों को जारी की नोटिसें
अवैध ढंग से टेंपो स्टैंड का संचालन करने वालों को बिंदकी एसडीएम अवधेश कुमार निगम ने नोटिसें जारी की हैं। सात दिनों में जवाब देने को कहा गया है। अगर तय समय पर संचालकों की ओर से जवाब नहीं दिया जाता है तो एसडीएम की ओर से कार्रवाई शुरू की जाएगी।
बेहद गंभीर मामला है। बिना निकाय की स्वीकृति के टेंपो स्टैंडों का संचालन कैसे हो रहा है इस पर संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा। राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। जल्द सख्त कदम उठाया जाएगा। - अपूर्वा दुबे, जिलाधिकारी।
शांति नगर निवासी संदीप सिंह ने कहा कि टेंपो और ई-रिक्शा के कारण सड़क पर चलना दूभर है। रोजाना जाम में फंसना पड़ता है। सड़क पर चालक मनमर्जी चलाते हैं और पुलिस तक इन्हें नहीं रोकती। जहां चाहते हैं वहां गाड़ी खड़ी करके यह सवारियां भरने लगते हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई की सख्त जरूरत है।
आवास विकास कालोनी निवासी चंद्रभान यादव ने कहा कि अधिकारियों की सेटिंग से ही टेंपो स्टैंड संचालक हर महीने लाखों रुपये की चपत पालिका को लगा रहे हैं। जो रकम पालिका को मिलनी चाहिए उसे यह लोग हड़प रहे हैं। इनके खिलाफ कोई आवाज भी नहीं उठाता। जाम का बड़ा कारण यह टेंपो ही हैं।