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कृषि कानून के विरोध में किसानों ने निकाला जुलूस
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फतेहपुर। कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का धरना 23वें दिन भी जारी रहा। किसानों ने सरकार के तानाशाही रवैया पर जमकर नारेबाजी की और नहर कालोनी से कलक्ट्रेट तक जुलूस निकाला।
किसानों ने कहा कि जब तक कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया जाता, धरना देकर दिल्ली में चल रहे आंदोलन का समर्थन करते रहेंगे। किसानों के धरने का किसान मजदूर युवा शक्ति, भारतीय किसान यूनियन, अखिल भारतीय किसान महासभा ने समर्थन किया और कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन करने का निर्णय लिया।
किसान नेता मनीष पटेल ने सरकार के बनाए गए कृषि कानूनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भंडारण की सीमा समाप्त करने से फायदा किसका होगा। किसान या व्यापारी का।
असीमित भंडारण करने में सक्षम कौन है। किसान या व्यापारी। दूसरे राज्य व दूर की मंडियों में अनाज बेचने के लिए सक्षम कौन है। अनुबंधित खेती में फसल के दाम निर्धारित कौन करेगा।
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जिला पंचायत सदस्य बबलू कालिया ने कहा कि सरकार ने पूंजीपतियों को फायदा दिलाने के लिए कृषि कानूनों को बनाया है। इस मौके पर सदाशिव, सिद्धार्थ शंकर, अर्पित पटेल, राकेश यादव, वीरेंद्र सिंह, राजीव लोचन निषाद, रमेश पटेल, कैलाश विश्वकर्मा, दिनेश पाल, पंकज पटेल मौजूद रहे।
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किसानों ने कहा कि जब तक कृषि कानूनों को रद्द नहीं किया जाता, धरना देकर दिल्ली में चल रहे आंदोलन का समर्थन करते रहेंगे। किसानों के धरने का किसान मजदूर युवा शक्ति, भारतीय किसान यूनियन, अखिल भारतीय किसान महासभा ने समर्थन किया और कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन करने का निर्णय लिया।
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किसान नेता मनीष पटेल ने सरकार के बनाए गए कृषि कानूनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भंडारण की सीमा समाप्त करने से फायदा किसका होगा। किसान या व्यापारी का।
असीमित भंडारण करने में सक्षम कौन है। किसान या व्यापारी। दूसरे राज्य व दूर की मंडियों में अनाज बेचने के लिए सक्षम कौन है। अनुबंधित खेती में फसल के दाम निर्धारित कौन करेगा।
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जिला पंचायत सदस्य बबलू कालिया ने कहा कि सरकार ने पूंजीपतियों को फायदा दिलाने के लिए कृषि कानूनों को बनाया है। इस मौके पर सदाशिव, सिद्धार्थ शंकर, अर्पित पटेल, राकेश यादव, वीरेंद्र सिंह, राजीव लोचन निषाद, रमेश पटेल, कैलाश विश्वकर्मा, दिनेश पाल, पंकज पटेल मौजूद रहे।