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किसानों और अधिकारियों की हठधर्मिता में फंसा बाईपास निर्माण
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बिंदकी। किसानों की सहमति के बिना 10 साल पहले बना बिंदकी बाईपास पीडब्ल्यूडी के लिए गले की फांस बना है। करीब आठ करोड़ की धनराशि खर्च होने के बावजूद अभी तक बाईपास का 100 मीटर हिस्सा अधूरा पड़ा है। बिना मुआवजा दिए जबरन बाईपास बनाने के प्रयास को हाईकोर्ट ने रोकते हुए किसानों के पक्ष में फैसला सुनाया था। वर्तमान में बीच का रास्ता खोजने के लिए गठित समिति के पास मामला विचाराधीन है। अफसर रिपोर्ट मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
बांदा-टांडा मार्ग बिंदकी कस्बे के मध्य से गुजरता है। ट्रैफिक अधिक होने के कारण जाम की समस्या को देखते हुए 2011 में बिंदकी नगर के बाहर से बाईपास बनाने की स्वीकृति मिली थी। इसके लिए शासन ने आठ करोड़ 25 लाख की धनराशि स्वीकृत की थी। बाईपास निर्माण में बिंदकी, कोहना, जाफराबाद के 422 किसानों की जमीनों का उनकी सहमति से बैनामा कराया जाना था।
इनमें से 11 किसानों ने सर्किल रेट को लेकर असहमति जताई थी और बैनामा नहीं किया था। भू स्वामियों और कार्यदायी संस्था पीडब्ल्यूडी के अफसरों के बीच कई बार इस मामले में वार्ता हुई, लेकिन सर्किल रेट को लेकर सहमति नहीं बनी।
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इससे बाईपास अधूरा पड़ा है। बाईपास निर्माण को लेकर जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारियों की उपेक्षा का परिणाम है कि मात्र बाईपास का 100 मीटर का हिस्सा अधूरा होने से पूरा बाईपास बंद है। निर्माण पूरा कराने के लिए शासन स्तर तक इन 10 सालों में पैरवी की गई, लेकिन अभी तक समस्या का निराकरण नहीं हुआ है।
बिना सहमति के किसानों की जमीन पर बनाई थी रोड
11 किसानों और पीडब्ल्यूडी के बीच सर्किल रेट को लेकर सहमति नहीं बनी थी। इसीलिए किसानों ने अपनी जमीन का बैनामा नहीं किया। इसके बावजूद पीडब्ल्यूडी ने जबरन शकुंतला यादव, नरेंद्र सिंह राठौर, महेंद्र गुप्ता समेत छह किसानों की जमीन पर रोड बना दी थी।
मामले को लेकर किसान एक साल पहले किसान हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट ने 21 दिन के अंदर पीडब्ल्यूडी को अवैध निर्माण उखाड़ने या फिर उसका मुआवजा देने का आदेश दिया था। इसके बावजूद अभी तक न तो पीडब्ल्यूडी ने अवैध निर्माण हटाया और न ही किसानों को मुआवजा दिया है।
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बांदा-टांडा मार्ग बिंदकी कस्बे के मध्य से गुजरता है। ट्रैफिक अधिक होने के कारण जाम की समस्या को देखते हुए 2011 में बिंदकी नगर के बाहर से बाईपास बनाने की स्वीकृति मिली थी। इसके लिए शासन ने आठ करोड़ 25 लाख की धनराशि स्वीकृत की थी। बाईपास निर्माण में बिंदकी, कोहना, जाफराबाद के 422 किसानों की जमीनों का उनकी सहमति से बैनामा कराया जाना था।
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इनमें से 11 किसानों ने सर्किल रेट को लेकर असहमति जताई थी और बैनामा नहीं किया था। भू स्वामियों और कार्यदायी संस्था पीडब्ल्यूडी के अफसरों के बीच कई बार इस मामले में वार्ता हुई, लेकिन सर्किल रेट को लेकर सहमति नहीं बनी।
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इससे बाईपास अधूरा पड़ा है। बाईपास निर्माण को लेकर जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारियों की उपेक्षा का परिणाम है कि मात्र बाईपास का 100 मीटर का हिस्सा अधूरा होने से पूरा बाईपास बंद है। निर्माण पूरा कराने के लिए शासन स्तर तक इन 10 सालों में पैरवी की गई, लेकिन अभी तक समस्या का निराकरण नहीं हुआ है।
बिना सहमति के किसानों की जमीन पर बनाई थी रोड
11 किसानों और पीडब्ल्यूडी के बीच सर्किल रेट को लेकर सहमति नहीं बनी थी। इसीलिए किसानों ने अपनी जमीन का बैनामा नहीं किया। इसके बावजूद पीडब्ल्यूडी ने जबरन शकुंतला यादव, नरेंद्र सिंह राठौर, महेंद्र गुप्ता समेत छह किसानों की जमीन पर रोड बना दी थी।
मामले को लेकर किसान एक साल पहले किसान हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट ने 21 दिन के अंदर पीडब्ल्यूडी को अवैध निर्माण उखाड़ने या फिर उसका मुआवजा देने का आदेश दिया था। इसके बावजूद अभी तक न तो पीडब्ल्यूडी ने अवैध निर्माण हटाया और न ही किसानों को मुआवजा दिया है।