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किसानों को गेहूं बेचने के लिए नहीं मिल रहा ऑनलाइन टोकन
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फतेहपुर। सरकारी क्रय केंद्रों में गेहूं बेचने की तैयारी कर रहे किसानों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। 15 जून तक गेहूं की सरकारी खरीद होनी है और इस तारीख तक के सारे टोकन अपलोड हो चुके हैं। यानी किसानों के सामने सरकारी दर पर गेहूं बेचना का ही संकट खड़ा हो गया है।
उपज को घर में रखना मुश्किल है। कई किसानों को सहालग और दूसरी जरूरत के लिए नगदी की जरूरत है। ऐसे में उन्हें उपज को औने पौने दाम पर बेचने को मजबूर होना पड़ सकता है। किसानों के सामने उपजी इस समस्या के पीछे बिचौलियों का हाथ भी बताया जा रहा है। आरोप है कि बिचौलियों ने ही ऑनलाइन टोकन अपलोड कर लिए हैं। अब किसान उपज नहीं बेच पा रहा है तो मजबूरी में उसे बिचौलियों का सहारा लेना पड़ेगा।
गेहूं खरीद में पारदर्शिता के लिए सरकार ने ऑनलाइन पंजीकरण कराने के बाद टोकन जनरेट करने का नियम इस बार लागू किया है। इसका फायदा किसानों से अधिक बिचौलिया उठा रहे हैं।
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जब किसान फसल कटाई, मड़ाई और भूसा की ढुलाई कर रहे थे, तभी गेहूं की खरीद में दखल देने वाले बिचौलियों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराके टोकन जनरेट कर लिए। जब किसानों को गेहूं बेचने का नंबर आया और उन्होंने ऑनलाइन पंजीकरण कराने के बाद टोकन जनरेट करना शुरू किया तो पता चला कि जून तक की सभी तारीखें पहले से फुल हो चुकी हैं। ऐसे में किसान सरकारी खरीद केंद्र में अपने गेहूं को नहीं बेच पा रहे हैं। सरकारी मशीनरी पर किसान सवाल उठा रहे हैं।
एक दिन में 300 क्विंटल के टोकन होते हैं जनरेट
एक क्रय केंद्र में रोज 300 क्विंटल गेहूं खरीदने का निर्देश हैं। इसी आधार पर किसानों को ऑनलाइन टोकन जनरेट होते हैं। जब 300 क्विंटल तक के टोकन जनरेट हो जाते हैं, तो आगे की तारीख के टोकन जनरेट होना शुरू हो जाते हैं। इसी आधार से जून के दूसरे सप्ताह तक के टोकन ऑनलाइन जनरेट हो चुके हैं। 15 जून तक गेहूं की खरीद होनी है। गेहूं बेचने वाले किसानों के टोकन जनरेट नहीं हो रहे हैं।
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उपज को घर में रखना मुश्किल है। कई किसानों को सहालग और दूसरी जरूरत के लिए नगदी की जरूरत है। ऐसे में उन्हें उपज को औने पौने दाम पर बेचने को मजबूर होना पड़ सकता है। किसानों के सामने उपजी इस समस्या के पीछे बिचौलियों का हाथ भी बताया जा रहा है। आरोप है कि बिचौलियों ने ही ऑनलाइन टोकन अपलोड कर लिए हैं। अब किसान उपज नहीं बेच पा रहा है तो मजबूरी में उसे बिचौलियों का सहारा लेना पड़ेगा।
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गेहूं खरीद में पारदर्शिता के लिए सरकार ने ऑनलाइन पंजीकरण कराने के बाद टोकन जनरेट करने का नियम इस बार लागू किया है। इसका फायदा किसानों से अधिक बिचौलिया उठा रहे हैं।
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जब किसान फसल कटाई, मड़ाई और भूसा की ढुलाई कर रहे थे, तभी गेहूं की खरीद में दखल देने वाले बिचौलियों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराके टोकन जनरेट कर लिए। जब किसानों को गेहूं बेचने का नंबर आया और उन्होंने ऑनलाइन पंजीकरण कराने के बाद टोकन जनरेट करना शुरू किया तो पता चला कि जून तक की सभी तारीखें पहले से फुल हो चुकी हैं। ऐसे में किसान सरकारी खरीद केंद्र में अपने गेहूं को नहीं बेच पा रहे हैं। सरकारी मशीनरी पर किसान सवाल उठा रहे हैं।
एक दिन में 300 क्विंटल के टोकन होते हैं जनरेट
एक क्रय केंद्र में रोज 300 क्विंटल गेहूं खरीदने का निर्देश हैं। इसी आधार पर किसानों को ऑनलाइन टोकन जनरेट होते हैं। जब 300 क्विंटल तक के टोकन जनरेट हो जाते हैं, तो आगे की तारीख के टोकन जनरेट होना शुरू हो जाते हैं। इसी आधार से जून के दूसरे सप्ताह तक के टोकन ऑनलाइन जनरेट हो चुके हैं। 15 जून तक गेहूं की खरीद होनी है। गेहूं बेचने वाले किसानों के टोकन जनरेट नहीं हो रहे हैं।