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कोरोना से सरकारी स्कूलों का उदय हुआ भाग्य
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फतेहपुर। कोरोना कॉल ने सरकारी स्कूलों का भाग्योदय कर दिया। डेढ़ साल तक निजी स्कूल बंद रहने और फिर फीस के लिए दबाव बनाए जाने से छात्रों ने तेजी से सरकारी स्कूलों की ओर रुख किया है। इस सत्र में साढ़े पांच हजार से ज्यादा छात्र संख्या राजकीय और परिषदीय स्कूलों में बढ़ी है। शिक्षा विभाग के अफसर भी इस बदलाव से हैरान है।
जिलेभर में 47 राजकीय विद्यालय संचालित हैं। सत्र 2020-21 में इन स्कूलों की कुल छात्र संख्या 7733 थी। चालू सत्र में यह संख्या बढ़कर 8404 हो गई है। यानी राजकीय विद्यालयों में 671 नए छात्रों ने प्रवेश लिया है।
इसी प्रकार जिलेभर में परिषदीय स्कूलों की संख्या 2650 है। पिछले साल इन स्कूलों में दो लाख 37 हजार 398 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे, लेकिन चालू सत्र में यह संख्या बढ़कर दो लाख 42 हजार 328 हो गई है। यानी इस सत्र में 4930 छात्र-छात्राएं बढ़े हैं।
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यह संख्या बढ़ने के पीछे कोरोना कॉल में निजी स्कूलों के बंद होने के बाद भी फीस के लिए दबाव बनाया जाना प्रमुख कारण बनकर सामने आया है। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों का कहना है कि जब निजी स्कूल बंद रहने के कारण पढ़ाई ही नहीं हुई है और बिना परीक्षा के बच्चे प्रमोट कर दिए गए हैं तो ऐसे में अभिभावक मोटी फीस वाले स्कूलों में बच्चों का नामांकन क्यों कराएं, यही कारण भी है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की छात्र संख्या बढ़ी है।
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जिलेभर में 47 राजकीय विद्यालय संचालित हैं। सत्र 2020-21 में इन स्कूलों की कुल छात्र संख्या 7733 थी। चालू सत्र में यह संख्या बढ़कर 8404 हो गई है। यानी राजकीय विद्यालयों में 671 नए छात्रों ने प्रवेश लिया है।
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इसी प्रकार जिलेभर में परिषदीय स्कूलों की संख्या 2650 है। पिछले साल इन स्कूलों में दो लाख 37 हजार 398 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे, लेकिन चालू सत्र में यह संख्या बढ़कर दो लाख 42 हजार 328 हो गई है। यानी इस सत्र में 4930 छात्र-छात्राएं बढ़े हैं।
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यह संख्या बढ़ने के पीछे कोरोना कॉल में निजी स्कूलों के बंद होने के बाद भी फीस के लिए दबाव बनाया जाना प्रमुख कारण बनकर सामने आया है। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों का कहना है कि जब निजी स्कूल बंद रहने के कारण पढ़ाई ही नहीं हुई है और बिना परीक्षा के बच्चे प्रमोट कर दिए गए हैं तो ऐसे में अभिभावक मोटी फीस वाले स्कूलों में बच्चों का नामांकन क्यों कराएं, यही कारण भी है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की छात्र संख्या बढ़ी है।