{"_id":"60c8ef108ebc3eac620d5110","slug":"fatehpur-news-fatehpur-news-knp634405768","type":"story","status":"publish","title_hn":"एफआईआर के सात महीने बाद निलंबित हो पाए पंचायत सचिव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एफआईआर के सात महीने बाद निलंबित हो पाए पंचायत सचिव
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फतेहपुर। हथगाम ब्लाक की पट्टीशाह ग्राम पंचायत के जिस घोटाले को राज्यमंत्री ने सीएम के समक्ष उठाया और टीएसी कमेटी ने जांच में आरोप सही पाए, उस मामले में दोषी पंचायत सचिवों पर एफआईआर कराने के बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
एफआईआर के सात महीने बीतने के बावजूद अधिकारियों ने अपने चहेते मातहतों पर कोई कार्रवाई नहीं की बल्कि उन्हें उसी ग्राम पंचायत में तैनात भी रखा। अब जब प्रकरण जिलाधिकारी के संज्ञान में आया तो उन्होंने तत्काल प्रभाव से घोटालेबाज दो पंचायत सचिवों को निलंबित कर दिया है।
क्षेत्रीय विधायक और राज्यमंत्री रणवेंद्र प्रताप धुन्नी सिंह ने मुख्यमंत्री से मिलकर पट्टीशाह गांव में विकास कार्य के नाम पर सरकारी धन के बंदरबांट की शिकायत की थी। इस मसले को अमर उजाला ने एक अक्तूबर 2020 के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। सीएम ने टीएसी कमेटी गठित कर जांच कराई थी।
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कमेटी ने जांच में शिकायत सही पाई और साढ़े तेरह लाख रुपये का गबन साबित हुआ। कमेटी ने तकरीबन साढ़े तीन सौ पेज की जांच रिपोर्ट तैयार शासन को उपलब्ध कराई। जांच में पता चला कि मनरेगा, नाली-खडंजा और सड़क निर्माण के कामों में धनराशि का गबन किया गया था।
इस मामले में तत्कालीन ग्राम प्रधान तक्सीर फातिमा, तैनात रह चुके दो पंचायत सचिव विद्याभूषण व संतोष कुमार, आरईएस के अवर अभियंता अखिलेश यादव और तकनीकी सहायक शिवओम सिंह दोषी पाए गए थे। कमेटी की ओर से सभी के विरुद्घ सरकारी धन के दुरुपयोग और गबन की एफआईआर कराई गई थी।
मगर विकास महकमे के बड़े अधिकारियों की ऐसी कृपा रही कि एफआईआर होने के बावजूद किसी भी सरकारी अधिकारी-कर्मचारी को निलंबित नहीं किया गया। उसमें भी पंचायत सचिव संतोष कुमार तो एफआईआर होने के बाद भी पट्टीशाह में ही तैनात रहे।
यह मामला पिछले सात महीनों से दबा पड़ा था। जिलाधिकारी अपूर्वा दुबे ने प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए पंचायत सचिव संतोष कुमार और विद्याभूूषण को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
इन दोनों के निलंबन के साथ ही आरईएस के जेई अखिलेश यादव के निलंबन के लिए अधिशाषी अभियंता और तकनीकी सहायक शिवओम सिंह के निलंबन के लिए उपायुक्त मनरेगा पुतान सिंह को भी निर्देश दिए गए हैं। डीएम ने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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एफआईआर के सात महीने बीतने के बावजूद अधिकारियों ने अपने चहेते मातहतों पर कोई कार्रवाई नहीं की बल्कि उन्हें उसी ग्राम पंचायत में तैनात भी रखा। अब जब प्रकरण जिलाधिकारी के संज्ञान में आया तो उन्होंने तत्काल प्रभाव से घोटालेबाज दो पंचायत सचिवों को निलंबित कर दिया है।
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क्षेत्रीय विधायक और राज्यमंत्री रणवेंद्र प्रताप धुन्नी सिंह ने मुख्यमंत्री से मिलकर पट्टीशाह गांव में विकास कार्य के नाम पर सरकारी धन के बंदरबांट की शिकायत की थी। इस मसले को अमर उजाला ने एक अक्तूबर 2020 के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। सीएम ने टीएसी कमेटी गठित कर जांच कराई थी।
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कमेटी ने जांच में शिकायत सही पाई और साढ़े तेरह लाख रुपये का गबन साबित हुआ। कमेटी ने तकरीबन साढ़े तीन सौ पेज की जांच रिपोर्ट तैयार शासन को उपलब्ध कराई। जांच में पता चला कि मनरेगा, नाली-खडंजा और सड़क निर्माण के कामों में धनराशि का गबन किया गया था।
इस मामले में तत्कालीन ग्राम प्रधान तक्सीर फातिमा, तैनात रह चुके दो पंचायत सचिव विद्याभूषण व संतोष कुमार, आरईएस के अवर अभियंता अखिलेश यादव और तकनीकी सहायक शिवओम सिंह दोषी पाए गए थे। कमेटी की ओर से सभी के विरुद्घ सरकारी धन के दुरुपयोग और गबन की एफआईआर कराई गई थी।
मगर विकास महकमे के बड़े अधिकारियों की ऐसी कृपा रही कि एफआईआर होने के बावजूद किसी भी सरकारी अधिकारी-कर्मचारी को निलंबित नहीं किया गया। उसमें भी पंचायत सचिव संतोष कुमार तो एफआईआर होने के बाद भी पट्टीशाह में ही तैनात रहे।
यह मामला पिछले सात महीनों से दबा पड़ा था। जिलाधिकारी अपूर्वा दुबे ने प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए पंचायत सचिव संतोष कुमार और विद्याभूूषण को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
इन दोनों के निलंबन के साथ ही आरईएस के जेई अखिलेश यादव के निलंबन के लिए अधिशाषी अभियंता और तकनीकी सहायक शिवओम सिंह के निलंबन के लिए उपायुक्त मनरेगा पुतान सिंह को भी निर्देश दिए गए हैं। डीएम ने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।