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मोबाइल एप खोलेगा धान खरीद का फर्जीवाड़ा
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फतेहपुर। धान खरीद में पारदर्शिता लाने के लिए डीएम अपूर्वा दुबे ने स्थानीय स्तर पर मोबाइल एप लागू कराया है। जिसमें पंजीकृत किसानों का डाटा लेखपाल फीड करेंगे।
डाटा फीड होते ही जिस खेत में धान की फसल रही है, उसका सत्यापन हो जाएगा। जिस खेत में धान नहीं लगा है, वह एप से ही रिजेक्ट हो जाएगा। वहीं ग्राम समाज का नंबर अपने पंजीयन में दिखाकर धान बेचने वालों की भी पोल खुलेगी। इसमें लेखपालों को लगाया गया है।
क्रय केंद्र में धान बेचने के लिए किसानों को अपनी भूमि का पंजीयन कराना पड़ता है। एक हेक्टेयर में करीब 54 क्विंटल धान खरीदने का मानक है।
ऐसे में बहुत से किसान और बिचौलिया अपने आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और बैंक पासबुक लगाकर पंजीयन करा लेते हैं। भूमि का क्षेत्रफल फर्जी तरीके से दर्ज कर देते हैं।
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इस फर्जीवाड़े को रोकने के लिए डीएम अपूर्वा दुबे ने मोबाइल एप लागू कराया है। जिसमें लेखपाल को खतौनी का नाम सत्यापन करने के साथ ही खेत की फोटो खींच कर फीड करनी होगी।
अगर खेत में दूसरी फसल किसानों ने बोई है और धान का पंजीयन कराया है, तो फोटो अपलोड करते ही सत्यापन में धान तौल कराने की मात्रा कट जाएगी। वहीं अगर कोई किसान पशुचर, तालाब व अन्य ग्राम समाज के नंबर को पंजीयन में दर्ज कराया है, तो वह पकड़ में आ जाएगा।
फर्जीवाड़े पर होगी कार्रवाई
ग्राम समाज व दूसरे की जमीन को पंजीयन में दर्ज कराने वाले लोगों को भी चिह्नित किया जाएगा। अगर कोई किसान व बिचौलिया अपने पंजीयन में ग्राम समाज व दूसरे के खेतों का क्षेत्रफल फीड कराया है, तो उसके खिलाफ प्रशासन कार्रवाई करेगा।
धान खरीद में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए एप बनाया गया है। जब किसान पंजीयन कराता है, तो एनआईसी से उसकी कॉपी निकाल कर क्षेत्रीय लेखपाल को दी जाती है। लेखपाल प्रत्येक पंजीकृत किसान के खेत में जाकर फोटो करेंगे। उसके बाद मोबाइल एप में फीड करेंगे। बिना फोटो व गाटा संख्या के एप में फीड नहीं होगा। मोबाइल एप से सत्यापन कर काम शुरू करा दिया गया है। - नंदप्रकाश मौर्य, एसडीएम सदर
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डाटा फीड होते ही जिस खेत में धान की फसल रही है, उसका सत्यापन हो जाएगा। जिस खेत में धान नहीं लगा है, वह एप से ही रिजेक्ट हो जाएगा। वहीं ग्राम समाज का नंबर अपने पंजीयन में दिखाकर धान बेचने वालों की भी पोल खुलेगी। इसमें लेखपालों को लगाया गया है।
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क्रय केंद्र में धान बेचने के लिए किसानों को अपनी भूमि का पंजीयन कराना पड़ता है। एक हेक्टेयर में करीब 54 क्विंटल धान खरीदने का मानक है।
ऐसे में बहुत से किसान और बिचौलिया अपने आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और बैंक पासबुक लगाकर पंजीयन करा लेते हैं। भूमि का क्षेत्रफल फर्जी तरीके से दर्ज कर देते हैं।
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इस फर्जीवाड़े को रोकने के लिए डीएम अपूर्वा दुबे ने मोबाइल एप लागू कराया है। जिसमें लेखपाल को खतौनी का नाम सत्यापन करने के साथ ही खेत की फोटो खींच कर फीड करनी होगी।
अगर खेत में दूसरी फसल किसानों ने बोई है और धान का पंजीयन कराया है, तो फोटो अपलोड करते ही सत्यापन में धान तौल कराने की मात्रा कट जाएगी। वहीं अगर कोई किसान पशुचर, तालाब व अन्य ग्राम समाज के नंबर को पंजीयन में दर्ज कराया है, तो वह पकड़ में आ जाएगा।
फर्जीवाड़े पर होगी कार्रवाई
ग्राम समाज व दूसरे की जमीन को पंजीयन में दर्ज कराने वाले लोगों को भी चिह्नित किया जाएगा। अगर कोई किसान व बिचौलिया अपने पंजीयन में ग्राम समाज व दूसरे के खेतों का क्षेत्रफल फीड कराया है, तो उसके खिलाफ प्रशासन कार्रवाई करेगा।
धान खरीद में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए एप बनाया गया है। जब किसान पंजीयन कराता है, तो एनआईसी से उसकी कॉपी निकाल कर क्षेत्रीय लेखपाल को दी जाती है। लेखपाल प्रत्येक पंजीकृत किसान के खेत में जाकर फोटो करेंगे। उसके बाद मोबाइल एप में फीड करेंगे। बिना फोटो व गाटा संख्या के एप में फीड नहीं होगा। मोबाइल एप से सत्यापन कर काम शुरू करा दिया गया है। - नंदप्रकाश मौर्य, एसडीएम सदर