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Fatehpur News: अल्ट्रासाउंड बंद होने से हर रोज मरीजों को 50 हजार की चोट
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फतेहपुर। जिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड विभाग में रेडियोलाॅजिस्ट के अवकाश पर जाते ही ताला बंद हो जाता है। इससे मरीजों को मजबूरी में निजी अल्ट्रासाउंड लैब में जाना पड़ता है। यहां मरीजों को औसतन 600 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। ये हालात महीने में दो-तीन दिन बनते हैं और मरीजों की जेब कटती है।
जिला अस्पताल (पुरुष) के अल्ट्रासाउंड विभाग में रोजाना 100 से ज्यादा मरीज अल्ट्रासाउंड कराने आते हैं। यहां रोजाना 80 से 90 अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं, बाकी को आगे का नंबर दे दिया जाता है। विभाग में सिर्फ एक रेडियोलॉजिस्ट तैनात है। वह 30 सितंबर व एक अक्तूबर को अवकाश पर रहे। इस बीच अल्ट्रासाउंड का काम बंद हो गया। ऐसे में मरीजों को बाहर अल्ट्रासाउंड कराने जाना पड़ा। वहां मरीजों को पूरे पेट की जांच कराने में 800 से 900 और अन्य अल्ट्रासाउंड के लिए करीब 500 रुपये देने पड़े। इस तरह से औसतन लगभग हर मरीज के 600 रुपये खर्च हुए। एक दिन में औसतन 90 मरीजों के हिसाब से करीब 50 हजार रुपये खर्च किए गए। जिला अस्पताल आने वाले मरीज दो दिन में एक लाख रुपये से ज्यादा खर्च कर चुके हैं।
बताया गया कि रेडियोलॉजिस्ट के पैर में चोट की वजह से वह छुट्टी पर चल रहे हैं। अगर रेडियोलॉजिस्ट आगे भी छुट्टी पर रहते हैं तो मरीजों को अपनी जेब और ढीली करनी पड़ेगी।
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-महिला व पुरुष अस्पताल में तीन पद स्वीकृत
जिला अस्पताल में दो अल्ट्रासाउंड विभाग हैं। एक महिला और दूसरा पुरुष अस्पताल में है। महिला अस्पताल में सिर्फ गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड किया जाता है, जबकि पुरुष अस्पताल में पेट से जुड़े सभी मरीजों का अल्ट्रासाउंड किया जाता है। यहां रेडियोलॉजिस्ट के तीन पद स्वीकृत हैं, लेकिन दोनों अल्ट्रासाउंड कक्ष में एक-एक रेडियोलॉजिस्ट ही तैनात हैं। किसी एक के भी छुट्टी पर जाने से एक कक्ष बंद हो जाता है। रिलीविंग के लिए तीन रेडियोलॉजिस्ट की सख्त आवश्यकता है।
जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के तीन पद स्वीकृत हैं। अस्पताल में डॉक्टरों की कमी वजह से अभी दिक्कत आ रही है। शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द ही तैनाती हो सकती है।
डॉ. आरपी सिंह, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज
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जिला अस्पताल (पुरुष) के अल्ट्रासाउंड विभाग में रोजाना 100 से ज्यादा मरीज अल्ट्रासाउंड कराने आते हैं। यहां रोजाना 80 से 90 अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं, बाकी को आगे का नंबर दे दिया जाता है। विभाग में सिर्फ एक रेडियोलॉजिस्ट तैनात है। वह 30 सितंबर व एक अक्तूबर को अवकाश पर रहे। इस बीच अल्ट्रासाउंड का काम बंद हो गया। ऐसे में मरीजों को बाहर अल्ट्रासाउंड कराने जाना पड़ा। वहां मरीजों को पूरे पेट की जांच कराने में 800 से 900 और अन्य अल्ट्रासाउंड के लिए करीब 500 रुपये देने पड़े। इस तरह से औसतन लगभग हर मरीज के 600 रुपये खर्च हुए। एक दिन में औसतन 90 मरीजों के हिसाब से करीब 50 हजार रुपये खर्च किए गए। जिला अस्पताल आने वाले मरीज दो दिन में एक लाख रुपये से ज्यादा खर्च कर चुके हैं।
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बताया गया कि रेडियोलॉजिस्ट के पैर में चोट की वजह से वह छुट्टी पर चल रहे हैं। अगर रेडियोलॉजिस्ट आगे भी छुट्टी पर रहते हैं तो मरीजों को अपनी जेब और ढीली करनी पड़ेगी।
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-महिला व पुरुष अस्पताल में तीन पद स्वीकृत
जिला अस्पताल में दो अल्ट्रासाउंड विभाग हैं। एक महिला और दूसरा पुरुष अस्पताल में है। महिला अस्पताल में सिर्फ गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड किया जाता है, जबकि पुरुष अस्पताल में पेट से जुड़े सभी मरीजों का अल्ट्रासाउंड किया जाता है। यहां रेडियोलॉजिस्ट के तीन पद स्वीकृत हैं, लेकिन दोनों अल्ट्रासाउंड कक्ष में एक-एक रेडियोलॉजिस्ट ही तैनात हैं। किसी एक के भी छुट्टी पर जाने से एक कक्ष बंद हो जाता है। रिलीविंग के लिए तीन रेडियोलॉजिस्ट की सख्त आवश्यकता है।
जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के तीन पद स्वीकृत हैं। अस्पताल में डॉक्टरों की कमी वजह से अभी दिक्कत आ रही है। शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द ही तैनाती हो सकती है।
डॉ. आरपी सिंह, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज