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मधुमक्खी पालन वाले क्षेत्र में 25 फीसदी फसलों का बढ़ेगा उत्पादन
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थरियांव में मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण देते वैज्ञानिक डॉ. जगदीश किशोर। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। कृषि विज्ञान केंद्र थरियांव में किसानों को खेती के साथ मधुमक्खी पालन के लिए प्रेरित किया गया। औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र खुशरूबाग प्रयागराज के प्रभारी विजय किशोर सिंह ने कहा कि एक यूनिट मधुमक्खी पालन करके किसान को दो से ढाई लाख रुपये की आमदनी होगी। साथ ही जिस क्षेत्र में मधुमक्खी रहेंगी, वहां की फसलों में 20 से 30 फीसदी पैदावार अधिक होगी।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद अटारी एवं चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के सहयोग से थरियांव में सात दिवसीय प्रशिक्षण चल रहा है। जिसमें किसानों को खेती के साथ मधुमक्खी पालन करने के लिए प्रेरित किया गया।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. जगदीश किशोर ने कहा कि मधुमक्खी पालन से किसान आत्मनिर्भर होगा। इस व्यवसाय से किसानों की खेती का काम भी प्रभावित नहीं होगा। मधुमक्खी पालन से मोम, शहद तो तैयार होता ही है।
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साथ ही मधुमक्खी जिस खेत या फसल से पराग प्राप्त करती हैं, उन फसलों में 20 से 30 प्रतिशत की पैदावार बढ़ जाती है। एक यूनिट यानि 50 बाक्स में मधुमक्खी पालन से साल में दो से ढाई लाख रुपये की आमदनी होगी।
कृषि वैज्ञानिक डॉ.नौशाद आलम ने कहा कि मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र से एक-एक बाक्स उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा डॉ. जितेंद्र सिंह, डॉ. साधना ने किसानों को वैज्ञानिक ढंग से खेती करने और साथ में मधुमक्खी पालन व पशुपालन करने के लिए प्रेरित किया।
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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद अटारी एवं चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के सहयोग से थरियांव में सात दिवसीय प्रशिक्षण चल रहा है। जिसमें किसानों को खेती के साथ मधुमक्खी पालन करने के लिए प्रेरित किया गया।
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कृषि वैज्ञानिक डॉ. जगदीश किशोर ने कहा कि मधुमक्खी पालन से किसान आत्मनिर्भर होगा। इस व्यवसाय से किसानों की खेती का काम भी प्रभावित नहीं होगा। मधुमक्खी पालन से मोम, शहद तो तैयार होता ही है।
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साथ ही मधुमक्खी जिस खेत या फसल से पराग प्राप्त करती हैं, उन फसलों में 20 से 30 प्रतिशत की पैदावार बढ़ जाती है। एक यूनिट यानि 50 बाक्स में मधुमक्खी पालन से साल में दो से ढाई लाख रुपये की आमदनी होगी।
कृषि वैज्ञानिक डॉ.नौशाद आलम ने कहा कि मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र से एक-एक बाक्स उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा डॉ. जितेंद्र सिंह, डॉ. साधना ने किसानों को वैज्ञानिक ढंग से खेती करने और साथ में मधुमक्खी पालन व पशुपालन करने के लिए प्रेरित किया।