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फतेहपुर: चार बैंकों में ऑनलाइन खाते खोल लाखों का हुआ लेनदेन, नाबालिग रिक्शाचालक के नाम से खोले गए कई बैंकों में खाते

Fri, 05 Aug 2022 12:30 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 05 Aug 2022 12:30 AM IST
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Fatehpur: Online accounts opened in four banks, transactions worth lakhs happened, accounts in many banks were opened in the name of minor rickshaw puller
फतेहपुर। किसी शातिर ने नाबालिग रिक्शा चालक के नाम से ऑनलाइन चार बैंक खाते खोलकर लाखों रुपये का लेनदेन कर लिया। बैंकों से एटीएम कार्ड और चेक बुक आने पर रिक्शा चालक को बैंक खातों से रुपये निकाले जाने का पता लगा। जब उसने बैंक के अफसरों से जानकारी मांगी। बैंक के अफसरों ने खाते से लेनदेन करने पर रोक लगाने की जानकारी दी। उसकी थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं होने पर कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर आईटी एक्ट, धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है।
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बकेवर थाने के रामपुर बकेवर निवासी इरफान खान का पुत्र अयान खान (16) ई-रिक्शा चालक है। अयान ने बताया कि वह कम पढ़ा लिखा है। जनवरी में इंटरनेट की एक वेबसाइट पर बैंकों की केवाईसी कराने पर एक हजार रुपये मिलने के बारे में पढ़ा था। रोजगार मानकर वेबसाइट खोली, जिसमें उसे एक व्हाट्सएप नंबर मिला। उस नंबर पर संपर्क करने पर एक युवक का फोन आया।
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फोन करने वाले ने बताया कि एक केवाईसी पर एक हजार रुपये मिलेंगे। केवाईसी भरने के बहाने लिंक भेजा। लिंक में मांगी जाने वाली सारी जानकारियां भरी। जिसके बाद एक्सिस बैंक ब्रांच बिंदकी, एचडीएफसी, फेडरल बैंक, एयू स्माल फाइनेंस बैंक ब्रांच कानपुर में उसके ऑनलाइन खाते खुले। पांचवां खाता उसका यूनियन बैंक में खोलने का प्रयास हुआ, लेकिन नहीं खुला। इन सभी खातों में उस शातिर ने अपना नंबर लिंक कर रखा था। उसके बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते से यूपीआई के माध्यम से 31 जनवरी से 17 फरवरी तक नौ हजार रुपये आए। उसके बाद 23 फरवरी से 28 फरवरी के बीच 5800 रुपये उसे फोन करने वाले ने यूपीआई के माध्यम से मंगा लिए। फरवरी में ही दो बैंकों की चेकबुक और चारों के एटीएम कार्ड उसके घर आए। तभी फोन करने वाले शातिर ने इन खातों के बारे में पूछताछ की। उसने मार्च में धमकी दी थी कि इन ट्रांजेक्शन के बारे में किसी को नहीं बताना। अगर बताया तो वह पुलिस केस में फंस सकता है। तभी उसने सारी जानकारी परिजनों को दी।
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बकेवर थानाध्यक्ष को पांच जुलाई को शिकायती पत्र देकर घटना की जानकारी दी। परिजनों के साथ अयान बैंक में लेनदेन का पता करने पहुंचा। सभी खातों से रुपये निकालने पर रोक लगने का पता लगा। बैंकों से सिर्फ लाखों रुपये के ट्रांजेक्शन के बारे में बताया गया है। इसी वजह से बैंक के खातों पर प्रतिबंध लगाया गया है। बैंकों द्वारा बताया कि वह पुलिस और किसी एजेंसी के पूछने पर खाते संबंधी जानकारी लिखित रूप से दे सकते हैं। प्रभारी निरीक्षक गिरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर बुधवार रात मुकदमा दर्ज किया गया है। लेनदेन की बैंकों में जाकर जानकारी जुटाई जाएगी। जांच के बाद स्पष्ट होगा।

वीडियो कॉल से कराया वेरीफिकेशन
अयान के चाचा सरताज ने बताया कि छोटे-छोटे ट्रांजेक्शन कर भतीजे को धोखाधड़ी के मामले में फंसाया गया था। बैंक खाते खुलने से पहले वेरीफिकेशन कॉल भतीजे के पास आई थी। शातिर ने भतीजे को पहले ही फोन कर बताया कि उसके पास वीडियो काल आएगी। वह बैंक खाता खोलने के बारे में पूछेंगे, लेकिन उसका खाता नहीं खुलेगा। वह उनकी हर बात पर हां करता रहे। एटीएम आने के बाद भतीजे को चालू कराने के लिए भी एटीएम बूथ पर भेजता रहा। उसे एटीएम चालू करने की जानकारी देता रहा। उसका ही नंबर लिंक था। ओटीपी भी उसके पास ही पहुंचती रही है। पूरे खेल में नेट बैंकिंग का इस्तेमाल किया है। चारों बैंक खातों में कई बार ट्रांजेक्शन किया गया है। एक से दूसरे खाते में रकम भेजता रहा है। चेकबुक एयू स्माल और एचडीफसी बैंक की आई थी।
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