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डीएपी की कालाबाजारी शुरू, 1400 रुपये की बोरी खरीद रहे किसान

Sun, 07 Nov 2021 12:07 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 07 Nov 2021 12:07 AM IST
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fathepur news,Black marketing of DAP started, farmers buying sacks worth Rs 1400
फतेहपुर। जिले में डीएपी की कालाबाजारी शुरू हो गई है। सहकारी समितियों में खाद न होने का फायदा प्राइवेट दुकानदार भी उठा रहे हैं। 1200 रुपये वाली डीएपी 1400 रुपये में बेच रहे हैं।
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ऐसे में बुवाई का काम पिछड़ न जाए, इसलिए किसान महंगे दाम पर डीएपी खरीदने को मजबूर हैं। खाद की कालाबाजारी पर प्रशासन व विभागीय अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
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किसान इन दिनों खाद के लिए परेशान हैं। आलू, राई, सरसों और गेहूं की बुवाई के लिए उन्हें खाद नहीं मिल पा रही है। डीएपी न मिलने के कारण इन फसलों की बुवाई में विलंब हो रहा है।
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किसान डीएपी के लिए सहकारी समितियों के चक्कर लगा रहे हैं। ऐसे में खाद की किल्लत को देखते हुए कालाबाजारी भी शुरू हो गई है। समितियों में खाद न मिलने पर किसान निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीदने पर विवश हैं।
समितियों में खाद का अभाव
फसलों की बुआई के समय किसान खेत में डीएपी डालते हैं। आलू की बुआई में सबसे ज्यादा डीएपी की खपत होती है। रबी सीजन में समितियों में खाद नहीं है। विकास खंड हसवा के सीतापुर, बहरामपुर, टेक्सारी बुजुर्ग, सातो, नरैनी, मुरांव में साधन सहकारी समितियां संचालित हैं। इस समय एक भी समिति में डीएपी नहीं है। किसानों के मुताबिक इन समितियों में यदि थोड़ी खाद आ भी जाती है, तो कुछ लोग ही लाभांवित हो पाते हैं। अधिकांश किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ता है।
चंदौरा गांव के किसान भूरा रैदास ने कहा कि सरसों व गेहूं की बुवाई करने के लिए समितियों में डीएपी नहीं मिल रही है। बुवाई पिछड़ न जाएं, इसलिए प्राइवेट दुकान से 1400 रुपये की डीएपी लेकर बुवाई की है।
बहुआ के किसान अरविंद सिंह ने कहा कि आलू बोने में ज्यादा मात्रा में डीएपी की जरूरत होती है। समितियों में जो डीएपी आई थी, उसमें एक किसान को दो-तीन बोरी से अधिक नहीं दी गई है। जरूरत ज्यादा की है।
गौरी गांव के किसान इंद्रकुमार द्विवेदी ने कहा कि सहकारी समिति व प्राइवेट दुकानों में भी डीएपी नहीं है। जिन दुकानदारों के पास डीएपी है, वह 200 रुपये अधिक लेकर खाद दे रहे हैं। इस बार फसल की बुवाई में दिक्कत होगी।
दशहरी गांव के किसान किसान लक्ष्मण सिंह ने बताया कि कई दिनों से डीएपी के लिए परेशान हैं। समितियों में खाद नहीं है। बाजार में खाद महंगी है और असली की कोई गारंटी नहीं है। इससे काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
एक हफ्ते में खत्म हो गई 2117 मीट्रिक टन डीएपी
जिले में 27 अक्तूबर को 2117 मीट्रिक टन इफ्को की डीएपी आई थी। डीएम अपूर्वा दुबे के निर्देश पर एक किसान को तीन बोरी के हिसाब से डीएपी दी गई। जिले की 73 समितियों में 80 फीसदी और इफ्को बिक्री केंद्रों में 20 फीसदी डीएपी भेजी गई, जो एक हफ्ता भी गोदाम में नहीं टिक सकी। समितियों के अलावा पीसीएफ के गोदाम भी खाली हो गए।
अभी गेहूं की बुुवाई है शेष
रबी के सीजन में किसानों ने राई, सरसों की बुवाई तो कर ली है, लेकिन गेहूं की बुवाई करने का काम अब किसानों ने शुरू किया है। दिसंबर महीने तक गेहूं की बुवाई होगी। वहीं आलू की 50 फीसदी बुवाई किसानों ने कर ली है। अभी 50 फीसदी आलू बोने की तैयारी किसान कर रहे हैं। ऐसे में डीएपी की रैक नहीं आई तो फसलों की बुवाई का काम भी प्रभावित होगा।

जो रैक आई थी, उससे सभी समितियों के माध्यम से किसानों को दो से तीन बोरी खाद दिलाने का काम किया गया है। अगले हफ्ते में फिर में डीएपी की रैक आने की संभावना है। किसानों को जरूरत के अनुसार डीएपी मिलेगी। अगर कोई दुकानदार डीएपी की कालाबाजारी करता है, तो उसकी शिकायत किसान करें। दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - बृजेश सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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