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अमौली में आज से लगेगा मेला
ब्यूरो, अमर उजाला फतेहपुर
Updated Tue, 13 Dec 2016 12:26 AM IST
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मंगलवार को कस्बे में लगने वाले मेले और धार्मिक महोत्सव के आयोजन की तैयारी पूरी हो गई। हर वर्ष की तरह इस बार भी मेले में काफी संख्या में लोग पहुंचेंगे। एक माह तक मेला लगेगा। इसमें कानपुर, हमीरपुर, बांदा सहित कई जनपदों से आकर दुकानदार अपनी दुकानें लगाएंगे।
लंका मैदान पर मेले का शुभारंभ बुधवार को होगा। मेला क मेटी के अध्यक्ष अवधेश तिवारी ने बताया कि मेले का उद्घाटन विधायक मदन गोपाल वर्मा करेंगे। यहां बिना जोड़ की कढ़ाही बेचने के लिए मूसा नगर के दुकानदार आते हैं। धार्मिक महोत्सव में भगवान कृष्ण की लीलाओं और रामलीला में लक्ष्मण शक्ति, मेघनाथ, रावण वध के साथ ही सरयू स्नान आदि लीलाओं का मंचन किया जाएगा। मेले में शादी के सामान के साथ घरेलू उपयोग की वस्तुओं की दुकानें लगेंगी। इसके साथ ही बच्चों व बड़ों के लिए विभिन्न प्रकार के झूले का लोग आनंद लेंगे। चाट, पकौड़ी, चाउमीन, बर्गर, आइसक्रीम के स्टाल भी लगेंगे।
बुजुर्ग दुर्गा प्रसाद पांडेय ने बताया कि 144 वर्ष पुराने मेले की शुरुआत यहां के पुजारी रामलाल अवस्थी ने की थी। उस समय तीन दिवसीय मेले का स्वरूप बढ़कर अब एक माह का हो गया है। पुजारी रामलाल के निधन के बाद जमींदार, स्व. मोहन लाल, मदारीलाल ओमर, मन्नालाल, झंडीलाल ने कमेटी में मुख्य रूप से रामगुलाम ओमर, सुंदरलाल, राम प्रताप त्रिवेदी, मुनीम, शिव बालक तिवारी समेत 25 लोगों को शामिल कर मेले को सन् 1950 तक चलाया। इसके बाद राष्ट्रीय युवक मंगल दल के अध्यक्ष धर्मेंद्र देव तिवारी, प्रमोद तिवारी ने संचालन संभाला। 1973 से दुर्गा प्रसाद पांडेय, सागर बाबू गुप्ता, राम कुमार तिवारी ने व्यवस्था संभाल रखी है।
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लंका मैदान पर मेले का शुभारंभ बुधवार को होगा। मेला क मेटी के अध्यक्ष अवधेश तिवारी ने बताया कि मेले का उद्घाटन विधायक मदन गोपाल वर्मा करेंगे। यहां बिना जोड़ की कढ़ाही बेचने के लिए मूसा नगर के दुकानदार आते हैं। धार्मिक महोत्सव में भगवान कृष्ण की लीलाओं और रामलीला में लक्ष्मण शक्ति, मेघनाथ, रावण वध के साथ ही सरयू स्नान आदि लीलाओं का मंचन किया जाएगा। मेले में शादी के सामान के साथ घरेलू उपयोग की वस्तुओं की दुकानें लगेंगी। इसके साथ ही बच्चों व बड़ों के लिए विभिन्न प्रकार के झूले का लोग आनंद लेंगे। चाट, पकौड़ी, चाउमीन, बर्गर, आइसक्रीम के स्टाल भी लगेंगे।
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बुजुर्ग दुर्गा प्रसाद पांडेय ने बताया कि 144 वर्ष पुराने मेले की शुरुआत यहां के पुजारी रामलाल अवस्थी ने की थी। उस समय तीन दिवसीय मेले का स्वरूप बढ़कर अब एक माह का हो गया है। पुजारी रामलाल के निधन के बाद जमींदार, स्व. मोहन लाल, मदारीलाल ओमर, मन्नालाल, झंडीलाल ने कमेटी में मुख्य रूप से रामगुलाम ओमर, सुंदरलाल, राम प्रताप त्रिवेदी, मुनीम, शिव बालक तिवारी समेत 25 लोगों को शामिल कर मेले को सन् 1950 तक चलाया। इसके बाद राष्ट्रीय युवक मंगल दल के अध्यक्ष धर्मेंद्र देव तिवारी, प्रमोद तिवारी ने संचालन संभाला। 1973 से दुर्गा प्रसाद पांडेय, सागर बाबू गुप्ता, राम कुमार तिवारी ने व्यवस्था संभाल रखी है।
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